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Roorkee News: गन्ना चरखियाें में प्लास्टिक कचरा जलाकर बन रहा गुड़ और शक्कर
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क्षेत्र के कई गन्ना चरखियों में नियमों को ताक पर रखकर प्लास्टिक कचरा जलाकर गुड़ और शक्कर तैयार की जा रही है। इससे उठने वाला जहरीला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर रहा है और स्थानीय लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहा है।
झबरेड़ा कस्बे के सहारनपुर, गुरुकुल नारसन मार्ग और इकबालपुर क्षेत्र में कई गन्ना चरखियां संचालित हैं। इन चरखियों में गन्ने की पेराई के बाद भट्ठी में गन्ने की खोई के बजाय प्लास्टिक कचरा, पॉलिथीन, पुराने सिंथेटिक कपड़े, टायर की रबड़ और अन्य प्लास्टिक के टुकड़े जलाए जा रहे हैं।
चरखी मालिक सस्ते ईंधन के रूप में प्लास्टिक कचरा जलाकर पर्यावरण और जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दिन में यह कोल्हू संचालक प्लास्टिक कचरे को गन्ने की पत्तियों से ढक देते हैं जबकि रात के समय खुलेआम इसे जलाया जाता है।
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स्थानीय निवासियों रमन कुमार, अनिल और राजीव ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग पर केवल खानापूर्ति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन की चेतावनी के बावजूद यह जारी है। उधर झबरेड़ा पुलिस ने पहले भी कोल्हू मालिकों की बैठक बुलाकर उन्हें कचरा न जलाने की सख्त हिदायत दी थी लेकिन उसके बाद भी हालात नहीं बदले हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण विभाग से मांग की कि ऐसे कोल्हू मालिकों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि क्षेत्र में फैल रहे प्रदूषण पर रोक लग सके।
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झबरेड़ा कस्बे के सहारनपुर, गुरुकुल नारसन मार्ग और इकबालपुर क्षेत्र में कई गन्ना चरखियां संचालित हैं। इन चरखियों में गन्ने की पेराई के बाद भट्ठी में गन्ने की खोई के बजाय प्लास्टिक कचरा, पॉलिथीन, पुराने सिंथेटिक कपड़े, टायर की रबड़ और अन्य प्लास्टिक के टुकड़े जलाए जा रहे हैं।
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चरखी मालिक सस्ते ईंधन के रूप में प्लास्टिक कचरा जलाकर पर्यावरण और जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दिन में यह कोल्हू संचालक प्लास्टिक कचरे को गन्ने की पत्तियों से ढक देते हैं जबकि रात के समय खुलेआम इसे जलाया जाता है।
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स्थानीय निवासियों रमन कुमार, अनिल और राजीव ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग पर केवल खानापूर्ति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन की चेतावनी के बावजूद यह जारी है। उधर झबरेड़ा पुलिस ने पहले भी कोल्हू मालिकों की बैठक बुलाकर उन्हें कचरा न जलाने की सख्त हिदायत दी थी लेकिन उसके बाद भी हालात नहीं बदले हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण विभाग से मांग की कि ऐसे कोल्हू मालिकों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि क्षेत्र में फैल रहे प्रदूषण पर रोक लग सके।