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कालीशिला में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया लाई मेला
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:32 PM IST
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गुप्तकाशी। कालीमठ घाटी में पारंपरिक ‘लाई मेला’ पशुपालकों व ग्रामीणों ने हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस मौके पर पशुपालन को रोजगारपरक बनाने पर जोर दिया गया। मेले में चरवाहों व पशुपालकों को सम्मानित किया गया।
कालीमठ घाटी के कालीशिला गांव में आयोजित लाई मेले में पशुपालकों द्वारा चरवाहों को कलेऊ व अन्य सामग्री भेंट की गई। साथ ही बुग्यालों से लौटी भेड़ों की ऊन निकाली गई। कालीशिला में सेवा इंटरनेशनल संस्था के प्रबंधक अभिषेक कुमार ने कहा किइस मेले को पर्यटन विकास के रूप में विकसित किया जाएगा। कहा कि मुख्य उद्देश्य पारंपरिक मेलों का प्रचार-प्रसार कर उन्हें विकसित करना है। यह, मेला पशुपालन से जुड़ा है, जो कई परिवारों की आर्थिकी का माध्यम है। ऐसे में जरूरी है कि ग्रामीणों को पशुपालन के प्रति और जागरूक किया जाए। ग्राम प्रधान सुलोचना देवी, नरोत्तम सिंह, राकेश नेगी ने कहा कि कालीमठ घाटी, केदारघाटी, मद्महेश्वर घाटी और तुंगनाथ घाटी में कई परिवारों की आर्थिकी पशुपालन है, लेकिन सरकारों के उदासीन रवैए के कारण यह लोग भी विमुख हो रहे हैं। मेले में पशु चिकित्सक डॉ प्रमोद भूटानी के नेतृत्व में चार सदस्यीय चिकित्सक दल ने बुग्यालों से लौटे 250 से अधिक भेड़ों की जांच की। साथ ही पशुपालकों व चरवाहों को पशुपालन के बारे में जरूरी सुझाव भी दिए। इस अवसर पर विजय रावत, मनोज बेंजवाल, सुदर्शन सिंह, प्रेम सिंह, केदार सिंह, दिनेश सत्कारी, राजेंद्र सिंह, मनोज पटवाल आदि मौजूद थे। मेले में कालीशिला सेवा इंटरनेशनल की ओर से सहयोग किया गया। मेले में ब्यूंखी गांव की महिलाएं भी शामिल हुई।
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कालीमठ घाटी के कालीशिला गांव में आयोजित लाई मेले में पशुपालकों द्वारा चरवाहों को कलेऊ व अन्य सामग्री भेंट की गई। साथ ही बुग्यालों से लौटी भेड़ों की ऊन निकाली गई। कालीशिला में सेवा इंटरनेशनल संस्था के प्रबंधक अभिषेक कुमार ने कहा किइस मेले को पर्यटन विकास के रूप में विकसित किया जाएगा। कहा कि मुख्य उद्देश्य पारंपरिक मेलों का प्रचार-प्रसार कर उन्हें विकसित करना है। यह, मेला पशुपालन से जुड़ा है, जो कई परिवारों की आर्थिकी का माध्यम है। ऐसे में जरूरी है कि ग्रामीणों को पशुपालन के प्रति और जागरूक किया जाए। ग्राम प्रधान सुलोचना देवी, नरोत्तम सिंह, राकेश नेगी ने कहा कि कालीमठ घाटी, केदारघाटी, मद्महेश्वर घाटी और तुंगनाथ घाटी में कई परिवारों की आर्थिकी पशुपालन है, लेकिन सरकारों के उदासीन रवैए के कारण यह लोग भी विमुख हो रहे हैं। मेले में पशु चिकित्सक डॉ प्रमोद भूटानी के नेतृत्व में चार सदस्यीय चिकित्सक दल ने बुग्यालों से लौटे 250 से अधिक भेड़ों की जांच की। साथ ही पशुपालकों व चरवाहों को पशुपालन के बारे में जरूरी सुझाव भी दिए। इस अवसर पर विजय रावत, मनोज बेंजवाल, सुदर्शन सिंह, प्रेम सिंह, केदार सिंह, दिनेश सत्कारी, राजेंद्र सिंह, मनोज पटवाल आदि मौजूद थे। मेले में कालीशिला सेवा इंटरनेशनल की ओर से सहयोग किया गया। मेले में ब्यूंखी गांव की महिलाएं भी शामिल हुई।
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