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61 वर्षो में भी विकास की धारा में शामिल नहीं हो पाया जखोली
Updated Sun, 08 Oct 2017 10:31 PM IST
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ओम प्रकाश बहुगुणा
जखोली। उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले स्व. इंद्रमणि बड़ोनी के प्रयासों से वर्ष 1956 में गठित विकासखंड जखोली 61 वर्ष बाद भी विकास की दौड़ में शामिल नहीं हो पाया है। बड़ोनी यहां के प्रथम प्रमुख थे। 108 ग्राम पंचायतों की 74 हजार 759 कुल जनसंख्या वाले ब्लाक के कई गांव आदिकाल में जीने को मजबूर हैं। विभागों में अधिकारियों के रिक्त पदों के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, सड़क से वंचित कई गांवों में विकास विभाग की योजना तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
वर्ष 1997 में टिहरी से रुद्रप्रयाग जनपद का हिस्सा बना जखोली ब्लाक आज भी हाशिए पर है। पूर्वी बांगर के गांव जहां संचार सुविधा से वंचित हैं। वहीं, पश्चिमी व पूर्वी भरदार के गांव सड़क और पेयजल के लिए तरस रहे हैं। सिलगढ़, फुटगढ़, लस्या, बांगर क्षेत्र में सुविधाओं के नाम पर खानापूर्ति की गई हैं। वर्षों पूर्व स्वीकृत सड़कें व अन्य विकास योजनाएं आज तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। हालात इस कदर हैं कि विकासखंड का एकमात्र पीपीपी मोड पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखोली में मरीजों के लिए बुखार की दवा तक नसीब नहीं हो रही है। जबकि शिक्षा की बदहाली का आलम यह है कि मॉडल इंटर कालेज सिद्धसौड़ व पौंठी सहित माध्यमिक से लेकर प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों का टोटा है। डिग्री कालेज जहां बीएससी मान्यता का इंतजार कर रहा है। वहीं, प्रस्तावित सैनिक स्कूल का निर्माण अधर में लटका हुआ है। जिले का एकमात्र गांव भेंचल इसी ब्लाक में है, जिसका आज तक विद्य़ुतीकरण नहीं हो पाया है। गांवों के विकास का जिम्मा संभालने वाले विकास विभाग में बीडीओ का पद लंबे समय से रिक्त है। एडीओ सांख्यिकी सहित 5 ग्राम विकास अधिकारी व 7 ग्राम विकास अधिकारी के पद दो वर्ष से खाली हैं, जिस ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष महावीर पंवार, कनिष्ठ प्रमुख कमल सिंह रावत, राज्य आंदोलनकारी हयात सिंह राणा, दरम्यान सिंह जखवाल आदि का कहना है कि अलग राज्य बनने के बाद चुने जनप्रतिनिधियों ने विकास के कोरे आश्वासन दिए है। इधर, विधायक भरत सिंह चौधरी ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र में विकास योजनाओं का सभी को लाभ मिले, इसके लिए वे हरसंभव प्रयास करेंगे।
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केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का जनता को अधिकाधिक लाभ हो, इसके लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। उपलब्ध संसाधनों से ही क्षेत्र में विकास कार्य किए जाएंगे।
-- मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
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जखोली। उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले स्व. इंद्रमणि बड़ोनी के प्रयासों से वर्ष 1956 में गठित विकासखंड जखोली 61 वर्ष बाद भी विकास की दौड़ में शामिल नहीं हो पाया है। बड़ोनी यहां के प्रथम प्रमुख थे। 108 ग्राम पंचायतों की 74 हजार 759 कुल जनसंख्या वाले ब्लाक के कई गांव आदिकाल में जीने को मजबूर हैं। विभागों में अधिकारियों के रिक्त पदों के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, सड़क से वंचित कई गांवों में विकास विभाग की योजना तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
वर्ष 1997 में टिहरी से रुद्रप्रयाग जनपद का हिस्सा बना जखोली ब्लाक आज भी हाशिए पर है। पूर्वी बांगर के गांव जहां संचार सुविधा से वंचित हैं। वहीं, पश्चिमी व पूर्वी भरदार के गांव सड़क और पेयजल के लिए तरस रहे हैं। सिलगढ़, फुटगढ़, लस्या, बांगर क्षेत्र में सुविधाओं के नाम पर खानापूर्ति की गई हैं। वर्षों पूर्व स्वीकृत सड़कें व अन्य विकास योजनाएं आज तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। हालात इस कदर हैं कि विकासखंड का एकमात्र पीपीपी मोड पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखोली में मरीजों के लिए बुखार की दवा तक नसीब नहीं हो रही है। जबकि शिक्षा की बदहाली का आलम यह है कि मॉडल इंटर कालेज सिद्धसौड़ व पौंठी सहित माध्यमिक से लेकर प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों का टोटा है। डिग्री कालेज जहां बीएससी मान्यता का इंतजार कर रहा है। वहीं, प्रस्तावित सैनिक स्कूल का निर्माण अधर में लटका हुआ है। जिले का एकमात्र गांव भेंचल इसी ब्लाक में है, जिसका आज तक विद्य़ुतीकरण नहीं हो पाया है। गांवों के विकास का जिम्मा संभालने वाले विकास विभाग में बीडीओ का पद लंबे समय से रिक्त है। एडीओ सांख्यिकी सहित 5 ग्राम विकास अधिकारी व 7 ग्राम विकास अधिकारी के पद दो वर्ष से खाली हैं, जिस ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
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प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष महावीर पंवार, कनिष्ठ प्रमुख कमल सिंह रावत, राज्य आंदोलनकारी हयात सिंह राणा, दरम्यान सिंह जखवाल आदि का कहना है कि अलग राज्य बनने के बाद चुने जनप्रतिनिधियों ने विकास के कोरे आश्वासन दिए है। इधर, विधायक भरत सिंह चौधरी ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र में विकास योजनाओं का सभी को लाभ मिले, इसके लिए वे हरसंभव प्रयास करेंगे।
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केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का जनता को अधिकाधिक लाभ हो, इसके लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। उपलब्ध संसाधनों से ही क्षेत्र में विकास कार्य किए जाएंगे।
-- मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग