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केदारनाथ में अन्नकूट का मेला शुरू
Updated Sun, 06 Aug 2017 10:20 PM IST
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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में रक्षाबंधन पर्व की पूर्व संध्या पर रविवार को अन्नकूट मेला (भतूज) शुरू हो गया है, जो सोमवार तड़के चार बजे तक चलेगा। इस दौरान बाबा के भक्तों के लिए मंदिर के कपाट खुले रहेंगे।
प्राचीन परंपरा के तहत केदारनाथ धाम में अन्नकूट मेले को लेकर रविवार सुबह से तैयारियां शुरू हो गई थी। शाम 6 बजे विशेष अनुष्ठान के अंतर्गत पूजा-अर्चना के बाद मंदिर में अन्नकूट मेला की परंपरा का निर्वहन किया गया। इस मौके पर धाम के मुख्य पुजारी बागेश लिंग द्वारा भगवान आशुतोष के स्वयंभू लिंग की विशेष पूजा-अर्चना की गई। उन्होंने लिंग का चावल से भव्य श्रृंगार किया। भक्तों ने बाबा के दर्शन कर सुख-समृद्धि की मनौती मांगी। आराध्य के इस दिव्य रूप के दर्शन के लिए केदारनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए सोमवार तड़के चार बजे तक खुले रहेंगे।
इधर, विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, घुणेश्वर मंदिर और ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भी भतूज मेले के तहत भगवान आशुतोष की विशेष पूजा की गई। इस मौके पर आराध्य के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ जुटी रही।
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अन्नकूट को लेकर मान्यता
केदारनाथ में रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर मनाए जाने वाले अन्नकूट मेले को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव ने जब विश्व कल्याण के लिए हलाहल विषपान किया था। विष अग्नि को अनेक वन औषधियों और अन्न रस से शांत किया गया था। प्रतीक रुप में आज भी पके हुए चावल (भात) को शिवलिंग के चारों ओर लगाया जाता है। मान्यता यह भी है कि केदारघाटी की अविवाहित लड़कियां विवाह से पूर्व एक बार शिव के इस रुप का दर्शन करने केदारनाथ जाती हैं। वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती बताते हैं कि धाम में इस परंपरा का विशेष महत्व है, जो सदियों से मनाई जा रही है।
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प्राचीन परंपरा के तहत केदारनाथ धाम में अन्नकूट मेले को लेकर रविवार सुबह से तैयारियां शुरू हो गई थी। शाम 6 बजे विशेष अनुष्ठान के अंतर्गत पूजा-अर्चना के बाद मंदिर में अन्नकूट मेला की परंपरा का निर्वहन किया गया। इस मौके पर धाम के मुख्य पुजारी बागेश लिंग द्वारा भगवान आशुतोष के स्वयंभू लिंग की विशेष पूजा-अर्चना की गई। उन्होंने लिंग का चावल से भव्य श्रृंगार किया। भक्तों ने बाबा के दर्शन कर सुख-समृद्धि की मनौती मांगी। आराध्य के इस दिव्य रूप के दर्शन के लिए केदारनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए सोमवार तड़के चार बजे तक खुले रहेंगे।
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इधर, विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, घुणेश्वर मंदिर और ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भी भतूज मेले के तहत भगवान आशुतोष की विशेष पूजा की गई। इस मौके पर आराध्य के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ जुटी रही।
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अन्नकूट को लेकर मान्यता
केदारनाथ में रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर मनाए जाने वाले अन्नकूट मेले को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव ने जब विश्व कल्याण के लिए हलाहल विषपान किया था। विष अग्नि को अनेक वन औषधियों और अन्न रस से शांत किया गया था। प्रतीक रुप में आज भी पके हुए चावल (भात) को शिवलिंग के चारों ओर लगाया जाता है। मान्यता यह भी है कि केदारघाटी की अविवाहित लड़कियां विवाह से पूर्व एक बार शिव के इस रुप का दर्शन करने केदारनाथ जाती हैं। वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती बताते हैं कि धाम में इस परंपरा का विशेष महत्व है, जो सदियों से मनाई जा रही है।