फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Roorkee News ›   Soil investigation, the distributed cards

मिट्टी की जांच की नहीं, बांट दिए कार्ड

Mon, 27 Feb 2017 10:39 PM IST
बसंत कुमार रुड़की
बसंत कुमार रुड़की Updated Mon, 27 Feb 2017 10:39 PM IST
विज्ञापन
फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से चलाई गई मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को मृदा विभाग ही पलीता लगा रहा है। विभाग 80 हजार मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने का दावा कर रहा है, लेकिन उनकी हकीकत यह है कि बिना खेतों में जाए ही विभाग ने किसानों को कार्ड जारी कर दिए हैं। घर पहुंचे कार्डों को देखकर किसान हैरान हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि यह कार्ड कैसे बनाकर भेज दिए।
विज्ञापन


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटते उत्पादन एवं बंजर हो रही जमीन को संतुलित करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना चलाई है। इसके तहत प्रत्येक किसान के खेत की मिट्टी की नि:शुल्क जांच कर उसेे मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड दिया जाना है। उससे किसान आवश्यकतानुसार खाद, डीएपी आदि सूक्ष्म पोषक तत्व डालकर जमीनों को संतुलित कर सकते हैं। हर किसान के खेत की मिट्टी की जांच करने के लिए मृदा परीक्षण लैब को जिम्मा सौंपा गया, लेकिन मृदा परीक्षण कराने में विभाग फेल हो गया। विभाग ने किसी गांव के एक-आध किसान के खेत जाकर मिट्टी के नमूने लेकर अन्य किसानों को भी यूं ही कार्ड जारी कर दिए। अमर उजाला टीम ने क्षेत्र में जाकर इसकी सच्चाई जानने की कोशिश की तो किसानों ने बताया न उनके खेतों की जांच करने कोई आया। यही वजह है कि अधिकतर किसानों की मिट्टी की जांच के नमूने एक जैसे हैं। अधिकतर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का पता भी अब लग रहा है, जब घरों में कार्ड पहुंच रहे हैं।       
विज्ञापन


दो साल के लिए बनता है कार्ड     
अधिकारियों की मानें तो मृदा स्वास्थ्य कार्ड दो साल के लिए बनता है। इसके माध्यम से किसान अपने खेतों की मिट्टी की कभी नि:शुल्क जांच करा सकते हैं, लेकिन दो साल बाद कार्ड को नवीनीकरण करना पड़ेगा। इससे दो साल पहले बने कार्ड का समय मार्च के बाद खत्म हो जाएगा। इससे किसानों को अपने कार्डों का नवीनीकरण करना पड़ेगा।       
विज्ञापन
विज्ञापन


न्याय पंचायत प्रभारियों पर था जिम्मा       
मृदा परीक्षण के अधिकारियों ने बताया कि मृदा परीक्षण का जिम्मा न्याय पंचायत प्रभारियों पर था। न्याय पंचायत प्रभारियों को ही किसानों के खेतों में जाकर मिट्टी के नमूने जांच को भेजने थे, लेकिन न्याय पंचायत प्रभारियों ने अधिकारियों के निर्देशों को हवा में उड़ाते हुए गिने-चुने किसानों के नमूने लेकर इतिश्री कर दी।       


मिट्टी की जांच करने के लिए न्याय पंचायत प्रभारी के साथ ही लेबर भी लगाई थी, पटवारियों एवं नेट के माध्यम से मानचित्रों के माध्यम से भी सैंपल लिए गए थे, लेकिन किसानों ने मिट्टी की जांच के लिए पूरा सहयोग नहीं दिया। किसान जांच को तैयार ही नहीं हुए। फिर भी मिट्टी की जांच करने के बाद ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए। 95 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष करीब 80 हजार किसानों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी कर दिए गए हैं।     
अवतारी सती, प्रभारी, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, बहादराबाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed