{"_id":"0d6d486220789147574e86da25bc412d","slug":"affecting-25-percent-of-the-dry-season-farming-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शुष्क मौसम से 25 फीसदी खेती प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शुष्क मौसम से 25 फीसदी खेती प्रभावित
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Thu, 28 Jan 2016 10:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शुष्क मौसम के कारण जिले में 25 प्रतिशत से अधिक खेती प्रभावित हो चुकी है।
खेतों से लगातार नमी कम होने से सरसों, गेहूं, जौ की पैदावार पर असर पड़ रहा है।
जनवरी का महीना खत्म होने को है, लेकिन अब तक बारिश नहीं हुई है।
ऐसे में खेती पर भी असर पड़ने लगा है। पट्टी बच्छणस्यूं के ऊंचाई वाले गांवों के अलावा नागपुर तल्ला क्षेत्र, जखोली ब्लाक के सिलगढ़ पट्टी और ऊखीमठ ब्लाक के केदारघाटी के ऊंचाई से लेकर घाटी क्षेत्र के अधिकांश गांवों में फसल खेतों में मुरझा रही है।
कई स्थानों पर तो खेत सूखे पड़े हुए हैं। जिले में इस माह अब तक बारिश की माप शून्य है। जबकि बीते वर्ष जनवरी माह के मध्य तक 25 मिमी से अधिक बारिश हो गई थी।
घरों में उगने वाली साग-भाजी की उपज भी बारिश के अभाव में प्रभावित हो रही है।
मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी का कहना है कि एक सप्ताह में बारिश हो जाती है तो स्थिति काफी हद तक अच्छी हो जाएगी, अन्यथा उत्पादन पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
खेतों से लगातार नमी कम होने से सरसों, गेहूं, जौ की पैदावार पर असर पड़ रहा है।
जनवरी का महीना खत्म होने को है, लेकिन अब तक बारिश नहीं हुई है।
ऐसे में खेती पर भी असर पड़ने लगा है। पट्टी बच्छणस्यूं के ऊंचाई वाले गांवों के अलावा नागपुर तल्ला क्षेत्र, जखोली ब्लाक के सिलगढ़ पट्टी और ऊखीमठ ब्लाक के केदारघाटी के ऊंचाई से लेकर घाटी क्षेत्र के अधिकांश गांवों में फसल खेतों में मुरझा रही है।
कई स्थानों पर तो खेत सूखे पड़े हुए हैं। जिले में इस माह अब तक बारिश की माप शून्य है। जबकि बीते वर्ष जनवरी माह के मध्य तक 25 मिमी से अधिक बारिश हो गई थी।
विज्ञापन
घरों में उगने वाली साग-भाजी की उपज भी बारिश के अभाव में प्रभावित हो रही है।
मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी का कहना है कि एक सप्ताह में बारिश हो जाती है तो स्थिति काफी हद तक अच्छी हो जाएगी, अन्यथा उत्पादन पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।
विज्ञापन