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स्वर्गारोहणी यात्रा के साथ पांडव नृत्य का समापन
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गुप्तकाशी। केदारघाटी के ग्राम पंचायत नाला में चल रहे 21 दिवसीय पांडव नृत्य का स्वर्गारोहणी यात्रा के साथ समापन हुआ। इस मौके पर पांडव पश्वा और स्थानीय लोगों ने एक दूसरे के गले लगाकर विदाई दी।
मां ललिता मंदिर परिसर में आठ दिसंबर से शुरू हुए पांडव नृत्य के अंतिम दिन पांडव स्वर्गारोहणी यात्रा का आयोजन किया गया। पूजा अर्चना के बाद पांडव ज्येष्ठ पुत्र युधिष्ठिर अपने चारों भाई व पत्नी द्रोपदी के साथ यात्रा पर निकले। पांडव केदारनाथ से होते हुए स्वर्गारोहिणी पहुंचे। इसके बाद सभी पांडव पश्वा व स्थानीय लोग ने एक दूसरे और नृत्य में पहुंची ध्याणियों से गले मिलकर भावुक हो गए। प्रधान वीरेंद्र असवाल ने बताया कि गांव में 18 वर्षों बाद हुए पांडव नृत्य का समापन हो गया। अनुष्ठान में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की।
मां ललिता मंदिर परिसर में आठ दिसंबर से शुरू हुए पांडव नृत्य के अंतिम दिन पांडव स्वर्गारोहणी यात्रा का आयोजन किया गया। पूजा अर्चना के बाद पांडव ज्येष्ठ पुत्र युधिष्ठिर अपने चारों भाई व पत्नी द्रोपदी के साथ यात्रा पर निकले। पांडव केदारनाथ से होते हुए स्वर्गारोहिणी पहुंचे। इसके बाद सभी पांडव पश्वा व स्थानीय लोग ने एक दूसरे और नृत्य में पहुंची ध्याणियों से गले मिलकर भावुक हो गए। प्रधान वीरेंद्र असवाल ने बताया कि गांव में 18 वर्षों बाद हुए पांडव नृत्य का समापन हो गया। अनुष्ठान में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की।
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