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सीबीएसई में हिंदी के प्रति बढ़ा छात्रों का रुझान
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रुड़की। इसे प्रचार प्रसार का असर कहें या फिर अपनी मातृभाषा के प्रति लगाव कि अब 10वीं पास करने के बाद 11वीं में छात्र पांचवें विषय में हिंदी को पढ़ना पसंद कर रहे हैं। 11वीं में 40 फीसदी छात्र केवल हिंदी विषय लेते हैं, जबकि बाकी 60 फीसदी छात्र फिजिकल एजूकेशन, साइकॉलोजी, संस्कृत और गणित आदि विषयों का चयन करते हैं। स्कूलों के ये आंकड़े हिंदी के भविष्य के लिए राहत भरी खबर है। इससे मातृभाषा को सम्मान मिलेगा।
कुछ साल पहले सीबीएसई बोर्ड के छात्र हिंदी विषय को अपने सिलेबस में बोझ मानते थे। स्थिति यह थी कि हिंदी विषय में बच्चों के मात्र पासिंग मार्क्स ही आते थे। हालांकि हिंदी की दुर्दशा पर सरकार से लेकर सामाजिक संस्थाओं ने वृहद अभियान चलाया। बाकायदा हिंदी पखवाड़े पर लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को अधिक से अधिक हिंदी भाषा को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। शायद प्रचार प्रसार का ही नतीजा है कि अब सीबीएसई के छात्र भी हिंदी विषय में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं। दरअसल, सीबीएसई में छात्र के पास 10वीं में छह विषय गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, अंग्रेजी और हिंदी शामिल होता है। इसके बाद 11वीं में छात्रों को पांच विषयों में चार विषय लेने अनिवार्य होते हैं, जबकि पांचवें विषय के लिए छात्र के पास विकल्प होते हैं। 11वीं साइंस विषय लेने वाले छात्र को भौतिक, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, अंग्रेजी और हिंदी या फिजिकल एजूकेशन में से एक लेना पड़ता है। इसी तरह कॉमर्स विषय लेने वाले छात्रों को एकाउंट, बिजनेस स्टडीज, इकोनॉमिक्स, इंग्लिश और हिंदी, फिजिकल एजूकेशन, उद्यमिता व गणित में से एक विषय लेना अनिवार्य है। इसी तरह कला वर्ग में छात्र को इतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र, अंग्रेजी और हिंदी या अर्थशास्त्र, साइकोलॉजी, संस्कृत और फिलोसफी में से एक विषय लेना अनिवार्य है। दो साल से इन वैकल्पिक विषयों में छात्र हिंदी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सीबीएसई की रुड़की जोन की कोआर्डिनेटर माला चौहान ने बताया कि करीब 40 फीसदी छात्र हिंदी विषय ले रहे हैं, जबकि 60 फीसदी छात्र अन्य विषय जैसे फिजिकल एजूकेशन, उद्यमिता, गणित, अर्थशास्त्र, साइकोलॉजी, संस्कृत और फिलोसफी को पसंद कर रहे हैं। बताया कि छात्रों का अपनी मातृभाषा हिंदी के प्रति रुझान सराहनीय है। यही नहीं, छात्र हिंदी में अच्छे अंकों के साथ पास भी हो रहे हैं।
उत्तराखंड बोर्ड में हिंदी विषय अनिवार्य
बीईओ श्रीकांत पुरोहित ने बताया कि 10वीं में छात्रों के पास छह विषय होते हैं। इसके बाद 11वीं में आने पर छात्रों को सभी चार विषयों के साथ हिंदी विषय अनिवार्य किया हुआ है। हालांकि उत्तराखंड बोर्ड में अंग्रेजी विषय वैकल्पिक तौर पर है। यदि कोई छात्र अंग्रेजी विषय को नहीं पढ़ पा रहा है तो वह अर्थशास्त्र या अन्य विषय ले सकता है, जबकि हिंदी विषय पढ़ना उसके लिए अनिवार्य है।
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कुछ साल पहले सीबीएसई बोर्ड के छात्र हिंदी विषय को अपने सिलेबस में बोझ मानते थे। स्थिति यह थी कि हिंदी विषय में बच्चों के मात्र पासिंग मार्क्स ही आते थे। हालांकि हिंदी की दुर्दशा पर सरकार से लेकर सामाजिक संस्थाओं ने वृहद अभियान चलाया। बाकायदा हिंदी पखवाड़े पर लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को अधिक से अधिक हिंदी भाषा को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। शायद प्रचार प्रसार का ही नतीजा है कि अब सीबीएसई के छात्र भी हिंदी विषय में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं। दरअसल, सीबीएसई में छात्र के पास 10वीं में छह विषय गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, अंग्रेजी और हिंदी शामिल होता है। इसके बाद 11वीं में छात्रों को पांच विषयों में चार विषय लेने अनिवार्य होते हैं, जबकि पांचवें विषय के लिए छात्र के पास विकल्प होते हैं। 11वीं साइंस विषय लेने वाले छात्र को भौतिक, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, अंग्रेजी और हिंदी या फिजिकल एजूकेशन में से एक लेना पड़ता है। इसी तरह कॉमर्स विषय लेने वाले छात्रों को एकाउंट, बिजनेस स्टडीज, इकोनॉमिक्स, इंग्लिश और हिंदी, फिजिकल एजूकेशन, उद्यमिता व गणित में से एक विषय लेना अनिवार्य है। इसी तरह कला वर्ग में छात्र को इतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र, अंग्रेजी और हिंदी या अर्थशास्त्र, साइकोलॉजी, संस्कृत और फिलोसफी में से एक विषय लेना अनिवार्य है। दो साल से इन वैकल्पिक विषयों में छात्र हिंदी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सीबीएसई की रुड़की जोन की कोआर्डिनेटर माला चौहान ने बताया कि करीब 40 फीसदी छात्र हिंदी विषय ले रहे हैं, जबकि 60 फीसदी छात्र अन्य विषय जैसे फिजिकल एजूकेशन, उद्यमिता, गणित, अर्थशास्त्र, साइकोलॉजी, संस्कृत और फिलोसफी को पसंद कर रहे हैं। बताया कि छात्रों का अपनी मातृभाषा हिंदी के प्रति रुझान सराहनीय है। यही नहीं, छात्र हिंदी में अच्छे अंकों के साथ पास भी हो रहे हैं।
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उत्तराखंड बोर्ड में हिंदी विषय अनिवार्य
बीईओ श्रीकांत पुरोहित ने बताया कि 10वीं में छात्रों के पास छह विषय होते हैं। इसके बाद 11वीं में आने पर छात्रों को सभी चार विषयों के साथ हिंदी विषय अनिवार्य किया हुआ है। हालांकि उत्तराखंड बोर्ड में अंग्रेजी विषय वैकल्पिक तौर पर है। यदि कोई छात्र अंग्रेजी विषय को नहीं पढ़ पा रहा है तो वह अर्थशास्त्र या अन्य विषय ले सकता है, जबकि हिंदी विषय पढ़ना उसके लिए अनिवार्य है।
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