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Roorkee News: साहब, 100 रुपये रोज में कैसे चलाएं घर, भोजन माताओं का छलका दर्द
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साहब, 100 रुपये रोजाना में कैसे घर का चूल्हा जल सकेगा। महंगाई इतनी है कि बच्चों को पढ़ाएं या रोटी खाएं, समझ में नहीं आ रहा। मेहनत ज्यादा होने के बाद मेहनताना बेहद कम दिया जा रहा जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। यह पीड़ा भगवानपुर ब्लॉक के खेलपुर राजकीय प्राथमिक विद्यालय में भोजनमाताओं ने बयां की। उन्होंने सरकार से मानदेय बढ़ाने की मांग की।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेलपुर में भोजनमाताओं ने अपना दर्द बयां कर बताया कि रोजाना स्कूल में सुबह 7:30 बजे से पहुंचकर करीब 150 बच्चों के लिए भोजन तैयार करना पड़ता है। रसोई की साफ-सफाई से लेकर भोजन देने तक की पूरी जिम्मेदारी उनके ऊपर है। बताया कि चावल से एक-एक कण को साफ किया जाता है ताकि भोजन की गुणवत्ता बनी रहे।
वहीं स्कूल खोलने से लेकर बंद करने की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। इतनी जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय दिया जा रहा है। एक भोजन माता ने कहा कि सुबह से दोपहर तक स्कूल में काम करने के बाद घर पहुंचकर भी घरेलू जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इसके बावजूद महीने के अंत तक कम वेतन में घर चलाना भारी पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार अन्य कर्मचारियों का वेतन बढ़ाती है लेकिन भोजन माताओं की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेलपुर में भोजनमाताओं ने अपना दर्द बयां कर बताया कि रोजाना स्कूल में सुबह 7:30 बजे से पहुंचकर करीब 150 बच्चों के लिए भोजन तैयार करना पड़ता है। रसोई की साफ-सफाई से लेकर भोजन देने तक की पूरी जिम्मेदारी उनके ऊपर है। बताया कि चावल से एक-एक कण को साफ किया जाता है ताकि भोजन की गुणवत्ता बनी रहे।
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वहीं स्कूल खोलने से लेकर बंद करने की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। इतनी जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय दिया जा रहा है। एक भोजन माता ने कहा कि सुबह से दोपहर तक स्कूल में काम करने के बाद घर पहुंचकर भी घरेलू जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इसके बावजूद महीने के अंत तक कम वेतन में घर चलाना भारी पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार अन्य कर्मचारियों का वेतन बढ़ाती है लेकिन भोजन माताओं की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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