गला दबाकर की गई थी अधिवक्कीता की पत्नी की हत्या
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नैनीताल हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनीष अरोड़ा की पत्नी पद्मिनी की गला दबाकर हत्या की गई थी। डॉक्टरों का पैनल बनाकर दोबारा कराए गए पोस्टमार्टम में ये खुलासा हुआ है। इसके साथ ही पहले पोस्टमार्टम की वह रिपोर्ट भी सवालों के घेरे में आ गई है, जिसे अस्पताल प्रबंधन ने आनन फानन में रद्द कर दिया था।
रुड़की, आजादनगर निवासी नैनीताल हाइकोर्ट में अधिवक्ता मनीष अरोड़ा की पिछले साल अधोईवाला, रायपुर, देहरादून की पद्मिनी से शादी हुई थी। तीन दिन पहले पद्मिनी (26 वर्ष) अपने मायके से पति के पास नैनीताल पहुंची थी जहां संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई थी। अंतिम संस्कार के लिए शव रुड़की लाने पर मायके वालों ने शक जताते हुए पुलिस को मामले की सूचना दी जिसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को सिविल अस्पताल भिजवाया था, मगर पोस्टमार्टम और बिना हस्ताक्षर वाली उसकी रिपोर्ट पर मायके वालों ने सवाल उठाते हुए डाक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। मायके वालों की मांग पर तीन डॉक्टरों के पैनल ने शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया। सिविल अस्पताल के सीएमएस डा. संजय कंसल के मुताबिक पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या करने की बात सामने आई है।
हालांकि अस्पताल की ओर से पहले पोस्टमार्टम की रिपोर्ट रद्द कर दी गई थी, मगर डाक्टरों के पैनल की ओर से किए गए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की वजह सामने आने पर पहले पोस्टमार्टम पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं पहला पीएम करने वाले डॉक्टर के शुक्रवार को अस्पताल से नदारद रहना भी चर्चा का विषय बना रहा। दूसरी ओर, गंगनहर कोतवाली प्रभारी जवाहर लाल का कहना है कि अधिवक्ता मनीष अरोड़ा और उनके माता पिता के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर केस नैनीताल ट्रांसफर कर दिया गया है। मामले की जांच नैनीताल पुलिस करेगी।