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एचआरडीए की कॉलोनी का सीवर कर रहा गंगा को मैला
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हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) ने पहले तो नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए 34.6 एकड़ में इंद्रलोक कॉलोनी बसा दी और अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के नोटिस का जवाब भी नहीं दे रहा है। जवाब देने की डेडलाइन खत्म होने के बाद बोर्ड अब एचआरडीए के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है। बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक की मानें तो सीवर का गंदा पानी सीधे गंगा में छोड़ने के लिए एचआरडीए पर पांच हजार रुपये रोजाना पेनल्टी लगाई जा सकती है।
जिस एचआरडीए के ऊपर निर्माण कार्य को मानकों के अनुरूप कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, उसी ने हरिद्वार में इंद्रलोक कॉलोनी बनाते समय लापरवाही बरती। यहां सीवर लाइन बिछाने के बाद ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया गया। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि नियमों का पालन नहीं करने पर आम लोगों पर कार्रवाई करने वाला एचआरडीए खुद नियमों की धज्जियां क्यों उड़ा रहा है। हालांकि एचआरडीए के अधिकारी अभी कॉलोनी को पूरी तरह तैयार न होने की बात कह रहे हैं, लेकिन तब भी वर्तमान में यहां करीब 300 परिवार रह रहे हैं और इन घरों का सीवर निकलकर रावली महदूद के नाले में गिर रहा है, जो आगे जाकर गंगा को मैली कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रुड़की की टीम ने करीब डेढ़ महीने पूर्व कॉलोनी का निरीक्षण किया था और लोगों की गंगा को प्रदूषित करने की शिकायतों को सही पाया था। इसके बाद एचआरडीए को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन अभी तक बोर्ड को कोई जवाब नहीं मिला है।
प्रदूषण बोर्ड से अनुमति तक नहीं ली गई
हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में इंद्रलोक रेजीडेंशियल प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। इसमें करीब 700 परिवारों के रहने के लिए आवास बनाए गए। अब यह कॉलोनी बनकर तैयार है और इसमें सैकड़ों परिवार रह रहे हैं। 34.4 एकड़ में फैली इस कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति तक नहीं ली गई। शिकायतों के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक मार्च 2019 को कॉलोनी का निरीक्षण किया था। इस दौरान कुछ जगहों पर सीवर लाइनें क्षतिग्रस्त पाई गईं और ट्रीटमेंट का निर्माण भी नहीं हुआ था।
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629 विला, 96 फ्लैट, फिर भी लापरवाही
एचआरडीए के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत इंद्रलोक कॉलोनी में 629 विला और 96 फ्लैट बनाए गए हैं, लेकिन इतने बड़े निर्माण के बाद भी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण समय रहते नहीं करना बड़ी लापरवाही को उजागर कर रहा है।
डेढ़ महीने पहले एचआरडीए को नोटिस भेजकर एक महीने में जवाब मांगा गया था, लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया। बोर्ड मुख्यालय को रिपोर्ट भेजकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाने पर पांच हजार रुपये रोजाना पेनल्टी लगाई जा सकती है।
-एसपी सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रुड़की
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए नमामि गंगा के तहत इंडो जर्मन प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना है। इसके लिए डीपीआर भी तैयार कर ली गई है। इसके अलावा तिवारी नगर में भी यह प्रोजेक्ट शुरू होगा। डीपीआर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। जल्द प्लांट लगाया जाएगा।
-केके मिश्र, सचिव एचआरडीए
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जिस एचआरडीए के ऊपर निर्माण कार्य को मानकों के अनुरूप कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, उसी ने हरिद्वार में इंद्रलोक कॉलोनी बनाते समय लापरवाही बरती। यहां सीवर लाइन बिछाने के बाद ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया गया। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि नियमों का पालन नहीं करने पर आम लोगों पर कार्रवाई करने वाला एचआरडीए खुद नियमों की धज्जियां क्यों उड़ा रहा है। हालांकि एचआरडीए के अधिकारी अभी कॉलोनी को पूरी तरह तैयार न होने की बात कह रहे हैं, लेकिन तब भी वर्तमान में यहां करीब 300 परिवार रह रहे हैं और इन घरों का सीवर निकलकर रावली महदूद के नाले में गिर रहा है, जो आगे जाकर गंगा को मैली कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रुड़की की टीम ने करीब डेढ़ महीने पूर्व कॉलोनी का निरीक्षण किया था और लोगों की गंगा को प्रदूषित करने की शिकायतों को सही पाया था। इसके बाद एचआरडीए को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन अभी तक बोर्ड को कोई जवाब नहीं मिला है।
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प्रदूषण बोर्ड से अनुमति तक नहीं ली गई
हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में इंद्रलोक रेजीडेंशियल प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। इसमें करीब 700 परिवारों के रहने के लिए आवास बनाए गए। अब यह कॉलोनी बनकर तैयार है और इसमें सैकड़ों परिवार रह रहे हैं। 34.4 एकड़ में फैली इस कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति तक नहीं ली गई। शिकायतों के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक मार्च 2019 को कॉलोनी का निरीक्षण किया था। इस दौरान कुछ जगहों पर सीवर लाइनें क्षतिग्रस्त पाई गईं और ट्रीटमेंट का निर्माण भी नहीं हुआ था।
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629 विला, 96 फ्लैट, फिर भी लापरवाही
एचआरडीए के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत इंद्रलोक कॉलोनी में 629 विला और 96 फ्लैट बनाए गए हैं, लेकिन इतने बड़े निर्माण के बाद भी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण समय रहते नहीं करना बड़ी लापरवाही को उजागर कर रहा है।
डेढ़ महीने पहले एचआरडीए को नोटिस भेजकर एक महीने में जवाब मांगा गया था, लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया। बोर्ड मुख्यालय को रिपोर्ट भेजकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाने पर पांच हजार रुपये रोजाना पेनल्टी लगाई जा सकती है।
-एसपी सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रुड़की
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए नमामि गंगा के तहत इंडो जर्मन प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना है। इसके लिए डीपीआर भी तैयार कर ली गई है। इसके अलावा तिवारी नगर में भी यह प्रोजेक्ट शुरू होगा। डीपीआर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। जल्द प्लांट लगाया जाएगा।
-केके मिश्र, सचिव एचआरडीए