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सियासी रंगबाजी में नेताजी के पहनावे ने भी बदला %रंग%
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सियासी रंगबाजी में नेताजी के भी रंग बदले-बदले नजर आ रहे हैं। नेताजी का चुनावी प्रचार के दौरान खास ध्यान पहनावे पर भी है। पारंपरिक पहनावे से लेकर आधुनिक पहनावा जनता के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बन रहा है। इतना ही नहीं प्रचार में आस्था के साथ पार्टी आस्था भी साफ झलक रही है। नेताजी गले में आस्था और पार्टी का आकर्षक पटका पहनने में आगे नजर आ रहे हैं।
चुनाव नजदीक आते ही नेताजी के हाव-भाव से लेकर पहनो तक बदल जाते हैं। प्रत्याशी चुनावी रंग में अपने पहनावे पर भी खास ध्यान देते हैं। इन दिनों में भी ऐसा ही नजारा दिख रहा है। चुनाव प्रचार में नेताजी का पहनावा भी बदल रहा है। नेताजी कभी कोट-पैंट, कभी सफारी सूट तो कभी कुर्ता-पायजामा पहनकर प्रचार कर रहे हैं। इतना ही नहीं स्टाइलिश और स्पोर्ट्स शूज भी कपड़ों की तरह ही चुने जा रहे हैं। नेताजी कभी पार्टी की टोपी तो कभी गढ़वाली और कभी गोल टोपी में नजर आ रहे हैं। गले में कभी शॉल तो कभी आस्था से जुड़ा पटका डालकर प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। नेताजी के रोजाना बदले जा रहे पहनावे पर जनता भी नजर रख रही है तो कार्यकर्ता भी उनके स्टाइल की तरह ही कपड़े बनवाकर चुनावी प्रचार में नजर आ रहे हैं।
पेंट स्टाइल में पायजामा पहली पसंद
एक दौर था जब बड़ी मोहरी के पायजामे नेता पहनते थे। वक्त के साथ मोरी न के बराबर हो गई और चूड़ीदार पायजामे ने जगह बनाई। अब पेंट स्टाइल पायजामा नेताओं की खासी पसंद बना हुआ है।
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बड़े नेताओं के पहनावे को कर रहे कॉपी
रुड़की और देहात में प्रत्याशी अपने-अपने पार्टी के बड़े नेताओं के पहनावे को कॉपी कर चुनाव प्रचार में उतरे हैं। लीनेन और कॉटन की जैकेट तो एवरग्रीन है लेकिन अब कश्मीर फैब्रिक नेताओं को खूब पसंद आ रहा है। बड़े नेताओं की तरह स्थानीय नेता भी इसे पसंद कर रहे हैं।
नेताजी का खान-पान भी बदला
चुनाव प्रचार में नेताजी का खानपान भी बदल गया है। दरअसल, कई प्रत्याशी सुबह प्रचार के लिए घर से निकलने से पहले दही और चाय के साथ में मिठाई का सेवन कर रहे हैं। कई प्रत्याशी ऐसे हैं वह सिर्फ सूखे मेवे का सेवन करके ही घर से निकल रहे हैं। दोपहर में दाल-चावल और रात में तवा रोटी व हरी सब्जी का सेवन कर रहे हैं। नेताजी तली भूनी चीजों से पूरा परहेज कर रहे हैं।
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चुनाव नजदीक आते ही नेताजी के हाव-भाव से लेकर पहनो तक बदल जाते हैं। प्रत्याशी चुनावी रंग में अपने पहनावे पर भी खास ध्यान देते हैं। इन दिनों में भी ऐसा ही नजारा दिख रहा है। चुनाव प्रचार में नेताजी का पहनावा भी बदल रहा है। नेताजी कभी कोट-पैंट, कभी सफारी सूट तो कभी कुर्ता-पायजामा पहनकर प्रचार कर रहे हैं। इतना ही नहीं स्टाइलिश और स्पोर्ट्स शूज भी कपड़ों की तरह ही चुने जा रहे हैं। नेताजी कभी पार्टी की टोपी तो कभी गढ़वाली और कभी गोल टोपी में नजर आ रहे हैं। गले में कभी शॉल तो कभी आस्था से जुड़ा पटका डालकर प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। नेताजी के रोजाना बदले जा रहे पहनावे पर जनता भी नजर रख रही है तो कार्यकर्ता भी उनके स्टाइल की तरह ही कपड़े बनवाकर चुनावी प्रचार में नजर आ रहे हैं।
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पेंट स्टाइल में पायजामा पहली पसंद
एक दौर था जब बड़ी मोहरी के पायजामे नेता पहनते थे। वक्त के साथ मोरी न के बराबर हो गई और चूड़ीदार पायजामे ने जगह बनाई। अब पेंट स्टाइल पायजामा नेताओं की खासी पसंद बना हुआ है।
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बड़े नेताओं के पहनावे को कर रहे कॉपी
रुड़की और देहात में प्रत्याशी अपने-अपने पार्टी के बड़े नेताओं के पहनावे को कॉपी कर चुनाव प्रचार में उतरे हैं। लीनेन और कॉटन की जैकेट तो एवरग्रीन है लेकिन अब कश्मीर फैब्रिक नेताओं को खूब पसंद आ रहा है। बड़े नेताओं की तरह स्थानीय नेता भी इसे पसंद कर रहे हैं।
नेताजी का खान-पान भी बदला
चुनाव प्रचार में नेताजी का खानपान भी बदल गया है। दरअसल, कई प्रत्याशी सुबह प्रचार के लिए घर से निकलने से पहले दही और चाय के साथ में मिठाई का सेवन कर रहे हैं। कई प्रत्याशी ऐसे हैं वह सिर्फ सूखे मेवे का सेवन करके ही घर से निकल रहे हैं। दोपहर में दाल-चावल और रात में तवा रोटी व हरी सब्जी का सेवन कर रहे हैं। नेताजी तली भूनी चीजों से पूरा परहेज कर रहे हैं।