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नए आए नहीं , दो चिकित्सकों ने छोड़ा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Wed, 02 Nov 2016 10:32 PM IST
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सकों के जाने से समस्या गंभीर हो गई है। स्थिति यह है कि फिलहाल सिविल अस्पताल में स्वीकृत पद से आधे चिकित्सकों की भी तैनाती नहीं की गई है, जिसका खामियाजा आए दिन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
सिविल अस्पताल रुड़की और ट्रामा सेंटर के लिए कुल 32 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इसके विपरीत अस्पताल में आधे से भी कम चिकित्सक उपलब्ध हैं। अब तक 15 चिकित्सक अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे। इसमें से अब दो और ने सिविल अस्पताल छोड़ दिया है। तीन दिन पहले रेडियोलाजिस्ट डा. डीएस भंडारी ने सिविल अस्पताल को अलविदा कह दिया था। इसके बाद बुधवार को ईएमओ डा. राहुल ने भी सेवाओं में असमर्थता जताई है। ऐसे में अब अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या महज 13 रह गई है। इसमें ब्लड बैंक में एक चिकित्सक की नियमित नियुक्ति है। इसके अलावा इमरजेंसी, वीआईपी ड्यूटी, शिविर सहित अन्य स्थानों पर अस्पताल के चिकित्सकों को सेवाएं देनी होती है। इस कारण अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी का खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या फिजिशियन और स्त्रीरोग विशेषज्ञ के नहीं होने से आ रही है।
कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में रुड़की पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने जल्द सिविल अस्पताल में फिजिशियन की तैनाती का भरोसा दिलाया था, लेकिन महीनों बाद भी इस पर कार्रवाई नहीं हो सकी। वहीं अस्पताल में निरीक्षण के लिए आए उच्चाधिकारियों ने भी कई बार स्त्रीरोग विशेषज्ञ और फिजिशियन की तैनाती कराने का आश्वासन दिया पर नतीजा ढाक के तीन पात रहा।
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अब अल्ट्रासाउंड पर भी लगा ब्रेक
सिविल अस्पताल में पहले ही अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी। अक्सर मशीन खराब होने से मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा था। अब रेडियोलोजिस्ट के जाने से अल्ट्रासाउंड का कार्य ठप पड़ गया है। वहीं अस्पताल में डिजिटल एक्सरे और सीटी स्कैन मशीन पहले ही धूल फांक रही है।
क्या कहते हैं सीएमएस
सिविल अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डा. संजय कंसल का कहना है कि चिकित्सकों की कमी के संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। इससे मरीजों को दिक्कत होने के साथ ही चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस संबंध में डिमांड भी भेजी गई है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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सिविल अस्पताल रुड़की और ट्रामा सेंटर के लिए कुल 32 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इसके विपरीत अस्पताल में आधे से भी कम चिकित्सक उपलब्ध हैं। अब तक 15 चिकित्सक अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे। इसमें से अब दो और ने सिविल अस्पताल छोड़ दिया है। तीन दिन पहले रेडियोलाजिस्ट डा. डीएस भंडारी ने सिविल अस्पताल को अलविदा कह दिया था। इसके बाद बुधवार को ईएमओ डा. राहुल ने भी सेवाओं में असमर्थता जताई है। ऐसे में अब अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या महज 13 रह गई है। इसमें ब्लड बैंक में एक चिकित्सक की नियमित नियुक्ति है। इसके अलावा इमरजेंसी, वीआईपी ड्यूटी, शिविर सहित अन्य स्थानों पर अस्पताल के चिकित्सकों को सेवाएं देनी होती है। इस कारण अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी का खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या फिजिशियन और स्त्रीरोग विशेषज्ञ के नहीं होने से आ रही है।
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कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में रुड़की पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने जल्द सिविल अस्पताल में फिजिशियन की तैनाती का भरोसा दिलाया था, लेकिन महीनों बाद भी इस पर कार्रवाई नहीं हो सकी। वहीं अस्पताल में निरीक्षण के लिए आए उच्चाधिकारियों ने भी कई बार स्त्रीरोग विशेषज्ञ और फिजिशियन की तैनाती कराने का आश्वासन दिया पर नतीजा ढाक के तीन पात रहा।
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अब अल्ट्रासाउंड पर भी लगा ब्रेक
सिविल अस्पताल में पहले ही अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी। अक्सर मशीन खराब होने से मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा था। अब रेडियोलोजिस्ट के जाने से अल्ट्रासाउंड का कार्य ठप पड़ गया है। वहीं अस्पताल में डिजिटल एक्सरे और सीटी स्कैन मशीन पहले ही धूल फांक रही है।
क्या कहते हैं सीएमएस
सिविल अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डा. संजय कंसल का कहना है कि चिकित्सकों की कमी के संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। इससे मरीजों को दिक्कत होने के साथ ही चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस संबंध में डिमांड भी भेजी गई है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।