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डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर मांगी मन्नतें

Wed, 10 Nov 2021 08:21 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 08:21 PM IST
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Offered prayers to the setting sun
रुड़की में लक्ष्मी नारायण घाट पर छठ पूजा पर डूबते हुए सूर्या को अर्ध्य देते श्रद्धालु। - फोटो : ROORKEE
छठ महापर्व के तीसरे दिन व्रतियों ने शाम के समय गंगा घाटों पर पहुंचकर अस्त होते सूर्य को नमन कर पहला अर्घ्य दिया। श्रद्धालुओं ने अर्घ्य देने के साथ ही छठ मइया से विश्व कल्याण और परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। शहर के लक्ष्मी नारायण घाट के साथ ही अन्य घाटों पर श्रद्धालु ढोल नंगाडों और आतिशबाजी करते हुए पहुंचे। आज उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ महापर्व का समापन किया जाएगा।
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शहर में कुछ सालों पहले तक छह पर्व लोग बहुत कम संख्या में मनाते थे। धीरे-धीरे शहर में बिहार प्रदेश के लोगों की संख्या बढ़ने लगी। इसके बाद ये पर्व स्वयं में अलग छठा बिखेरने लगा। वर्तमान में इस पर्व को मनाने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या है। इसको देखते हुए नगर निगम प्रशासन हर साल इस पर्व के लिए गंगनहर घाटों की सफाई करवाकर श्रद्धालुओं को सुविधाएं मुहैया करवाता है। छठ पर्व सोमवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया था। इसके बाद दूसरे दिन खरना की रस्म पूरी करने के बाद महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा। तीसरे दिन यानी बुधवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की रश्म थी। इसको लेकर श्रद्धालुओं में सुबह से ही उत्साह दिखाई दे रहा था। व्रती महिलाएं जहां दिनभर छठ मइया की आराधना करती रहीं, वहीं घर के अन्य सदस्यों ने शाम की पूजा के लिए दिनभर खरीदारी की। शाम होते ही श्रद्धालु परिजनों के साथ पूजा की सामग्री लेकर गंगनहर के घाटों पर पहुंचे। यहां पहुंचकर पहले से चिह्नित बेदी पर पूजा का सामान रखकर व्रती महिलाओं ने पूजापाठ शुरू किया। इसके बाद महिलाओं ने छठ पूजा में उपयोग होने वाली सभी सामग्रियों को एक बांस की टोकरी में रखा। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य के लिए प्रसाद सूप में रखकर दीपक जलाया। इसके बाद सूर्य अस्त होने से पहले ही महिलाएं गंगा के पानी में खड़ी हो गई। वहीं सूर्य के अस्त होते ही सूर्य देव को अर्घ्य दिया और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की।
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जीरो जोन होने के बावजूद लगा जाम
शहर के बीचों बीच गंगा घाट पर छठ व्रतियों के पहुंचने के दौरान सड़क पर जाम लग गया। हालांकि यातायात पुलिस ने पहले से ही नगर निगम पुल से दीनदयाल पुल तक के क्षेत्र को जीरो जोन किया हुआ था। यहां चौपहिया वाहनों की एंट्री बिलकुल बंद थी। इसके बावजूद यहां जाम लग गय। दरअसल, दुपहिया वाहनों के साथ ही ई-रिक्शाएं जाम का कारण बनी। मनाही के बावजूद बहुत से लोग ई-रिक्शा लेकर बाजार में घुस गए। ऐसे में यहां तैनात पुलिस को जाम खुलवाने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
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बांस की टोकरी में सजाई पूजा सामग्री
छठ पूजा के लिए बांस से बनी टोकरियों का विशेष महत्व होता है। महिलाएं इस बांस की टोकरी और सूप (छाज) में पूूज की सामग्री रखती है। इसमें मुख्य रूम से चावल, दीपक, सिंदूर, गन्ना, हल्दी, सुथनी, सब्जी, शकरकंदी, दूध, फल, शहद, पान, नींबू, सुपारी, कैराव, कपूर, मिठाई और चंदन के अलावा ठेकुआ, मालपुआ, खीर, सूजी का हलवा, पूरी, चावल के लड्डू आदि सामान रखते हैं। महिलाओं ने पूजा करके अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना की।

गूंजते रहे छठ मइयां के गीत
बुुधवार को सुबह से हो रही तैयारियों के बीच समाज के लोग सिर पर बांस की टोकरी रखकर छठ मइया के गीत गाते हुए गंगा घाटों की ओर बढ़े। इस दौरान श्रद्धालु ‘हे छठी मइया हर लीं बलैया’, ‘कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए’, ‘रिमिक झिमिक बोलेलीं छठी मइया’ आदि छठ गीत गाते हुए आगे बढ़ रहे थे। वहीं लोगों ने जमकर आतिशबाजी की और ढोल-तासों की गूंज के साथ ही छठ मइया के जयकारे लगाए।
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