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मंदाकिनी महोत्सव का आखिरी दिन मातृशक्ति को समर्पित

Sat, 11 Nov 2017 10:10 PM IST
Updated Sat, 11 Nov 2017 10:10 PM IST
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मंदाकिनी महोत्सव का आखिरी दिन मातृशक्ति को समर्पित

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अगस्त्यमुनि। क्रीड़ा मैदान में आयोजित मंदाकिनी शरदोत्सव का आखिरी दिन मातृशक्ति को समर्पित रहा। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सरोज नैथानी की पहल पर जहां बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत होनहार बेटियों को सम्मानित किया गया, वहीं, उन दंपतियों को भी पुरस्कृत किया गया, जिन्होंने दो बेटियां होने के बावजूद परिवार नियोजन अपनाया है।
पांचवें और आखिरी दिन मेला कार्यक्रमों का शुभारंभ पूर्व विधायक आशा नौटियाल ने किया। उन्होंने कहा कि मंदाकिनी शरदोत्सव प्राचीन मेलों में शामिल है। इसके विस्तार और संरक्षण के लिए सभी लोगों को मिलकर कार्य करना होगा।
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सीएमओ डॉ. नैथानी की पहल पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही जनपद की पांच बेटियों को मंदाकिनी महोत्सव से सम्मानित किया गया। इसमें एसडीएम मुक्ता मिश्रा, मशरूम उत्पादन सहित स्वरोजगार के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही भीरी गांव निवासी रंजना रावत, गांव-गांव तक योग पहुंचाने वाली सतेराखाल निवासी संतोष बत्र्वाल, रिलायंस में कार्यरत हेमलता और कविता लेखन कर रही कक्षा 10 की छात्रा प्रर्मिला बुटोला को रुद्रप्रयाग के विधायक भरत सिंह चौधरी ने शॉल भेंट कर मंदाकिनी महोत्सव मेें सम्मानित किया।
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इस मौके पर चौधरी ने कहा कि वे माता-पिता सौभाग्यशाली हैं, जिनके घर बेटियां हैं। शिक्षा, संस्कृति, खेल, राजनीति, विज्ञान सहित अन्य सभी क्षेत्रों में बेटियां अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पांच दंपतियों, जिसमें पूजा देवी पत्नी खेमराज, बबीता देवी पत्नी विकास सिंह, आशा देवी पत्नी पुष्कर सिंह, पुष्पा देवी पत्नी प्रमोद सिंह और आशा देवी पत्नी रंजीत सिंह को विशेष सम्मान से नवाजा गया। इन दंपतियों ने दो बेटियां होने के बावजूद परिवार नियोजन अपनाया है।
मेहमान अतिथि विधायक भरत सिंह चौधरी ने सीएमओ डॉ. नैथानी की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे माता-पिता बधाई के पात्र हैं, जो बेटियों का इतना मान करते हैं। मेला समिति की ओर से शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, सामाजिक सेवा, पर्वतारोहण और खेल के क्षेत्र में भी कई लोगों को सम्मानित किया गया। मेले के अंतिम सत्र में शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं द्वारा लोक संस्कृति पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
इस मौके पर मेलाध्यक्ष अशोक खत्री, हर्षवर्धन बेंजवाल, बीएस नेगी, आरएस नेगी, हरीश गुंसाई, रमेश बेंजवाल, सूबेदार तेजपाल सिंह, लक्ष्मण सिंह नेगी, बीरपाल सिंह रावत आदि मौजूद थे।

द्रौपदी की लाज नाटिका रही मुख्य आकर्षण
अगस्त्यमुनि। पतंजलि योगपीठ एवं भारत स्वाभिमान की ओर से द्रौपदी की लाज नृत्य नाटिका का मंचन किया गया। वीरा फरस्वाण के निर्देशन और कृपाल सिंह पंवार व राजेंद्र सिंह नेगी के संचालन में ढोल-दमाऊं की थाप पर महिला पात्रों ने महाभारत में द्रौपदी चीर हरण का गढ़वाली में शानदार मंचन किया। नाटिका में भीष्म, द्रोणाचार्य, श्रीकृष्ण, पांडवों, दुर्योधन-दुशासन, धृतराष्ट्र सहित अन्य सभी पात्रों का अभिनय महिलाओं द्वारा किया गया।


मेलार्थियों की खूब भीड़ रही
अगस्त्यमुनि। मंदाकिनी महोत्सव के अंतिम दिन दोपहर से मेला मैदान में मेलार्थियों की भीड़ जुटने लगी थी। इस दौरान स्टालों में स्थानीय उत्पादों सहित कपड़े और अन्य वस्तुओं की खरीद की भीड़ रही। खेल-तमाशों से लेकर खुली दुकानों में भी खरीदार खूब जुटे।
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