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द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम में नहीं जरूरी सुविधाएं
Updated Wed, 22 Nov 2017 10:46 PM IST
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ऊखीमठ। द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम में आराध्य देव की पूजा आज भी छिल्ले की रोशनी में होती है। राज्य गठन के 17 वर्षों में यहां जरूरी सुविधाएं नहीं जुट पाई हैं। केदारनाथ आपदा के चार वर्ष बाद भी इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर कोई कार्य धरातल पर नहीं हुए हैं। प्रशासन और श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति भी द्वितीय केदार में जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर सिर्फ आश्वासन तक ही सीमित हैं।
ऊखीमठ ब्लाक के रांसी गांव से 18 किमी पैदल दूरी तय कर द्वितीय केदार मद्महेश्वर पहुंचा जाता है। इस पैदल मार्ग पर गौंडार गांव से बणतोली और खंडरा तक ही पानी की सुविधा है। शेष आठ किमी पैदल मार्ग पर पानी सहित अन्य कोई सुविधा नहीं हैं। मद्महेश्वर धाम सहित अधिकांश पैदल मार्गों पर संचार सेवा की स्थिति भी बदहाल है। मंदिर क्षेत्र में शौचालय की भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। बिजली नहीं होने से यात्राकाल में पूजा-अर्चना छिल्ले की रोशनी में होती है। मंदिर क्षेत्र में ठहरने के लिए गिनती के छप्पर हैं, जिसमें हक-हकूकधारी और मंदिर समिति के कर्मचारी रहते हैं। जरूरी सुविधाएं नहीं होने से द्वितीय केदार में श्रद्धालु भी कम पहुंच रहे हैं। वर्ष 2015 में जहां 2600 यात्री यहां पहुंचे थे। वहीं, 2016 में मात्र 2100 और इस वर्ष 2200 के करीब श्रद्धालु पहुंचे हैं।
पांचवें धाम की घोषणा भी धरातल पर नहीं
द्वितीय केदार मद्महेश्वर को पांचवें धाम के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2015 में घोषणा की थी, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्य नहीं हो पाया। धाम की यात्रा को श्रीनंदा राजजात की तर्ज पर संचालित करने के वायदे भी हवाई साबित हुए हैं। पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट का कहना है कि अलग राज्य बनने के बाद भी तीर्थाटन केदारनाथ से आगे नहीं बढ़ पाया है। द्वितीय केदार में विकास के नाम पर शासन, प्रशासन और मंदिर समिति के कोरे आश्वासन ही मिले हैं।
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भगवान भरोसे मंदिर की सुरक्षा
द्वितीय केदार की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। मध्य हिमालय में स्थित इस मंदिर की सुरक्षा के लिए शासन, प्रशासन और बीकेटीसी द्वारा आज तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे में मंदिर शीतकाल में भगवान भरोसे है।
इनका कहना है -
द्वितीय केदार की यात्रा को सुरक्षित और सरल बनाने के साथ ही मंदिर क्षेत्र में जरूरी व्यवस्थाओं के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। आगामी यात्रा शुरू होने से पूर्व कुछ जरूरी व्यवस्थाएं धाम में जुटा दी जाएंगी।
-बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी बीकेटीसी
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ऊखीमठ ब्लाक के रांसी गांव से 18 किमी पैदल दूरी तय कर द्वितीय केदार मद्महेश्वर पहुंचा जाता है। इस पैदल मार्ग पर गौंडार गांव से बणतोली और खंडरा तक ही पानी की सुविधा है। शेष आठ किमी पैदल मार्ग पर पानी सहित अन्य कोई सुविधा नहीं हैं। मद्महेश्वर धाम सहित अधिकांश पैदल मार्गों पर संचार सेवा की स्थिति भी बदहाल है। मंदिर क्षेत्र में शौचालय की भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। बिजली नहीं होने से यात्राकाल में पूजा-अर्चना छिल्ले की रोशनी में होती है। मंदिर क्षेत्र में ठहरने के लिए गिनती के छप्पर हैं, जिसमें हक-हकूकधारी और मंदिर समिति के कर्मचारी रहते हैं। जरूरी सुविधाएं नहीं होने से द्वितीय केदार में श्रद्धालु भी कम पहुंच रहे हैं। वर्ष 2015 में जहां 2600 यात्री यहां पहुंचे थे। वहीं, 2016 में मात्र 2100 और इस वर्ष 2200 के करीब श्रद्धालु पहुंचे हैं।
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पांचवें धाम की घोषणा भी धरातल पर नहीं
द्वितीय केदार मद्महेश्वर को पांचवें धाम के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2015 में घोषणा की थी, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्य नहीं हो पाया। धाम की यात्रा को श्रीनंदा राजजात की तर्ज पर संचालित करने के वायदे भी हवाई साबित हुए हैं। पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट का कहना है कि अलग राज्य बनने के बाद भी तीर्थाटन केदारनाथ से आगे नहीं बढ़ पाया है। द्वितीय केदार में विकास के नाम पर शासन, प्रशासन और मंदिर समिति के कोरे आश्वासन ही मिले हैं।
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भगवान भरोसे मंदिर की सुरक्षा
द्वितीय केदार की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। मध्य हिमालय में स्थित इस मंदिर की सुरक्षा के लिए शासन, प्रशासन और बीकेटीसी द्वारा आज तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे में मंदिर शीतकाल में भगवान भरोसे है।
इनका कहना है -
द्वितीय केदार की यात्रा को सुरक्षित और सरल बनाने के साथ ही मंदिर क्षेत्र में जरूरी व्यवस्थाओं के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। आगामी यात्रा शुरू होने से पूर्व कुछ जरूरी व्यवस्थाएं धाम में जुटा दी जाएंगी।
-बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी बीकेटीसी