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आजादी से पूर्व वर्ष 1946 में हुई थी आखिरी हरियाली जात
Updated Thu, 21 Dec 2017 10:29 PM IST
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रुद्रप्रयाग। पट्टी बच्छणस्यूं के नवासू गांव में आजादी से पूर्व वर्ष 1922 और 1934 और 1946 में जात हुई थी। इसके 48 वर्ष बाद ग्रामीणों द्वारा पुन: वर्ष 1994 से जात का प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष तीसरी जात हो रही है।
गांव की बसासत करीब चार सौ वर्ष पुरानी मानी जाती है। गांव के मूल निवासी रौथाण जाति के राजपूत हैं। बाद के वर्षों में यहां रावत, नेगी, असवाल, कठैत और बहुगुणा जाति के कुछ परिवार आकर बसे। गांव की ईष्ट देवी आराध्या मां हरियाली है। बुजुर्गों के अनुसार गांव की बसासत के बाद से प्रत्येक 12 वर्ष में मां हरियाली की जात होती रही है, जबकि वर्षभर में दो बार गेहूं और धान की फसल कटाई पर हरियाली पूजन की परंपरा है।
84 वर्षीय चंडी प्रसाद बहुुगुणा बताते हैं कि वर्ष 1922 और 1934 में भी गांव में हरियाली जात हुई थी। इसका जिक्र पूर्वजों से सुना है, जबकि वर्ष 1946 में तीन दिवसीय हरियाली जात उन्होंने स्वयं देखी है। बाद के 48 वर्षों तक किन्हीं कारणों से यह अनुष्ठान नहीं हो सका। वर्ष 1994 में ग्राम पंचायत नवासू, बंगोली और निषणी के ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से पुन: हरियाली मां की जात आयोजित की गई। वर्ष 2006 में दूसरी और इस वर्ष तीसरी जात हो रही है। आयोजन समिति के अध्यक्ष और पूर्व प्रधान सुरजीत सिंह रौथाण ने बताया कि मां हरियाली देवी की जात का महात्मय ध्याणियों को भेंट अर्पित करना है।
गांव की बसासत करीब चार सौ वर्ष पुरानी मानी जाती है। गांव के मूल निवासी रौथाण जाति के राजपूत हैं। बाद के वर्षों में यहां रावत, नेगी, असवाल, कठैत और बहुगुणा जाति के कुछ परिवार आकर बसे। गांव की ईष्ट देवी आराध्या मां हरियाली है। बुजुर्गों के अनुसार गांव की बसासत के बाद से प्रत्येक 12 वर्ष में मां हरियाली की जात होती रही है, जबकि वर्षभर में दो बार गेहूं और धान की फसल कटाई पर हरियाली पूजन की परंपरा है।
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84 वर्षीय चंडी प्रसाद बहुुगुणा बताते हैं कि वर्ष 1922 और 1934 में भी गांव में हरियाली जात हुई थी। इसका जिक्र पूर्वजों से सुना है, जबकि वर्ष 1946 में तीन दिवसीय हरियाली जात उन्होंने स्वयं देखी है। बाद के 48 वर्षों तक किन्हीं कारणों से यह अनुष्ठान नहीं हो सका। वर्ष 1994 में ग्राम पंचायत नवासू, बंगोली और निषणी के ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से पुन: हरियाली मां की जात आयोजित की गई। वर्ष 2006 में दूसरी और इस वर्ष तीसरी जात हो रही है। आयोजन समिति के अध्यक्ष और पूर्व प्रधान सुरजीत सिंह रौथाण ने बताया कि मां हरियाली देवी की जात का महात्मय ध्याणियों को भेंट अर्पित करना है।
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