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केदारनाथ आपदा के बाद से नहीं ली गई रेल गांव की सुध
Updated Mon, 31 Jul 2017 10:38 PM IST
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गुप्तकाशी। ऊखीमठ ब्लाक का रेल गांव के 20 से अधिक परिवार केदारनाथ आपदा के बाद से खतरे के साए में जी रहे है। गांव के बाई तरफ पड़ी दरार से जहां भूस्खलन व भू-धंसाव का खतरा बना है। वहीं, मंदाकिनी नदी में पुल बहने से ट्राली खेवनहार बनी हुई है, लेकिन आज तक किसी ने ग्रामीणों की सुध नहीं ली है।
ग्राम पंचायत रविग्राम के रेल गांव के दोनों तरफ पड़ी दरार, कभी भी यहां रहने वाले परिवारों के लिए खतरा बन सकती है। हालात यह है कि चार वर्ष से ग्रामीण जर्जर ट्राली के सहारे मंदाकिनी नदी को आरपार कर रहे हैं, लेकिन आज तक न तो इस क्षेत्र का भू-गर्भीय सर्वेक्षण हो पाया और न कोई विशेषज्ञ यहां पहुंचे। ग्राम प्रधान रामेश्वर प्रसाद का कहना है कि आपदा के बाद से बीडीसी व तहसील दिवस में रेल गांव में झूला पुल निर्माण की मांग होती आ रही है, लेकिन अधिकारी अनसुना कर रहे हैं। इधर, क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय जमलोकी का कहना है कि आपदा के बाद से हो रही अनदेखी से आहत ग्रामीण भगवान भरोसे जीने को मजबूर हैं। उन्होंने मंदाकिनी नदी पर पुल निर्माण और रेल गांव में पड़ी दरार का ट्रीटमेंट की मांग की है।
ग्राम पंचायत रविग्राम के रेल गांव के दोनों तरफ पड़ी दरार, कभी भी यहां रहने वाले परिवारों के लिए खतरा बन सकती है। हालात यह है कि चार वर्ष से ग्रामीण जर्जर ट्राली के सहारे मंदाकिनी नदी को आरपार कर रहे हैं, लेकिन आज तक न तो इस क्षेत्र का भू-गर्भीय सर्वेक्षण हो पाया और न कोई विशेषज्ञ यहां पहुंचे। ग्राम प्रधान रामेश्वर प्रसाद का कहना है कि आपदा के बाद से बीडीसी व तहसील दिवस में रेल गांव में झूला पुल निर्माण की मांग होती आ रही है, लेकिन अधिकारी अनसुना कर रहे हैं। इधर, क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय जमलोकी का कहना है कि आपदा के बाद से हो रही अनदेखी से आहत ग्रामीण भगवान भरोसे जीने को मजबूर हैं। उन्होंने मंदाकिनी नदी पर पुल निर्माण और रेल गांव में पड़ी दरार का ट्रीटमेंट की मांग की है।
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