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मेयर ने खुलवाए तो विधायक ने बंद कराए स्कूल
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मेयर ने 16 अगस्त को शहर के जिन स्कूलों को शिक्षा विभाग को पत्र जारी कर खुलवाया था, उन्हें नगर विधायक के पत्र के बाद बंद कर दिया गया है। इन स्कूलों को खोलने के लिए अब दोबारा से उप शिक्षा अधिकारी से प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव के बाद स्कूल शासन की अनुमति के बाद ही खोले जाएंगे। ऐसे में शिक्षकों में भी राजनेताओं के खिलाफ रोष है।
दरअसल, 22 अक्तूबर 2008 में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रकांता शर्मा ने प्राथमिक विद्यालय नंबर सात और 10 को प्राथमिक विद्यालय नंबर 18 में विलय करने के निर्देश दिए थे। अब 14 साल बाद 16 अगस्त को मेयर गौरव गोयल ने शहर के शिक्षक विहीन होने के चलते बंद हुए स्कूलों को दोबारा संचालित करने के लिए जिला शिक्षाधिकारी को एक लिखा था। इस पत्र के बाद शहर के दो अन्य स्कूलों के साथ ही रामनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर सात भी खोल दिया गया था। इस स्कूल के खुलते ही शिक्षकों में आपसी खींचतान शुरू हो गई। इसमें कुछ शिक्षकों का तर्क था कि स्कूल खुलेंगे तो आसपास के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर नहीं भटकना पड़ेगा, जबकि कुछ शिक्षकों का तर्क था कि स्कूल 12 साल बाद खुल रहा है। इसे खोलने से पहले इसकी मरम्मत करानी जरूरी है। वहीं स्कूल शासन के आदेश के अनुसार ही खुलने चाहिए। अब जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. विद्याशंकर चतुर्वेदी ने स्कूलों के संचालन पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि कुछ स्कूल शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने या छात्र संख्या कम होने के कारण शासन स्तर से दूसरे स्कूलों में विलीन कर दिए थे या बंद कर दिए गए थे। ऐसे स्कूलों को खोलने के लिए उप शिक्षा अधिकारी से प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव के बाद इन स्कूलों को उच्चाधिकारियों के निर्देश पर खोला जाएगा।
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दरअसल, 22 अक्तूबर 2008 में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रकांता शर्मा ने प्राथमिक विद्यालय नंबर सात और 10 को प्राथमिक विद्यालय नंबर 18 में विलय करने के निर्देश दिए थे। अब 14 साल बाद 16 अगस्त को मेयर गौरव गोयल ने शहर के शिक्षक विहीन होने के चलते बंद हुए स्कूलों को दोबारा संचालित करने के लिए जिला शिक्षाधिकारी को एक लिखा था। इस पत्र के बाद शहर के दो अन्य स्कूलों के साथ ही रामनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर सात भी खोल दिया गया था। इस स्कूल के खुलते ही शिक्षकों में आपसी खींचतान शुरू हो गई। इसमें कुछ शिक्षकों का तर्क था कि स्कूल खुलेंगे तो आसपास के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर नहीं भटकना पड़ेगा, जबकि कुछ शिक्षकों का तर्क था कि स्कूल 12 साल बाद खुल रहा है। इसे खोलने से पहले इसकी मरम्मत करानी जरूरी है। वहीं स्कूल शासन के आदेश के अनुसार ही खुलने चाहिए। अब जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. विद्याशंकर चतुर्वेदी ने स्कूलों के संचालन पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि कुछ स्कूल शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने या छात्र संख्या कम होने के कारण शासन स्तर से दूसरे स्कूलों में विलीन कर दिए थे या बंद कर दिए गए थे। ऐसे स्कूलों को खोलने के लिए उप शिक्षा अधिकारी से प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव के बाद इन स्कूलों को उच्चाधिकारियों के निर्देश पर खोला जाएगा।
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