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प्रभु श्रीराम की खड़ाऊ लेकर वन से अयोध्या लौटे भरत
Updated Mon, 30 Oct 2017 09:58 PM IST
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रुद्रप्रयाग। ग्राम पंचायत नरकोटा में आयोजित रामलीला के चौथे दिन राम-भरत मिलाप लीला का मंचन किया गया। पात्रों के सराहनीय अभिनय से दर्शक देर रात्रि तक पांडाल में जमे रहे। इस मौके पर भक्ति गीत भी प्रस्तुत किए गए।
रविवार रात्रि को चौथे दिन की लीला में भगवान श्रीराम राम के वन जाने के बाद जब महामंत्री सुमंत वापस अयोध्या लौटते हैं, तो महाराज दशरथ पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। ननिहाल में पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर राजकुमार भरत और शत्रुघन अयोध्या पहुंचते हैं, तो वे पूरा घटनाक्रम सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। वे अपनी माता कैकेयी को दुत्कारते हैं। इसके बाद राजकुमार भरत अपने भाई राम से मिलने वन चले जाते है, जहां रास्ते में उनकी भेंट केवट से होती है। केवट भरत को श्रीराम के पास ले जाते हैं। भरत के कई बार आग्रह के भी बाद भी श्रीराम वापस आने से इंकार कर देते हैं। भरत बड़े भाई प्रभु श्रीराम की खडाऊ साथ लेकर अयोध्या लौट जाते है। मौके पर कमेटी के अध्यक्ष संदीप भट्टकोटी, मयंक पुरोहित, भाजपा ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष सुरेंद्र जोशी्र विकास सिलोडी, राहुल जोशी, रमेश भट्ट सहित कई लोग मौजूद थे।
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रविवार रात्रि को चौथे दिन की लीला में भगवान श्रीराम राम के वन जाने के बाद जब महामंत्री सुमंत वापस अयोध्या लौटते हैं, तो महाराज दशरथ पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। ननिहाल में पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर राजकुमार भरत और शत्रुघन अयोध्या पहुंचते हैं, तो वे पूरा घटनाक्रम सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। वे अपनी माता कैकेयी को दुत्कारते हैं। इसके बाद राजकुमार भरत अपने भाई राम से मिलने वन चले जाते है, जहां रास्ते में उनकी भेंट केवट से होती है। केवट भरत को श्रीराम के पास ले जाते हैं। भरत के कई बार आग्रह के भी बाद भी श्रीराम वापस आने से इंकार कर देते हैं। भरत बड़े भाई प्रभु श्रीराम की खडाऊ साथ लेकर अयोध्या लौट जाते है। मौके पर कमेटी के अध्यक्ष संदीप भट्टकोटी, मयंक पुरोहित, भाजपा ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष सुरेंद्र जोशी्र विकास सिलोडी, राहुल जोशी, रमेश भट्ट सहित कई लोग मौजूद थे।
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