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पहली ही आंधी में 30 फीसदी फल झड़कर गिरा
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तीन दिन पहले आई आंधी ने हरिद्वार में बागवानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सीजन की पहली आंधी ने बागवानों का करीब 30 फीसदी फल पेड़ से गिरा दिया है। ऐसे में इस बार बंपर फसल लेने की उम्मीद संजोए बैठे बागवानों की उम्मीदें टूटने लगी हैं।
तीन दिन पहले अचानक बदले मौसम के बाद तेज आंधी शुरू हो गई थी। इस आंधी ने किसानों से ज्यादा बागवानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस समय जिले में करीब 6500 हेक्टेयर भूमि पर आम के बाग हैं। इसमें से करीब छह हजार हेक्टेयर में आम के बाग हैं। सीजन होने के कारण पेड़ों पर आए बौर से अब फल बड़ा आकार लेने लगा है। तीन दिन पहले आई इस आंधी से बागों को भारी नुकसान पहुंचा है। ये आंधी इतनी तेज थी कि फल टूटकर जमीन पर गिए। कई जगह पेड़ ही उखड़ गए। जिन बागों में पेड़ गिरे हैं बागवानों को वहां भारी नुकसान पहुंचा है। दो दिन बाद उद्यान विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र के बागों का भ्रमण कर वहां हुए नुकसान का आकलन किया है।
वरिष्ठ उद्यान अधिकारी राजेश प्रसाद जसोला ने बताया कि उन्होंने क्षेत्र का भ्रमण कर बागों में हुए नुकसान का आकलन किया है। बताया कि मेहवड़ खुर्द, मूलदासपुर माजरा, नगला, बेलडा, इमलीखेड़ा, डेलना आदि गांवों के ग्रामीणों से वार्ता की गई और मौके का निरीक्षण किया गया। इसमें पाया गया कि अधिकतर जगह 20 से 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। फल की टहनी कमजोर होने के कारण वह टूटकर गिर गया। अभी ये फल छोटा है इसलिए इसकी मांग बाजार में भी बहुत कम रहती है।
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तीन दिन पहले अचानक बदले मौसम के बाद तेज आंधी शुरू हो गई थी। इस आंधी ने किसानों से ज्यादा बागवानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस समय जिले में करीब 6500 हेक्टेयर भूमि पर आम के बाग हैं। इसमें से करीब छह हजार हेक्टेयर में आम के बाग हैं। सीजन होने के कारण पेड़ों पर आए बौर से अब फल बड़ा आकार लेने लगा है। तीन दिन पहले आई इस आंधी से बागों को भारी नुकसान पहुंचा है। ये आंधी इतनी तेज थी कि फल टूटकर जमीन पर गिए। कई जगह पेड़ ही उखड़ गए। जिन बागों में पेड़ गिरे हैं बागवानों को वहां भारी नुकसान पहुंचा है। दो दिन बाद उद्यान विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र के बागों का भ्रमण कर वहां हुए नुकसान का आकलन किया है।
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वरिष्ठ उद्यान अधिकारी राजेश प्रसाद जसोला ने बताया कि उन्होंने क्षेत्र का भ्रमण कर बागों में हुए नुकसान का आकलन किया है। बताया कि मेहवड़ खुर्द, मूलदासपुर माजरा, नगला, बेलडा, इमलीखेड़ा, डेलना आदि गांवों के ग्रामीणों से वार्ता की गई और मौके का निरीक्षण किया गया। इसमें पाया गया कि अधिकतर जगह 20 से 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। फल की टहनी कमजोर होने के कारण वह टूटकर गिर गया। अभी ये फल छोटा है इसलिए इसकी मांग बाजार में भी बहुत कम रहती है।
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