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चोपता, दुगलबिट्टा व देवरियाताल की सैर करने वालों की होगी मॉनीटरिंग
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रुद्रप्रयाग। अब बर्फबारी का आनंद लेने और नववर्ष मनाने सहित शीतकाल व ग्रीष्मकाल में रमणीक स्थलों और बुग्यालों पर पहुंचने वाले पर्यटकों की नियमित मॉनीटरिंग की जाएगी। बुग्यालों में जहां पर्यटक निर्धारित समय तक रह ही सकेंगे, वहीं बुग्यालों में दोपहर दो बजे के बाद पर्यटकों के जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
प्रशासन और वन विभाग की योजना मध्य हिमालय में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप को सीमित करते हुए बुग्यालों को कूड़ा-कचरा से मुक्त कर पर्यावरण संरक्षित करना है। मिनी स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले चोपता, दुगलबिट्टा, बनियाकुंड, तुंगनाथ, चंद्रशिला, देवरियाताल सहित बुग्यालों के संरक्षण के लिए प्रशासन और वन विभाग ने कमर कस ली है। अब, इन स्थानों तक पहुंचने वाले पर्यटकों पर नजर रखी जाएगी। बुग्यालों में दोपहर दो बजे के बाद कोई पर्यटक नहीं जा सकेगा। योजना के अनुसार बुग्यालों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अब चार से छह पर्यटकों को एक टेंट मुहैया कराया जाएगा, जिसे निर्धारित समय पूरा होते ही जमा करना होगा। इसके अलावा मध्य हिमालय क्षेत्र के बुग्यालों में हुए अवैध निर्माण को भी हटाया जाएगा। बीते कुछ वर्षों से 31 दिसंबर और नववर्ष मनाने, बर्फबारी का आनंद लेने और अन्य मौकों पर चोपता से चंद्रशिला तक हजारों पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिससे बुग्यालों की हरियाली को नुकसान हो रहा है। बीते वर्ष 22 सितंबर को चोपता-तुंगनाथ-चंद्रशिला पैदल मार्ग पर चलाए गए विशेष सफाई अभियान में सात कुंतल से अधिक प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया गया था। अब प्रशासन और वन विभाग भी नियमों के तहत बुग्यालों के संरक्षण और पर्यटकों की मॉनीटरिंग की व्यवस्था को बेहतर करने में जुट गया है। इधर, जिलाधिकारी ने बताया कि बुग्यालों में मवेशियों के चुगान पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पर्यटकों के सामान की चेकिंग के लिए वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं।
.........
बनियाकुंड से चंद्रशिला तक का क्षेत्र सेंचुरी एरिया में होने के साथ पर्यावरणीय दृष्टि से अति संवेदनशील है। यहां मानवीय हस्तक्षेप को कम से कम करने के लिए नियमों के तहत योजना तैयार हो रही है। सभी पर्यटक व बुग्याली स्थानों पर वन कर्मियों, प्रशासन व पुलिस की मदद से मॉनीटरिंग की जाएगी।
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-- अमित कंवर, डीएफओ केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग, गोपेश्वर/चमोली।
प्रशासन और वन विभाग की योजना मध्य हिमालय में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप को सीमित करते हुए बुग्यालों को कूड़ा-कचरा से मुक्त कर पर्यावरण संरक्षित करना है। मिनी स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले चोपता, दुगलबिट्टा, बनियाकुंड, तुंगनाथ, चंद्रशिला, देवरियाताल सहित बुग्यालों के संरक्षण के लिए प्रशासन और वन विभाग ने कमर कस ली है। अब, इन स्थानों तक पहुंचने वाले पर्यटकों पर नजर रखी जाएगी। बुग्यालों में दोपहर दो बजे के बाद कोई पर्यटक नहीं जा सकेगा। योजना के अनुसार बुग्यालों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अब चार से छह पर्यटकों को एक टेंट मुहैया कराया जाएगा, जिसे निर्धारित समय पूरा होते ही जमा करना होगा। इसके अलावा मध्य हिमालय क्षेत्र के बुग्यालों में हुए अवैध निर्माण को भी हटाया जाएगा। बीते कुछ वर्षों से 31 दिसंबर और नववर्ष मनाने, बर्फबारी का आनंद लेने और अन्य मौकों पर चोपता से चंद्रशिला तक हजारों पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिससे बुग्यालों की हरियाली को नुकसान हो रहा है। बीते वर्ष 22 सितंबर को चोपता-तुंगनाथ-चंद्रशिला पैदल मार्ग पर चलाए गए विशेष सफाई अभियान में सात कुंतल से अधिक प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया गया था। अब प्रशासन और वन विभाग भी नियमों के तहत बुग्यालों के संरक्षण और पर्यटकों की मॉनीटरिंग की व्यवस्था को बेहतर करने में जुट गया है। इधर, जिलाधिकारी ने बताया कि बुग्यालों में मवेशियों के चुगान पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पर्यटकों के सामान की चेकिंग के लिए वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं।
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बनियाकुंड से चंद्रशिला तक का क्षेत्र सेंचुरी एरिया में होने के साथ पर्यावरणीय दृष्टि से अति संवेदनशील है। यहां मानवीय हस्तक्षेप को कम से कम करने के लिए नियमों के तहत योजना तैयार हो रही है। सभी पर्यटक व बुग्याली स्थानों पर वन कर्मियों, प्रशासन व पुलिस की मदद से मॉनीटरिंग की जाएगी।
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-- अमित कंवर, डीएफओ केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग, गोपेश्वर/चमोली।