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प्री-फेब्रिकेटेड वार्ड के लिए की पैमाइश
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सिविल अस्पताल में प्रस्तावित प्री-फेब्रिकेटेड वार्ड के लिए अस्पताल की छत की पैमाइश की जा रही है। इसके बाद डीपीआर शासन को भेजी जाएगी। फिर छत पर 32 बेड का प्री-फेब्रिकेटेड वार्ड बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग इस बार कोई खतरा नहीं लेना चाहता है, इसलिए इस काम को रफ्तार के साथ किया जा रहा है।
दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर में सबसे बड़ी दिक्कत कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड न मिलने की सामने आई थी। ऑक्सीजन, बेड और जीवन रक्षक उपकरण आदि न मिलने के चलते कई मरीजों की जान तक चली गई थी। हालांकि दूसरी लहर कम होते ही अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के साथ ही 10 बेड का आईसीयू वार्ड तैयार कर दिया गया था। वहीं वर्तमान में हर बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा भी मौजूद है। वहीं अब कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की आशंका जताई जा रही है। यदि शहर में इस वैरिएंट की दस्तक होती है तो सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती हैं, जबकि अस्पताल में वर्तमान में 106 बेड की सुविधा है। बेड की संख्या बढ़ाने के लिए अस्पताल की छत पर एक 32 बेड का प्री-फेब्रिटेड वार्ड बनाना प्रस्तावित है। इसके बाद अस्पताल की क्षमता 138 बेड की हो जाएगी। प्री-फेब्रिकेटेड वार्ड बनाने का काम हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रशन लिमिटेड (एचएससीएल) दिल्ली को सौंपा गया है। बृहस्पतिवार को एचएससीएल की टीम रुड़की अस्पताल पहुंची। एचएससीएल के इंजीनियर विपिन चंद्र ने बताया कि अस्पताल भवन की छत पर यह वार्ड बनाया जाना है। इसको लेकर छत की पैमाइश कराई जा रही है। इसके बाद काम की डीपीआर तैयार शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। सीएमएस डॉ. संजय कंसल का कहना है कि टीम पैमाइश के लिए आई थी। उम्मीद है जल्द से काम शुरू हो जाएगा।
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दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर में सबसे बड़ी दिक्कत कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड न मिलने की सामने आई थी। ऑक्सीजन, बेड और जीवन रक्षक उपकरण आदि न मिलने के चलते कई मरीजों की जान तक चली गई थी। हालांकि दूसरी लहर कम होते ही अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के साथ ही 10 बेड का आईसीयू वार्ड तैयार कर दिया गया था। वहीं वर्तमान में हर बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा भी मौजूद है। वहीं अब कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की आशंका जताई जा रही है। यदि शहर में इस वैरिएंट की दस्तक होती है तो सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती हैं, जबकि अस्पताल में वर्तमान में 106 बेड की सुविधा है। बेड की संख्या बढ़ाने के लिए अस्पताल की छत पर एक 32 बेड का प्री-फेब्रिटेड वार्ड बनाना प्रस्तावित है। इसके बाद अस्पताल की क्षमता 138 बेड की हो जाएगी। प्री-फेब्रिकेटेड वार्ड बनाने का काम हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रशन लिमिटेड (एचएससीएल) दिल्ली को सौंपा गया है। बृहस्पतिवार को एचएससीएल की टीम रुड़की अस्पताल पहुंची। एचएससीएल के इंजीनियर विपिन चंद्र ने बताया कि अस्पताल भवन की छत पर यह वार्ड बनाया जाना है। इसको लेकर छत की पैमाइश कराई जा रही है। इसके बाद काम की डीपीआर तैयार शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। सीएमएस डॉ. संजय कंसल का कहना है कि टीम पैमाइश के लिए आई थी। उम्मीद है जल्द से काम शुरू हो जाएगा।
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