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पत्थर तराशने को 7 स्थानीय कारीगर जाएंगे केदारनाथ
Updated Thu, 15 Mar 2018 10:35 PM IST
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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में पत्थर तराशने के लिए जनपद के जयकंडी और गुप्तकाशी गांव से सात कारीगर आगामी 20 मार्च को धाम के लिए प्रस्थान करेंगे। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और कारीगर भी वहां पहुंचेंगे, जिससे पत्थरों को तैयार करने व बिछाने का कार्य कपाट खुलने तक पूरा हो सके।
बृहस्पतिवार को डीएम ने स्थानीय कारीगरों से वार्ता कर उन्हें केदारनाथ में हो रहे पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग के लिए प्रेरित किया। कहा कि वे, इस कार्य के जरिए जहां अपनी आर्थिकी को मजबूत करेंगे। वहीं, बाबा केदार की सेवा का अवसर भी मिलेगा। इस पर गुप्तकाशी के 5 और जयकंडी के 2 कारीगर केदारनाथ धाम जाने के लिए तैयार हुए। उन्होंने कहा कि वे गांव जाकर अन्य कारीगरों को भी प्रेरित करेंगे कि वे केदारनाथ चले। इधर, डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि कारीगरों को कार्य करने के लिए जरूरी उपकरण व मशीनें मुहैया करा दी जाएंगी। बता दें कि केदारनाथ में मंदिर मार्ग, मंदिर परिसर और संगम पर बन रहे चबूतरा पर 40,000 पत्थर लगाए जाने हैं। बीते तीन माह से राजस्थान के कारीगर केदारनाथ व सोनप्रयाग में नदी किनारे बोल्डरों से पत्थर तराशने का काम कर रहे हैं, लेकिन वे अभी तक करीब 22 सौ पत्थर ही तैयार कर पाए हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा स्थानीय सहित देश के अन्य राज्यों के पत्थर के कारीगरों को धाम आने का न्योता दिया गया है।
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बृहस्पतिवार को डीएम ने स्थानीय कारीगरों से वार्ता कर उन्हें केदारनाथ में हो रहे पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग के लिए प्रेरित किया। कहा कि वे, इस कार्य के जरिए जहां अपनी आर्थिकी को मजबूत करेंगे। वहीं, बाबा केदार की सेवा का अवसर भी मिलेगा। इस पर गुप्तकाशी के 5 और जयकंडी के 2 कारीगर केदारनाथ धाम जाने के लिए तैयार हुए। उन्होंने कहा कि वे गांव जाकर अन्य कारीगरों को भी प्रेरित करेंगे कि वे केदारनाथ चले। इधर, डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि कारीगरों को कार्य करने के लिए जरूरी उपकरण व मशीनें मुहैया करा दी जाएंगी। बता दें कि केदारनाथ में मंदिर मार्ग, मंदिर परिसर और संगम पर बन रहे चबूतरा पर 40,000 पत्थर लगाए जाने हैं। बीते तीन माह से राजस्थान के कारीगर केदारनाथ व सोनप्रयाग में नदी किनारे बोल्डरों से पत्थर तराशने का काम कर रहे हैं, लेकिन वे अभी तक करीब 22 सौ पत्थर ही तैयार कर पाए हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा स्थानीय सहित देश के अन्य राज्यों के पत्थर के कारीगरों को धाम आने का न्योता दिया गया है।
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