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न्यूट्री गार्डन बनाकर महिलाएं सुधार रहीं सेहत
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तांशीपुर गांव में समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किया गया न्यूट्री गार्डन।
- फोटो : ROORKEE
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से संचालित योजना के तहत न्यूट्री गार्डन बनाकर समूह की महिलाएं अपनी और परिवार के सदस्यों की सेहत सुधार रही है। न्यूट्री गार्डन में महिलाएं फल-सब्जियों के अलावा औषधीय पौधे भी उगा रही है। सबसे बड़ा फायदा ये है कि महिलाएं इस न्यूट्री गार्डन बनाने के लिए जो मेहनत करती है उसकी मनरेगा के तहत उन्हें मजदूरी दी जाती है। साथ ही न्यूट्री गार्डन में लगाने के लिए पौधे, बीज और खाद सब उद्यान विभाग की ओर निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत न्यूट्री गार्डन योजना शुरू की गई है। इसके तहत महिलाओं को अपने खेत या आंगन में न्यूट्री गार्डन तैयार करना है। ये गार्डन इस तकनीक से बनाया जाता है कि इसमें एक साथ 10 अलग-अलग सब्जियों के अलावा फल और औषधीय पौधे लगाए जाते हैं। एनआरएलएम की ब्लॉक मिशन प्रबंधक रोमा सैनी ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को पौष्टिक भोजन और संतुलित आहार उपलब्ध कराना है। न्यूट्री गार्डन में महिलाओं को ऐसी सब्जियों को उगाने की ट्रेनिंग दी जाती है। जिससे वह अपने और परिवार की पौष्टिक संबंधित जरूरत पूरी कर सकें। लॉकडाउन में महिला समूह के लिए यह योजना वरदान साबित हुई। महिलाओं को अपने ही खेत में काम कर न्यूट्री गार्डन तैयार करने के बदले मनरेगा के तहत मजदूरी भी दी जाती है। इसके साथ ही न्यूट्री गार्डन में तैयार किए जाने वाले सभी फल और सब्जियों का बीज, दवा, खाद और पेड़ आदि उद्यान विभाग से निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। अभी तांशीपुर, दौलतपुर, पनियाला, इमलीखेड़ा, करौंदी व बहादरपुर सैनी में न्यूट्री गार्डन तैयार कर लिया गया है। अन्य छह जगह जल्द न्यूट्री गार्डन तैयार किया जाएगा।
ऐसे बनता है न्यूट्री गार्डन
गार्डन के लिए पहले एक जगह चयनित की जाती है। इसके बाद इसके चारों ओर गोलाकार लाइन बना ली जाती है। इस गोले के मध्य में गोलाई में ही करीब आधा फीट जगह छोड़ दी जाती है। इसके बाद पूरे गोले को सात अलग-अलग बड़ी क्यारियों में बांट दिया जाता है। बाद में इन सात बड़ी क्यारियों से 14 छोटी छोटी क्यारी बना ली जाती हैं। बाद में हर क्यारी में एक क्यारी में पत्तेदार सब्जी जैसे पालक, मेथी, सरसों आदि तो दूसरी में जड़ वाली सब्जियां जैसे मूली, आलू, अदरक, गाजर आदि उगा सकते हैं। ऐसे ही किसी में दाल तो किसी में औषधीय पौधे जैसे तुलसी, एरोविला आदि लगा दिए जाते हैं। ब्लॉक मिशन प्रबंधक रोमा सैनी ने बताया कि इस तरह गोलाई में सब्जियां लगाने से उत्पादन बढ़ता है। साथ ही एक जगह में कई सब्जियां उगाई जा सकती हैं।
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ग्राम समाज की भूमि पर भी बन सकता है गार्डन
यदि किसी महिला समूह के पास पर्याप्त जमीन नहीं है और वह समूह गार्डन तैयार करना चाहता है तो वह विभाग को सूचना दे सकता है। विभाग ऐसे समूह को गांव में ग्राम सभा या अन्य किसी सरकारी विभाग की जमीन को गार्डन बनाने के लिए उपलब्ध कराएगा। इसके लिए बाकायदा समूह को गार्डन बनाने के लिए लिखित अनुमति दी जाएगी। महिलाएं जब तक चाहे न्यूट्री गार्डन में सब्जियां और फल उगा सकती हैं।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत न्यूट्री गार्डन योजना शुरू की गई है। इसके तहत महिलाओं को अपने खेत या आंगन में न्यूट्री गार्डन तैयार करना है। ये गार्डन इस तकनीक से बनाया जाता है कि इसमें एक साथ 10 अलग-अलग सब्जियों के अलावा फल और औषधीय पौधे लगाए जाते हैं। एनआरएलएम की ब्लॉक मिशन प्रबंधक रोमा सैनी ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को पौष्टिक भोजन और संतुलित आहार उपलब्ध कराना है। न्यूट्री गार्डन में महिलाओं को ऐसी सब्जियों को उगाने की ट्रेनिंग दी जाती है। जिससे वह अपने और परिवार की पौष्टिक संबंधित जरूरत पूरी कर सकें। लॉकडाउन में महिला समूह के लिए यह योजना वरदान साबित हुई। महिलाओं को अपने ही खेत में काम कर न्यूट्री गार्डन तैयार करने के बदले मनरेगा के तहत मजदूरी भी दी जाती है। इसके साथ ही न्यूट्री गार्डन में तैयार किए जाने वाले सभी फल और सब्जियों का बीज, दवा, खाद और पेड़ आदि उद्यान विभाग से निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। अभी तांशीपुर, दौलतपुर, पनियाला, इमलीखेड़ा, करौंदी व बहादरपुर सैनी में न्यूट्री गार्डन तैयार कर लिया गया है। अन्य छह जगह जल्द न्यूट्री गार्डन तैयार किया जाएगा।
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ऐसे बनता है न्यूट्री गार्डन
गार्डन के लिए पहले एक जगह चयनित की जाती है। इसके बाद इसके चारों ओर गोलाकार लाइन बना ली जाती है। इस गोले के मध्य में गोलाई में ही करीब आधा फीट जगह छोड़ दी जाती है। इसके बाद पूरे गोले को सात अलग-अलग बड़ी क्यारियों में बांट दिया जाता है। बाद में इन सात बड़ी क्यारियों से 14 छोटी छोटी क्यारी बना ली जाती हैं। बाद में हर क्यारी में एक क्यारी में पत्तेदार सब्जी जैसे पालक, मेथी, सरसों आदि तो दूसरी में जड़ वाली सब्जियां जैसे मूली, आलू, अदरक, गाजर आदि उगा सकते हैं। ऐसे ही किसी में दाल तो किसी में औषधीय पौधे जैसे तुलसी, एरोविला आदि लगा दिए जाते हैं। ब्लॉक मिशन प्रबंधक रोमा सैनी ने बताया कि इस तरह गोलाई में सब्जियां लगाने से उत्पादन बढ़ता है। साथ ही एक जगह में कई सब्जियां उगाई जा सकती हैं।
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ग्राम समाज की भूमि पर भी बन सकता है गार्डन
यदि किसी महिला समूह के पास पर्याप्त जमीन नहीं है और वह समूह गार्डन तैयार करना चाहता है तो वह विभाग को सूचना दे सकता है। विभाग ऐसे समूह को गांव में ग्राम सभा या अन्य किसी सरकारी विभाग की जमीन को गार्डन बनाने के लिए उपलब्ध कराएगा। इसके लिए बाकायदा समूह को गार्डन बनाने के लिए लिखित अनुमति दी जाएगी। महिलाएं जब तक चाहे न्यूट्री गार्डन में सब्जियां और फल उगा सकती हैं।