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दल बदलकर भी अरमान नहीं हुए पूरे
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Mon, 30 Jan 2017 09:52 PM IST
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इस बार विधायक बनने की चाह में जिले के कई नेताओं ने विधानसभा चुनाव से ऐन वक्त पहले दल तो बदल लिए, लेकिन इसके बाद भी कई को टिकट मिलने में सफलता नहीं मिल पाई। जिससे यह नेता अपने पुराने दलों को छोड़कर नए दलों में भी वैसे ही रह गए जैसी इनकी स्थिति पहले वाले थी।
बसपा से तीन बार विधायक रह चुके हरिदास ने पार्टी से टिकट नहीं मिलने से आचार संहिता लगने से पहले ही कांग्रेस की सदस्यता लेकर टिकट की दावेदारी की थी। रुड़की के पूर्व ब्लॉक प्रमुख कपिल कुमार ने भी बसपा से टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस का हाथ थाम लिया था, लेकिन बसपा के बाद हरिदास और कपिल टिकट मिलने की लड़ाई में राजपाल से ही हार गए। इसके अलावा सपा से सांसद रहे राजेंद्र बाड़ी ने भी कांग्रेस के बाद भाजपा का दामन थामा था। उन्होंने झबरेड़ा सुरक्षित सीट से टिकट का मांग की थी, लेकिन इस सीट पर देशराज कर्णवाल ने बाजी मार ली।
वर्ष 2012 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े चौधरी कुलवीर सिंह एवं कांग्रेस के जिला महासचिव रहे एवं गन्ना विकास समिति लिब्बरहेड़ी के चेयरमैन चौधरी कुलदीप ने भी चुनाव से ऐनवक्त पहले भाजपा में शामिल होकर मंगलौर सीट से दावेदारी की थी, लेकिन यहां ऋषिपाल बालियान को पार्टी ने टिकट दिया। इसके अलावा वर्ष 2014 का चुनाव लड़ चुके हाजी इस्लाम ने बसपा को अलविदा कहकर भाजपा से टिकट के लिए आवेदन किया था, लेकिन यहां पार्टी ने कमल खिलाने के लिए जयभगवान पर भरोसा जताया। इसके अलावा भी कई छोटे-बड़े नेताओं ने दल-बदल कर विधायक बनने का रास्ता तो बनाया, लेकिन जिन दलों में यह गए वहीं उनको टिकट नहीं दिया। अब यह अपने घरों में बैठकर तमाशा देख रहे हैं।
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बसपा से तीन बार विधायक रह चुके हरिदास ने पार्टी से टिकट नहीं मिलने से आचार संहिता लगने से पहले ही कांग्रेस की सदस्यता लेकर टिकट की दावेदारी की थी। रुड़की के पूर्व ब्लॉक प्रमुख कपिल कुमार ने भी बसपा से टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस का हाथ थाम लिया था, लेकिन बसपा के बाद हरिदास और कपिल टिकट मिलने की लड़ाई में राजपाल से ही हार गए। इसके अलावा सपा से सांसद रहे राजेंद्र बाड़ी ने भी कांग्रेस के बाद भाजपा का दामन थामा था। उन्होंने झबरेड़ा सुरक्षित सीट से टिकट का मांग की थी, लेकिन इस सीट पर देशराज कर्णवाल ने बाजी मार ली।
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वर्ष 2012 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े चौधरी कुलवीर सिंह एवं कांग्रेस के जिला महासचिव रहे एवं गन्ना विकास समिति लिब्बरहेड़ी के चेयरमैन चौधरी कुलदीप ने भी चुनाव से ऐनवक्त पहले भाजपा में शामिल होकर मंगलौर सीट से दावेदारी की थी, लेकिन यहां ऋषिपाल बालियान को पार्टी ने टिकट दिया। इसके अलावा वर्ष 2014 का चुनाव लड़ चुके हाजी इस्लाम ने बसपा को अलविदा कहकर भाजपा से टिकट के लिए आवेदन किया था, लेकिन यहां पार्टी ने कमल खिलाने के लिए जयभगवान पर भरोसा जताया। इसके अलावा भी कई छोटे-बड़े नेताओं ने दल-बदल कर विधायक बनने का रास्ता तो बनाया, लेकिन जिन दलों में यह गए वहीं उनको टिकट नहीं दिया। अब यह अपने घरों में बैठकर तमाशा देख रहे हैं।
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