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... तो ऐसे जिला कैसे बन पाएगा डिजिटल
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कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से जिले को डिजिटल बनाने की योजना पर कुछ नोडल अफसरों ने अपनी मनमानी से ग्रहण लगाना शुरू कर दिया है। जो बेरोजगार युवा नए सीएससी के लिए आवेदन कर रहे हैं, अधिकारी उनसे जबरन 20 हजार रुपये का बीमा करवा रहे हैं। जो बीमा करवाने में असमर्थ हैं उन्हें मजबूरी में आवेदन वापस लेना पड़ रहा है। कुछ युवाओं ने मामले की शिकायत डीएम और पीएमओ ऑफिस तक में की है।
शहर से लेकर देहात में खुले कॉमन सर्विस सेंटर डिजिटलाइजेशन की ओर उठा एक बेहतर कदम है। अब सीएससी पर सभी प्रकार के ऑनलाइन काम होने लगे हैं। बेरोजगार युवाओं के लिए भी यह रोजगार का बेहतर साधन था लेकिन कुछ नोडल अफसरों की मनमानी से योजना पर ग्रहण लगने लगा है। दरअसल, कुछ समय से जो बेरोजगार युवा सीएससी के लिए आवेदन कर रहे हैं, अधिकारी उनसे जबरन 5000 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से 20 से 25 हजार रुपये का बीमा करवा रहे हैं। बिना बीमा के सीएससी आईडी अप्रूव नहीं की जा रही है। इसके चलते युवा सभी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद बेरोजगार होकर घर बैठे हैं। अवनीश कुमार, आदित्य सिंह और सोहन लाल आदि ने बताया कि उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारी के पास सीएससी के लिए आवेदन किया था।
उन्होंने सबसे पहले चौदह सौ शुल्क लेकर टीईसी प्रमाणपत्र के लिए परीक्षा दी। इसके बाद उन्होंने 20 हजार रुपये का बीमा करवाने की शर्त रखी। भ्रमित कर उन्होंने बताया कि आईडी लेने के लिए बीमा अनिवार्य है जबकि उच्चाधिकारियों के अनुसार ऐसा कोई नियम नहीं है। ऐसी स्थिति में उन्होंने मजबूरी में आवेदन वापस ले लिया। दूसरी ओर, आदाब अली, श्रवण, नीतीश कुमार आदि ने बताया कि उन्हें भ्रमित कर पहले बीमा करवाया गया। जब उन्होंने आधार कार्ड बनाने की सेवा शुरू करने की मांग की तो अधिकारियों ने दोबारा से 20 हजार रुपये का बीमा करवाने की बात कही। उन्होंने मामले की शिकायत डीएम और पीएमओ ऑफिस तक की है।
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तो इसलिए करवाया जा रहा जबरन बीमा
सीएससी संचालकों से जबरन बीमा करवाने की वजह कमीशन बताई जा रही है। दरअसल, एक बीमा करवाने पर 15 से 20 फीसदी कमीशन मिलता है। यह कमीशन नए सीएससी संचालकों को नहीं मिलता, क्योंकि तब तक उनकी आईडी नहीं बनी होती। आरोप है कि यह पूरा कमीशन अधिकारियों की आईडी में जाता है।
सीएससी के लिए व्यक्ति को 20 हजार रुपये का बीमा करवाना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, कुछ सेवाएं ऐसी हैं जिन्हें लेने के लिए अन्य लोगों का बीमा करवाना जरूरी है। यह स्थिति सीएससी संचालक के साथ तब आती है जब वह पहले से सेंटर चला रहा हो और उसे अन्य सेवाओं की जरूरत हो। यदि अधिकारी जबरन बीमा करवाने का दबाव बना रहे हैं तो मामले की जांच की जाएगी।
-ललित बोरा, स्टेट हेड, सीएससी
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शहर से लेकर देहात में खुले कॉमन सर्विस सेंटर डिजिटलाइजेशन की ओर उठा एक बेहतर कदम है। अब सीएससी पर सभी प्रकार के ऑनलाइन काम होने लगे हैं। बेरोजगार युवाओं के लिए भी यह रोजगार का बेहतर साधन था लेकिन कुछ नोडल अफसरों की मनमानी से योजना पर ग्रहण लगने लगा है। दरअसल, कुछ समय से जो बेरोजगार युवा सीएससी के लिए आवेदन कर रहे हैं, अधिकारी उनसे जबरन 5000 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से 20 से 25 हजार रुपये का बीमा करवा रहे हैं। बिना बीमा के सीएससी आईडी अप्रूव नहीं की जा रही है। इसके चलते युवा सभी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद बेरोजगार होकर घर बैठे हैं। अवनीश कुमार, आदित्य सिंह और सोहन लाल आदि ने बताया कि उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारी के पास सीएससी के लिए आवेदन किया था।
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उन्होंने सबसे पहले चौदह सौ शुल्क लेकर टीईसी प्रमाणपत्र के लिए परीक्षा दी। इसके बाद उन्होंने 20 हजार रुपये का बीमा करवाने की शर्त रखी। भ्रमित कर उन्होंने बताया कि आईडी लेने के लिए बीमा अनिवार्य है जबकि उच्चाधिकारियों के अनुसार ऐसा कोई नियम नहीं है। ऐसी स्थिति में उन्होंने मजबूरी में आवेदन वापस ले लिया। दूसरी ओर, आदाब अली, श्रवण, नीतीश कुमार आदि ने बताया कि उन्हें भ्रमित कर पहले बीमा करवाया गया। जब उन्होंने आधार कार्ड बनाने की सेवा शुरू करने की मांग की तो अधिकारियों ने दोबारा से 20 हजार रुपये का बीमा करवाने की बात कही। उन्होंने मामले की शिकायत डीएम और पीएमओ ऑफिस तक की है।
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तो इसलिए करवाया जा रहा जबरन बीमा
सीएससी संचालकों से जबरन बीमा करवाने की वजह कमीशन बताई जा रही है। दरअसल, एक बीमा करवाने पर 15 से 20 फीसदी कमीशन मिलता है। यह कमीशन नए सीएससी संचालकों को नहीं मिलता, क्योंकि तब तक उनकी आईडी नहीं बनी होती। आरोप है कि यह पूरा कमीशन अधिकारियों की आईडी में जाता है।
सीएससी के लिए व्यक्ति को 20 हजार रुपये का बीमा करवाना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, कुछ सेवाएं ऐसी हैं जिन्हें लेने के लिए अन्य लोगों का बीमा करवाना जरूरी है। यह स्थिति सीएससी संचालक के साथ तब आती है जब वह पहले से सेंटर चला रहा हो और उसे अन्य सेवाओं की जरूरत हो। यदि अधिकारी जबरन बीमा करवाने का दबाव बना रहे हैं तो मामले की जांच की जाएगी।
-ललित बोरा, स्टेट हेड, सीएससी