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भूकंप विशेषज्ञों ने किया तोलियूं गांव का स्थलीय निरीक्षण
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:34 PM IST
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अगस्त्यमुनि। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग देहरादून और भूकंप भू-विज्ञान प्रभाग उत्तरी क्षेत्र लखनऊ की टीम ने 6 दिसंबर को आए 5.5 रिक्टर स्केल के भूकंप का केंद्र रहे तोलियूं गांव सहित निकटवर्ती गांवों का निरीक्षण किया। टीम ने पाया कि भूकंप से अधिकांश आवासीय मकानों में हेयर लाइन क्रेक (बाल समान दरारें) आई हैं। वैज्ञानिकों ने भूकंपरोधी तकनीक से भवनों का निर्माण करने पर जोर दिया है।
भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग देहरादून के अधीक्षक भूपेंद्र सिंह व भूकंप भू-विज्ञान प्रभाग उत्तरी रेंज लखनऊ के वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक डा. गुरु दयाल सिंह के नेतृत्व में टीम ने जगोठ, धार, तोंदला, पिल्लू, जहंगी, तोलियूं, गणेश नगर क्षेत्र का भ्रमण कर लोगों से बातचीत की। वैज्ञानिकों ने बताया कि भूकंप का क्षेत्र में हल्का प्रभाव पड़ा है। बताया कि 6 दिसंबर की रात 8.51 बजे भूकंप का झटका 2 से 10 सेकेंड के बीच था। भूकंप के केंद्र की जमीन से गहराई अधिक होने से प्रभाव कम रहा। अगर, यह गहराई 15 से 20 किमी के दायरे में होती तो बड़े स्तर पर नुकसान हो सकता था। बताया कि पर्वतीय क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से जोन फाइव में हैं। इसलिए यहां मकानों के बड़े ढांचे सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने बताया कि भूकंप अलार्म पर शोध किया जा रहा है। इसके परिणाम भविष्य के गर्भ में हैं, इसलिए इस पर चर्चा उचित नहीं हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि भूकंप ज्यादातर रात के समय में आते हैं। इसलिए प्रशासन व आपदा प्रबंधन तंत्र को विशेष सर्तकता बरतने की जरूरत है। टीम में भू-वैज्ञानिक धर्मेंद्र कुमार व पवन कुमार गौतम के साथ राजस्व उप निरीक्षक धनपाल सिंह पंवार भी शामिल थे।
भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग देहरादून के अधीक्षक भूपेंद्र सिंह व भूकंप भू-विज्ञान प्रभाग उत्तरी रेंज लखनऊ के वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक डा. गुरु दयाल सिंह के नेतृत्व में टीम ने जगोठ, धार, तोंदला, पिल्लू, जहंगी, तोलियूं, गणेश नगर क्षेत्र का भ्रमण कर लोगों से बातचीत की। वैज्ञानिकों ने बताया कि भूकंप का क्षेत्र में हल्का प्रभाव पड़ा है। बताया कि 6 दिसंबर की रात 8.51 बजे भूकंप का झटका 2 से 10 सेकेंड के बीच था। भूकंप के केंद्र की जमीन से गहराई अधिक होने से प्रभाव कम रहा। अगर, यह गहराई 15 से 20 किमी के दायरे में होती तो बड़े स्तर पर नुकसान हो सकता था। बताया कि पर्वतीय क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से जोन फाइव में हैं। इसलिए यहां मकानों के बड़े ढांचे सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने बताया कि भूकंप अलार्म पर शोध किया जा रहा है। इसके परिणाम भविष्य के गर्भ में हैं, इसलिए इस पर चर्चा उचित नहीं हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि भूकंप ज्यादातर रात के समय में आते हैं। इसलिए प्रशासन व आपदा प्रबंधन तंत्र को विशेष सर्तकता बरतने की जरूरत है। टीम में भू-वैज्ञानिक धर्मेंद्र कुमार व पवन कुमार गौतम के साथ राजस्व उप निरीक्षक धनपाल सिंह पंवार भी शामिल थे।
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