फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Roorkee News ›   The cry of unclaimed souls longing for tarpan

तर्पण के लिए तरसती लावारिस रूहों की चीत्कार

Wed, 21 Jul 2021 11:28 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jul 2021 11:28 PM IST
विज्ञापन
The cry of unclaimed souls longing for tarpan
कुछ लोगों की मौतें आज भी कई सवाल खड़े करती हैं। उनकी पहचान, जाति और रिश्तेदारी जैसे कई सवाल हैं, जो अब एक पहेली बनकर रह गए हैं। जिंदा रहते भले ही उन्हें पहचान मिली हो, मगर मौत के बाद कोई नहीं पहचान सका। रुड़की क्षेत्र में ऐसे एक-दो नहीं बल्कि करीब 300 से अधिक मामले हैं। ऐसे में तर्पण के लिए तरसती रूहों की चीत्कार मानों सन्नाटा तोड़ रही हैं।
विज्ञापन

रुड़की, मंगलौर और पिरान कलियर में पिछले पांच वर्षों में करीब 313 लावारिस शव गंगनहर से पुलिस ने बरामद किए हैं, लेकिन आज तक उनकी न तो शिनाख्त हुई, न ही पता चला कि वह कैसे मरे, किसने मारा, क्यों मारा और वे कहां के रहने वाले हैं। लावारिस शवों की पहचान के लिए पुलिस की कोशिशें भी खूब र्हुइं, लेकिन आज तक पुलिस को इनके परिवार का पता नहीं चल पाया। अंत में पुलिस थक-हारकर शवों को अज्ञात मानते हुए अंतिम संस्कार करवा देती है। इन शवों के अंतिम संस्कार कर पुलिस जांच के लिए विसरा और अन्य वस्तुएं तो रखती है, लेकिन उनके आधार पर शिनाख्त नहीं हो पाई है।
विज्ञापन

--
शवों का डंपिंग ग्राउंड बन रही गंगनहर
रुड़की की सीमाएं पश्चिमी उत्तर प्रदेश से सटी हैं। लावारिस शव मिलने के बाद माना जाता है कि पश्चिमी यूपी में अपराधियों ने हत्या की होगी और शव की पहचान छिपाने के लिए उसे रुड़की, मंगलौर और पिरान कलियर लाकर गंगनहर में फेंक दिया होगा। पुलिस को गंगनहर में कई शव ऐसे भी मिले हैं, जो इस तरफ इशारा करते हैं कि हत्या की गई है। आलम यह है कि रुड़की क्षेत्र में आए दिन मिलने वाले लावारिस शवों का गंगनहर डंपिंग ग्राउंड बन गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
परिजनों को नहीं मिल पाता पूरा न्याय
रुड़की क्षेत्र में मिलने वाले कुछ लावारिस शवों में अमूमन पुलिस जांच में पता चलता है कि वारदात को कहीं दूसरी जगह अंजाम दिया है। लाश को कहीं दूसरी जगह फेंका गया है। इतना ही नहीं शिनाख्त कहीं दूसरी जगह, गुमशुदगी की रिपोर्ट कहीं और दर्ज की गई है। ऐसे में केस कमजोर हो जाता है और मृतक के परिजनों को पूरा न्याय नहीं मिल पाता है।

--
पिछले पांच साल में मिले लावारिस शव
सिविल लाइंस कोतवाली रुड़की : 46
गंगनहर कोतवाली रुड़की : 48
मंगलौर कोतवाली : 141
पिरान कलियर थाना : 78
--
गंगनहर से मिलने वाले सभी शवों की पुलिस पहचान कराने की कोशिश करती है। पहचान न होने की स्थिति में लावारिस मानकर अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। अंतिम संस्कार करने के बाद भी पुलिस पहचान के लिए शवों का विसरा और अन्य वस्तुएं सुरक्षित रखती है।
-प्रमेंद्र डोबाल, एसपी देहात
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed