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पौराणिक मठ-मंदिरों की दुर्दशा को प्रदेश सरकार जिम्मेदार: रावत

Wed, 20 Dec 2017 11:02 PM IST
Updated Wed, 20 Dec 2017 11:02 PM IST
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पौराणिक मठ-मंदिरों की दुर्दशा को प्रदेश सरकार जिम्मेदार: रावत

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जखोली। तीन दिवसीय कृषि एवं औद्योगिक विकास मेला के आखिरी दिन मुख्य अतिथि केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार पौराणिक मठ-मंदिरों की सुध नहीं ले रही है। पंचकेदार शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, द्वितीय केदार मद्महेश्वर व तृतीय केदार तुंगनाथ के मूल मंदिर जर्जर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार में समस्याओं के निस्तारण का जज्बा नहीं है। रावत ने कहा कि गुजरात में जीत भले ही भाजपा की हुई है पर हकीकत में पार्टी वहां हार गई है। उन्होंने मेला आयोजन के लिए विधायक निधि से 51 हजार रुपये देने की भी घोषणा की।
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विधायक रावत ने कहा कि भाजपा सरकार केदारघाटी व जनपद की उपेक्षा कर रही है। केदारनाथ पुनर्निर्माण के नाम पर ड्रामा किया जा रहा है। विकास योजनाओं को लेकर भी स्पष्ट नजरिया नहीं है। मेलाध्यक्ष/प्रमुख राजकुमारी रावत, कनिष्ठ प्रमुख चैन सिंह पंवार व अन्य आयोजकों ने विधायक का स्वागत किया। इस मौके पर स्थानीय कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहे। सूर्य प्रताप नेगी ने टिहरी त डूबीगी पर तीस नी मिटी कविता से टिहरी की स्थिति को उजागर किया। वहीं 12 वर्षीय दिव्यांशु बैरवाण ने कनुके ठेलण भारी गरी ह्वेगी जिदंगी व नगद नारायणम भज कलदारम, गीतों से खूब तालियां बटोरी। राजकीय प्राथमिक विद्यालय कपणियां की छात्राओं ने लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। वहीं उत्सव ग्रुप के संस्थापक डा. राकेश भट्ट के निर्देशन में चक्रव्यूह मंचन विशेष रहा। मेला समिति की ओर से सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर एसडीएम देवमूर्ति यादव, तहसीलदार शालिनी मौर्य, प्रधान संगठन के अध्यक्ष महावीर पंवार, बीडीओ आरएस राणा आदि मौजूद थे।
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84 वर्षीय फूलदेयी देवी पेंशन से वंचित
जखोली। क्वी सुणदू मेरी खौरी, क्वी गिणदू मेरा दुख.... लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीत की यह पंक्ति ललूड़ी गांव की 84 वर्षीय फूलदेयी देवी की स्थिति को बयां कर रही हैं। मेला परिसर में पहुंची वृद्धा प्रत्येक स्टाल पर जाकर अपनी पेंशन लगाने की गुहार करती रही। बावजूद इसके किसी ने भी उससे बात करना उचित नहीं समझा। वृद्ध दोपहर तक पांडाल में बैठी रही।

वृद्धा के पति गैंणा सिंह की मृत्य कुछ वर्ष पहले हो चुकी है। पांच वर्ष से वह जैसे-तैसे अपना गुजार कर रही है। पेंशन के लिए कई बार आवेदन किए, लेकिन पेंशन नहीं लगी। बेटियों की शादी हो चुकी हैं। जबकि दो बेटे हैं, जो अपना परिवार बमुश्किल से पाल रहे हैं। महिला बुधवार को मेले में पहुंची। यहां लगे स्टालों में वह अपनी पेंशन को लेकर जानकारी लेती रही। बावजूद इसके किसी भी अधिकारी/कर्मचारी या स्वयंसेवियों ने उसकी बात सुनने की इच्छा जाहिर नहीं की। थकी-हारी वृद्धा बाद में पांडाल के एक किनारे पर बैठ गई। इधर, जिला समाज कल्याण अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि वृद्धा के पेंशन मामले में एडीओ पंचायत जखोली से जानकारी ली जाएगी। ब्यूरो
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