{"_id":"59eccee74f1c1bce538b89c9","slug":"81508691687-rudraprayag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के पुनर्निर्माण केलिए 100 करोड़ की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के पुनर्निर्माण केलिए 100 करोड़ की मांग
Updated Sun, 22 Oct 2017 10:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
ऊखीमठ। केदारनाथ मंदिर के रावल भीमाशंकर लिंग ने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के पुनर्निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 100 करोड़ की धनराशि की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में पीएम को ज्ञापन सौंपते हुए मंदिर का ब्लू प्रिंट और नक्शा भी उन्हें दिया है। रावल ने प्रधानमंत्री को पंचकेदार गद्दीस्थल आने का न्योता भी दिया है।
रावल ने विगत 20 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ आगमन पर उनसे भेंट की थी। मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ और प्राचीन कोठा भवन के पुनर्निर्माण के लिए ज्ञापन, ब्लू प्रिंट और नक्शा भी सौंपा। उन्होंने प्रधानमंत्री को शीतकालीन गद्दी स्थल की वर्तमान स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि ओंकारेश्वर मंदिर, कोठा भवन, रावल गद्दी स्थल, रावल निवास, यज्ञशाला, चंडिका मंदिर, ऊषा-अनिरूद्ध विवाह स्थल, भैरवनाथ मंदिर, बाराही मंदिर सहित यात्री निवास की स्थिति बहुत सही नहीं है। पूरे परिसर के पीछे की सुरक्षा दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे खतरा बना हुआ है। उत्तराखंड राज्य बनन के बाद भी इस धार्मिक धरोहर के संरक्षण और सुधार के लिए शासन स्तर पर कोई प्रयास नहीं किए गए हैं, लिहाजा केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण के साथ बाबा केदार के शीतकालीन गद्दी स्थल का भी आधुनिक तरीके से पुनर्निर्माण किया जाए। प्रधानमंत्री ने ज्ञापन पढ़ते हुए उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। रावल ने बताया कि शासन, प्रशासन को केदारनाथ के साथ-साथ शीतकालीन गद्दी स्थल सहित द्वितीय केदार व तृतीय केदार के रखरखाव पर ध्यान देना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। बताया कि इस मामले में पीएमओ कार्यालय से निरंतर संपर्क किया जाएगा।
भूमि पूजन तक सिमटा पुनर्निर्माण
ऊखीमठ। 25 नवंबर 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भगवान मद्महेश्वर की डोली के आगमन पर ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में प्राचीन कोठा भवन पुनर्निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था। शासन की ओर से इस कार्य के लिए पांच करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन 11 माह बीतने के बाद भी इसके नाम पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित हर्ष जमलोकी व पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट का कहना है कि धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए मंदिर का पुनर्निर्माण जरूरी हैं।
विज्ञापन
कोट
बाबा केदार के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ की दयनीय स्थिति के बारे में रावल ने बताया है। एसडीएम को मंदिर परिसर के निरीक्षण को कहा गया है। रिपोर्ट के बाद पुनर्निर्माण व अन्य कार्यो का प्रस्ताव तैयार कर राज्य के माध्यम से केंद्र को भेजा जाएगा। - मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग।
रावल ने विगत 20 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ आगमन पर उनसे भेंट की थी। मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ और प्राचीन कोठा भवन के पुनर्निर्माण के लिए ज्ञापन, ब्लू प्रिंट और नक्शा भी सौंपा। उन्होंने प्रधानमंत्री को शीतकालीन गद्दी स्थल की वर्तमान स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि ओंकारेश्वर मंदिर, कोठा भवन, रावल गद्दी स्थल, रावल निवास, यज्ञशाला, चंडिका मंदिर, ऊषा-अनिरूद्ध विवाह स्थल, भैरवनाथ मंदिर, बाराही मंदिर सहित यात्री निवास की स्थिति बहुत सही नहीं है। पूरे परिसर के पीछे की सुरक्षा दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे खतरा बना हुआ है। उत्तराखंड राज्य बनन के बाद भी इस धार्मिक धरोहर के संरक्षण और सुधार के लिए शासन स्तर पर कोई प्रयास नहीं किए गए हैं, लिहाजा केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण के साथ बाबा केदार के शीतकालीन गद्दी स्थल का भी आधुनिक तरीके से पुनर्निर्माण किया जाए। प्रधानमंत्री ने ज्ञापन पढ़ते हुए उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। रावल ने बताया कि शासन, प्रशासन को केदारनाथ के साथ-साथ शीतकालीन गद्दी स्थल सहित द्वितीय केदार व तृतीय केदार के रखरखाव पर ध्यान देना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। बताया कि इस मामले में पीएमओ कार्यालय से निरंतर संपर्क किया जाएगा।
विज्ञापन
भूमि पूजन तक सिमटा पुनर्निर्माण
ऊखीमठ। 25 नवंबर 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भगवान मद्महेश्वर की डोली के आगमन पर ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में प्राचीन कोठा भवन पुनर्निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था। शासन की ओर से इस कार्य के लिए पांच करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन 11 माह बीतने के बाद भी इसके नाम पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित हर्ष जमलोकी व पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट का कहना है कि धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए मंदिर का पुनर्निर्माण जरूरी हैं।
विज्ञापन
कोट
बाबा केदार के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ की दयनीय स्थिति के बारे में रावल ने बताया है। एसडीएम को मंदिर परिसर के निरीक्षण को कहा गया है। रिपोर्ट के बाद पुनर्निर्माण व अन्य कार्यो का प्रस्ताव तैयार कर राज्य के माध्यम से केंद्र को भेजा जाएगा। - मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग।