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कर्मचारियों की हड़ताल से मरीज रहे हलकान
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रुड़की सिविल अस्पताल में अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे एनएचएम के कर्मचारी।
- फोटो : ROORKEE
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सिविल अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा एवं आउटसोर्स संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते मरीजों को परेशानियां उठानी पड़ीं। तीसरे दिन भी मरीज लैब में खून के सैंपल देने के लिए भटकते रहे तो बच्चोें के इलाज के लिए पहुंचे अभिभावकों को भी निराश लौटना पड़ा।
बृहस्पतिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत एनएचएम के संविदा और आउटसोर्स संविदा कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। इससे पहले दो दिन तक कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार के दौरान आपात सेवाएं प्रभावित नहीं की थीं। बता दें कि सिविल अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए बनाई गई डीईआईसी यूनिट में पूरा स्टाफ एनएचएम कर्मचारियों का ही है। इसके अलावा पैथॉलोजी लैब, ब्लड बैंक, बच्चा वार्ड, किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, नवजात शिशुओं के लिए बनाई गई एनबीएसयू, डिजिटल एक्सरे आदि में एनएचएम और आउटसोर्स कर्मचारियों की ही तैनाती है। इनके अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल में सुबह मरीजों को परेशानी हुई। डीईआईसी यूनिट पूरी तरह से बंद रही।
वहीं, ओपीडी निर्धारित समय पर खुली जरूर, लेकिन ब्लड सैंपल देने और डिजिटल एक्सरे करवाने के लिए मरीजों को भटकना पड़ा। नर्सों के हड़ताल में शामिल होने से लेबर रूम में भी मरीजों को भटकना पड़ा। हालांकि, खून का सैंपल लेने के लिए बाद में दूसरे कमरे में व्यवस्था शुरू की गई। इस दौरान स्टाफ कम होने के चलते मरीजों की लंबी लाइन लग गई। दोपहर तक कई मरीजों को समय पर सुविधा नहीं मिलने से निराश लौटना पड़ा। सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि कर्मचारियों की हड़ताल का मरीजों इलाज पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। सभी मरीजों के काम होते रहे, हालांकि मरीजों को लाइनों में जरूर लगना पड़ा।
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अब आरपार की लड़ाई का निर्णय
सिविल अस्पताल में बृहस्पतिवार से एनएचएम कर्मचारियों ने तीन दिन तक सामान्य कार्य बहिष्कार के बाद अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। इस दौरान रुड़की के अलावा इमलीखेड़ा, नारसन, भगवानपुर से भी एनएचएम कर्मचारियों ने सिविल अस्पताल पहुंचकर हड़ताल में भागीदारी की। इस दौरान कर्मचारियों ने इमरजेंसी सेवाएं भी नहीं दीं। कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब उन्होंने आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है।
एनएचएम कर्मचारियों ने कहा कि दो सूत्री मांगों को लेकर वे लगातार आंदोलनरत हैं, लेकिन हर बार आश्वासन देकर शांत करा दिया जाता है। इस बार वे मांग पूरी होने पर ही आंदोलन खत्म करेंगे। कहा कि कर्मचारी लंबे समय से हरियाणा की तरह वेतन दिए जाने आदि की मांग कर रहे हैं। अब उन्हें सेवाओं से मुक्त करने की धमकी दी जा रही है, लेकिन कर्मचारी डरने वाला नहीं है। संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष रोशनी नौटियाल ने बताया कि कर्मचारियों को बहुत कम वेतन देकर ज्यादा काम लिया जा रहा है।
कर्मचारियों ने पूरे कोरोनाकाल में अपनी जान की परवाह किए बिना सभी कामों को अंजाम दिया। आगे भी कर्मचारी हर परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन विभाग उनकी दो सूत्री मांग पूरी नहीं करना चाहता। ऐसे में उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। इस मौके पर नारसन ब्लॉक अध्यक्ष डॉ. विकास, सुमित चौधरी, अनुज भारद्वाज, धर्मन शर्मा, नवनीत सैनी, रामकेश गुप्ता, आशीष गुप्ता, अंकुर सैनी, कुलवीर सिंह, मुन्नी राणा, देवेश्वरी, प्रदीप सिंह नेगी, नीतू बिष्ट, रेनू सैनी, प्रीति डंगवाल मौजूद रहे।
आउटसोर्स कर्मचारी काम पर लौटे
बृहस्पतिवार को सिविल अस्पताल में एनएचएम संविदा कर्मचारी अपने साथ आउटसोर्स कर्मचारियों को भी लेकर धरने पर बैठे थे। इस बीच किसी ने आउटसोर्स कर्मचारियों को जानकारी दी कि यदि वे हड़ताल में शामिल हुए तो उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। इसके बाद कुछ कर्मचारी अस्पताल में लौट आए और काम शुरू कर दिया जबकि कुछ हड़ताल पर ही रहे। काम पर लौटने वाले कुछ कर्मचारियों ने तो लिखित में भी दे दिया कि वे हड़ताल में शामिल नहीं हैं। इस बीच एनएचएम संविदा कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि आउटसोर्स कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हैं तो उन्हें वे अपने संगठन से अलग कर देंगे। मांग पूरी होने पर केवल हड़ताल करने वाले कर्मचारियों को ही लाभ लेने का अधिकार होगा। इसके बाद हड़ताल पर बैठे आउटसोर्स कर्मचारियों के कहने पर काम कर रहे कर्मचारी भी दोबारा हड़ताल में शामिल हुए। संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष रोशनी नौटियाल ने बताया कि कुछ कर्मचारी पहले काम पर लौट गए थे। बाद में दोबारा हड़ताल में शामिल हुए।
बैंककर्मियों ने काली पट्टी बांधकर किया काम
विभिन्न बैंकों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने केंद्र सरकार पर निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए काली पट्टी बांधकर कामकाज किया। साथ ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
पंजाब नेशनल बैंक, कैनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैक के कर्मचारियों ने शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की नीतियां पूरी तरह से मजदूर विरोधी हैं। सरकार लगातार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। इसकी वजह से कर्मचारियों में आक्रोश है। सरकार की नीति से देश में बेरोजगारी बढ़ रही है। उत्तरांचल बैंक एंप्लाइज यूनियन के संयुक्त सचिव मन्नू माकिन ने कहा कि जब तक सरकार बैंक यूनियनों की मांगों को नहीं मान लेती, आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। इस दौरान 16 और 17 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल के संबंध में चर्चा की गई। इस अवसर पर निधि अग्रवाल, अर्जुन गुप्ता, शोभना दुआ, प्रेम सिंह, नवीन, उदित, विपिन, संजय, प्रमोद, गुंजन मिश्रा, आशीष, अपूर्व, उर्वशी मौजूद रहे। संवाद
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बृहस्पतिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत एनएचएम के संविदा और आउटसोर्स संविदा कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। इससे पहले दो दिन तक कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार के दौरान आपात सेवाएं प्रभावित नहीं की थीं। बता दें कि सिविल अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए बनाई गई डीईआईसी यूनिट में पूरा स्टाफ एनएचएम कर्मचारियों का ही है। इसके अलावा पैथॉलोजी लैब, ब्लड बैंक, बच्चा वार्ड, किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, नवजात शिशुओं के लिए बनाई गई एनबीएसयू, डिजिटल एक्सरे आदि में एनएचएम और आउटसोर्स कर्मचारियों की ही तैनाती है। इनके अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल में सुबह मरीजों को परेशानी हुई। डीईआईसी यूनिट पूरी तरह से बंद रही।
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वहीं, ओपीडी निर्धारित समय पर खुली जरूर, लेकिन ब्लड सैंपल देने और डिजिटल एक्सरे करवाने के लिए मरीजों को भटकना पड़ा। नर्सों के हड़ताल में शामिल होने से लेबर रूम में भी मरीजों को भटकना पड़ा। हालांकि, खून का सैंपल लेने के लिए बाद में दूसरे कमरे में व्यवस्था शुरू की गई। इस दौरान स्टाफ कम होने के चलते मरीजों की लंबी लाइन लग गई। दोपहर तक कई मरीजों को समय पर सुविधा नहीं मिलने से निराश लौटना पड़ा। सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि कर्मचारियों की हड़ताल का मरीजों इलाज पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। सभी मरीजों के काम होते रहे, हालांकि मरीजों को लाइनों में जरूर लगना पड़ा।
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अब आरपार की लड़ाई का निर्णय
सिविल अस्पताल में बृहस्पतिवार से एनएचएम कर्मचारियों ने तीन दिन तक सामान्य कार्य बहिष्कार के बाद अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। इस दौरान रुड़की के अलावा इमलीखेड़ा, नारसन, भगवानपुर से भी एनएचएम कर्मचारियों ने सिविल अस्पताल पहुंचकर हड़ताल में भागीदारी की। इस दौरान कर्मचारियों ने इमरजेंसी सेवाएं भी नहीं दीं। कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब उन्होंने आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है।
एनएचएम कर्मचारियों ने कहा कि दो सूत्री मांगों को लेकर वे लगातार आंदोलनरत हैं, लेकिन हर बार आश्वासन देकर शांत करा दिया जाता है। इस बार वे मांग पूरी होने पर ही आंदोलन खत्म करेंगे। कहा कि कर्मचारी लंबे समय से हरियाणा की तरह वेतन दिए जाने आदि की मांग कर रहे हैं। अब उन्हें सेवाओं से मुक्त करने की धमकी दी जा रही है, लेकिन कर्मचारी डरने वाला नहीं है। संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष रोशनी नौटियाल ने बताया कि कर्मचारियों को बहुत कम वेतन देकर ज्यादा काम लिया जा रहा है।
कर्मचारियों ने पूरे कोरोनाकाल में अपनी जान की परवाह किए बिना सभी कामों को अंजाम दिया। आगे भी कर्मचारी हर परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन विभाग उनकी दो सूत्री मांग पूरी नहीं करना चाहता। ऐसे में उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। इस मौके पर नारसन ब्लॉक अध्यक्ष डॉ. विकास, सुमित चौधरी, अनुज भारद्वाज, धर्मन शर्मा, नवनीत सैनी, रामकेश गुप्ता, आशीष गुप्ता, अंकुर सैनी, कुलवीर सिंह, मुन्नी राणा, देवेश्वरी, प्रदीप सिंह नेगी, नीतू बिष्ट, रेनू सैनी, प्रीति डंगवाल मौजूद रहे।
आउटसोर्स कर्मचारी काम पर लौटे
बृहस्पतिवार को सिविल अस्पताल में एनएचएम संविदा कर्मचारी अपने साथ आउटसोर्स कर्मचारियों को भी लेकर धरने पर बैठे थे। इस बीच किसी ने आउटसोर्स कर्मचारियों को जानकारी दी कि यदि वे हड़ताल में शामिल हुए तो उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। इसके बाद कुछ कर्मचारी अस्पताल में लौट आए और काम शुरू कर दिया जबकि कुछ हड़ताल पर ही रहे। काम पर लौटने वाले कुछ कर्मचारियों ने तो लिखित में भी दे दिया कि वे हड़ताल में शामिल नहीं हैं। इस बीच एनएचएम संविदा कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि आउटसोर्स कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हैं तो उन्हें वे अपने संगठन से अलग कर देंगे। मांग पूरी होने पर केवल हड़ताल करने वाले कर्मचारियों को ही लाभ लेने का अधिकार होगा। इसके बाद हड़ताल पर बैठे आउटसोर्स कर्मचारियों के कहने पर काम कर रहे कर्मचारी भी दोबारा हड़ताल में शामिल हुए। संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष रोशनी नौटियाल ने बताया कि कुछ कर्मचारी पहले काम पर लौट गए थे। बाद में दोबारा हड़ताल में शामिल हुए।
बैंककर्मियों ने काली पट्टी बांधकर किया काम
विभिन्न बैंकों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने केंद्र सरकार पर निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए काली पट्टी बांधकर कामकाज किया। साथ ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
पंजाब नेशनल बैंक, कैनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैक के कर्मचारियों ने शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की नीतियां पूरी तरह से मजदूर विरोधी हैं। सरकार लगातार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। इसकी वजह से कर्मचारियों में आक्रोश है। सरकार की नीति से देश में बेरोजगारी बढ़ रही है। उत्तरांचल बैंक एंप्लाइज यूनियन के संयुक्त सचिव मन्नू माकिन ने कहा कि जब तक सरकार बैंक यूनियनों की मांगों को नहीं मान लेती, आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। इस दौरान 16 और 17 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल के संबंध में चर्चा की गई। इस अवसर पर निधि अग्रवाल, अर्जुन गुप्ता, शोभना दुआ, प्रेम सिंह, नवीन, उदित, विपिन, संजय, प्रमोद, गुंजन मिश्रा, आशीष, अपूर्व, उर्वशी मौजूद रहे। संवाद