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यात्रा तो शुरू होगी, रोजगार पर सवाल
Rudraprayag
Updated Tue, 11 Mar 2014 05:32 AM IST
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रुद्रप्रयाग। सरकार जहां केदारनाथ यात्रा शुरू कराने की कसरत में लगी है, वहीं आपदा प्रभावित व्यापारियों और तीर्थ पुरोहितों के व्यवसाय पर सवाल ज्यों का त्यों खड़ा है। वे असमंजस में हैं कि यात्रा शुरू होने पर उनका कामकाज दोबारा से शुरू हो पाएगा कि नहीं। शासन ने व्यापारियों और तीर्थ पुरोहितों की आर्थिक मदद की है, लेकिन व्यापारियों के समक्ष दोबारा अपना व्यापार शुरू करने की चिंता है। इसीलिए व्यापारी सरकार से यात्रा मार्ग पर व्यवसाय चलाने के लिए भूमि आवंटन और आर्थिक पैकेज की मांग कर रहे हैं।
गत वर्ष जून माह में हुई जलप्रलय में केदारनाथ से लेकर तिलवाड़ा तक कई होटल, दुकान, रेस्टोरेंट, धर्मशाला, लॉज और ढाबे बह गए थे। सबसे बुरी स्थिति सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 20 किलोमीटर मार्ग पर थी। गौरीकुंड (आधा हिस्सा), रामबाड़ा और घिनुरपाणी में दोबारा निर्माण लायक जमीन बची ही नहीं है। भीमबली से केदारनाथ तक केदारनाथ पैदल मार्ग भी बदल चुका है। अब मार्ग मंदाकिनी नदी की दूसरी ओर लिनचोली से होकर गुजर रहा है। केदारनाथ धाम में दुकानें मलबे में दबी हुई हैं। आपदा में केदारनाथ यात्रा से जुडे़ लगभग 3000 छोटे-बडे़ व्यापारी प्रभावित हुए हैं।
केदारनाथ में व्यवसाय करने वाले किशन लाल बगवाड़ी और महेंद्र शुक्ला ने बताया कि उनकी धाम में मकान और दुकानें थीं जो आपदा में ध्वस्त हो गई। इससे रोजगार भी खत्म हो गया। यात्रा तो शुरू हो जाएगी, लेकिन वह दोबारा व्यवसाय शुरू कैसे करे। यदि प्रशासन उनको यात्रा मार्ग पर जमीन दे दे तो वे दोबारा से कुछ रोजगार कर सकते हैं।
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अभी केदारपुरी को दोबारा बसाने के मामले में विचार चल रहा है। अभी पैदल मार्ग का निर्माण चल रहा है। सभी तथ्यों पर विचार के बाद भूमि आवंटन का निर्णय लिया जा सकेगा।
-डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग
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गत वर्ष जून माह में हुई जलप्रलय में केदारनाथ से लेकर तिलवाड़ा तक कई होटल, दुकान, रेस्टोरेंट, धर्मशाला, लॉज और ढाबे बह गए थे। सबसे बुरी स्थिति सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 20 किलोमीटर मार्ग पर थी। गौरीकुंड (आधा हिस्सा), रामबाड़ा और घिनुरपाणी में दोबारा निर्माण लायक जमीन बची ही नहीं है। भीमबली से केदारनाथ तक केदारनाथ पैदल मार्ग भी बदल चुका है। अब मार्ग मंदाकिनी नदी की दूसरी ओर लिनचोली से होकर गुजर रहा है। केदारनाथ धाम में दुकानें मलबे में दबी हुई हैं। आपदा में केदारनाथ यात्रा से जुडे़ लगभग 3000 छोटे-बडे़ व्यापारी प्रभावित हुए हैं।
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केदारनाथ में व्यवसाय करने वाले किशन लाल बगवाड़ी और महेंद्र शुक्ला ने बताया कि उनकी धाम में मकान और दुकानें थीं जो आपदा में ध्वस्त हो गई। इससे रोजगार भी खत्म हो गया। यात्रा तो शुरू हो जाएगी, लेकिन वह दोबारा व्यवसाय शुरू कैसे करे। यदि प्रशासन उनको यात्रा मार्ग पर जमीन दे दे तो वे दोबारा से कुछ रोजगार कर सकते हैं।
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अभी केदारपुरी को दोबारा बसाने के मामले में विचार चल रहा है। अभी पैदल मार्ग का निर्माण चल रहा है। सभी तथ्यों पर विचार के बाद भूमि आवंटन का निर्णय लिया जा सकेगा।
-डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग