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मतदाताओं ने सिले होठ, आज करेंगे वोट की चोट
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प्रचार का शोरगुल थमने के बाद मानो मतदाताओं ने अपने होंठ भी सिल लिए हैं। शहर से देहात तक मतदाता अपने मन का भेद देने से पूरी तरह बचते रहे लेकिन मतदाताओं की यह खामोशी आज वोट की चोट के रूप में लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ खड़ा करेगी। माना जा रहा है कि मतदाता जितना मौन और खामोश है इसके उलट मतदान करने को लेकर उतनी ही ज्यादा उत्सुकता है। ऐसे में प्रत्याशी से लेकर समर्थकों में मतदाताओं के दिलों में क्या चल रहा है। यह जानने के लिए बेचैनी और बेकरारी है।
आखिरकार वह घड़ी आ ही गई। जब नई सरकार के गठन के लिए लाखों मतदाता प्रत्याशियों के साथ ही सरकार के भाग्य का फैसला करने वाले हैं। नौ जनवरी को आचार संहिता लगी थी। इसी दौरान पार्टियों के टिकट को लेकर मतदाताओं में बेचैनी थी। कई सीटों पर नामांकन से दो दिन पहले तक तस्वीर साफ हो पाई थी। झबरेड़ा और पिरान कलियर विधानसभा सीट पर नामांकन के ऐन मौके पर टिकट की घोषणा हुई। इसके बाद प्रत्याशियों के रूठने और उन्हें मनाने का दौर शुरू हुआ। एक जनवरी से चुनावी माहौल तैयार हुआ और फिर जोर पकड़ता गया। चुनाव प्रचार के दौरान मतदाता प्रत्याशियों के जनसंपर्क, रोड शो, रैली और जनसभाओं का आकलन करते दिखे। विगत शनिवार को चुनाव का शोर खत्म हुआ तो अचानक मतदाताओं ने और भी गहरी चुप्पी साध ली है। मतदाताओं के दिल की बात निकालने की सभी कोशिशें बेकार होती दिखीं लेकिन सोमवार को मतदान स्थल पर जाकर वोट डालने की उत्सुकता सभी में थी। मतदाताओं की इस चुप्पी से प्रत्याशी और उनके समर्थकों में बेचैनी और बेकरारी दिखी। यह स्थिति शहर में ही नहीं गांव देहात में दिखी। हालांकि शहर के मुकाबले गांवों में लोग ज्यादा सक्रिय रहे। रात भर चौराहों और चौपालों पर प्रत्याशियों की हवा का जिक्र होता रहा। आज मतदाताओं को प्रत्याशियों के पक्ष में निर्णय लेना है। बहुमत किसके पक्ष में आएगा, इसका खुलासा 10 मार्च को खुलने वाले पिटारे से होगा।
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आखिरकार वह घड़ी आ ही गई। जब नई सरकार के गठन के लिए लाखों मतदाता प्रत्याशियों के साथ ही सरकार के भाग्य का फैसला करने वाले हैं। नौ जनवरी को आचार संहिता लगी थी। इसी दौरान पार्टियों के टिकट को लेकर मतदाताओं में बेचैनी थी। कई सीटों पर नामांकन से दो दिन पहले तक तस्वीर साफ हो पाई थी। झबरेड़ा और पिरान कलियर विधानसभा सीट पर नामांकन के ऐन मौके पर टिकट की घोषणा हुई। इसके बाद प्रत्याशियों के रूठने और उन्हें मनाने का दौर शुरू हुआ। एक जनवरी से चुनावी माहौल तैयार हुआ और फिर जोर पकड़ता गया। चुनाव प्रचार के दौरान मतदाता प्रत्याशियों के जनसंपर्क, रोड शो, रैली और जनसभाओं का आकलन करते दिखे। विगत शनिवार को चुनाव का शोर खत्म हुआ तो अचानक मतदाताओं ने और भी गहरी चुप्पी साध ली है। मतदाताओं के दिल की बात निकालने की सभी कोशिशें बेकार होती दिखीं लेकिन सोमवार को मतदान स्थल पर जाकर वोट डालने की उत्सुकता सभी में थी। मतदाताओं की इस चुप्पी से प्रत्याशी और उनके समर्थकों में बेचैनी और बेकरारी दिखी। यह स्थिति शहर में ही नहीं गांव देहात में दिखी। हालांकि शहर के मुकाबले गांवों में लोग ज्यादा सक्रिय रहे। रात भर चौराहों और चौपालों पर प्रत्याशियों की हवा का जिक्र होता रहा। आज मतदाताओं को प्रत्याशियों के पक्ष में निर्णय लेना है। बहुमत किसके पक्ष में आएगा, इसका खुलासा 10 मार्च को खुलने वाले पिटारे से होगा।
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