{"_id":"5ada20204f1c1b390a8b5ad8","slug":"91524244512-rudraprayag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदरी-केदार मंदिर समिति केयर-टेकर बुटोला को करेगी सम्मानित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदरी-केदार मंदिर समिति केयर-टेकर बुटोला को करेगी सम्मानित
Updated Fri, 20 Apr 2018 10:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
रुद्रप्रयाग। श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में कार्यरत मेहरबान सिंह बुटोला को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए पुरस्कृत किया जाएगा। वे वर्ष 1982 से विश्राम गृह रुद्रप्रयाग में केयर-टेकर के रूप में तैनात हैं।
मुख्य बाजार में स्थित विश्राम गृह के भूतल के केयर-टेकर बुटोला ने निष्प्रयोज्य वस्तुओं का बेहतरीन उपयोग कर उसमें 50 से अधिक प्रजाति के औषधीय व पुष्प पादक तैयार किए हैं। उनकी नर्सरी में एलोवेरा, गिलोय, एलकोरिया, बच, सलपाड़ी, मालकंद, दूब, लौंग, पिपरमेंट, गन्ना, बबूल, थुनेर, गुलाब, केला आदि पौध की तैयार की गई है। वे अभी तक सैकड़ों पौधों का नि:शुल्क वितरण भी कर चुके हैं। वे टूटी बाल्टियों, टब, मग, डब्बे, प्लास्टिक केन, टंकी में मिट्टी भरकर उसमें विभिन्न प्रजाति के औषधीय व पुष्प के बीज रोपते हैं। भूतल पर उनकी नर्सरी यहां ठहरने वाले यात्रियों के आकर्षण का केंद्र है। बुटोला जैविक सामग्री से जहां खाद तैयार करते हैं। वहीं, रामबांस, प्लास्टिक के बोरियों से रस्सियां, टोकरी व कूड़ेदान, पर्स, पायदान आदि बनाए हैं। वे बताते हैं कि जड़ी-बूटी, पुष्प उत्पादन और हस्तशिल्प को स्वरोजगार से जोड़कर बेरोजगारी को खत्म किया जा सकता है। इधर, बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह ने बताया कि केयर-टेकर बुटोला जहां विश्राम गृह में ठहरने वाले यात्रियों का पूरा ख्याल रखते हैं। वहीं, पर्यावरण संरक्षण में अपना अहम योगदान दे रहे हैं। श्रीकेदारनाथ व श्रीबदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद समारोह आयोजित कर बुटोला को समिति की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
मुख्य बाजार में स्थित विश्राम गृह के भूतल के केयर-टेकर बुटोला ने निष्प्रयोज्य वस्तुओं का बेहतरीन उपयोग कर उसमें 50 से अधिक प्रजाति के औषधीय व पुष्प पादक तैयार किए हैं। उनकी नर्सरी में एलोवेरा, गिलोय, एलकोरिया, बच, सलपाड़ी, मालकंद, दूब, लौंग, पिपरमेंट, गन्ना, बबूल, थुनेर, गुलाब, केला आदि पौध की तैयार की गई है। वे अभी तक सैकड़ों पौधों का नि:शुल्क वितरण भी कर चुके हैं। वे टूटी बाल्टियों, टब, मग, डब्बे, प्लास्टिक केन, टंकी में मिट्टी भरकर उसमें विभिन्न प्रजाति के औषधीय व पुष्प के बीज रोपते हैं। भूतल पर उनकी नर्सरी यहां ठहरने वाले यात्रियों के आकर्षण का केंद्र है। बुटोला जैविक सामग्री से जहां खाद तैयार करते हैं। वहीं, रामबांस, प्लास्टिक के बोरियों से रस्सियां, टोकरी व कूड़ेदान, पर्स, पायदान आदि बनाए हैं। वे बताते हैं कि जड़ी-बूटी, पुष्प उत्पादन और हस्तशिल्प को स्वरोजगार से जोड़कर बेरोजगारी को खत्म किया जा सकता है। इधर, बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह ने बताया कि केयर-टेकर बुटोला जहां विश्राम गृह में ठहरने वाले यात्रियों का पूरा ख्याल रखते हैं। वहीं, पर्यावरण संरक्षण में अपना अहम योगदान दे रहे हैं। श्रीकेदारनाथ व श्रीबदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद समारोह आयोजित कर बुटोला को समिति की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
विज्ञापन