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...तो खड़े-खड़े अभियान को कैसे रफ्तार दें टीम
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कोरोना जांच और टीकाकरण के लिए नारसन बॉर्डर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम को बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं मिली और न ही सामान रखने के लिए टेबल की कोई व्यवस्था थी। दो घंटे इंतजार के बाद टीम में शामिल लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। बाद में चार लोगों को छोड़कर पूरी टीम लौट आई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुर्सियों और टेबल की व्यवस्था प्रशासन को करानी थी।
सरकार के निर्देशानुसार, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर अलर्ट है। लक्ष्य पूरा करने के लिए कोरोना वैक्सीनेशन का महाअभियान शुरू किया गया है। बॉर्डर से लेकर सरकारी महकमों और सार्वजनिक जगहों पर शिविर लगाकर लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। हालांकि, इस अभियान को सफल बनाने में जुटे स्वास्थ्य कर्मचारियों को ही सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है। वैक्सीनेशन करने और सैंपल लेने में लगे स्वास्थ्य कर्मियों को शिविर में खाने-पीने की व्यवस्था तो दूर बैठने के लिए कुर्सियां और टेबल तक नहीं मिल रही हैं। इसका एक उदाहरण बुधवार को नारसन बॉर्डर स्थित संयुक्त जांच चौकी पर देखने को मिला। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना जांच और टीकाकरण के लिए टीम भेजी गई थी। इसमें करीब 15 लोग शामिल थे। बॉर्डर पर पहुंचने पर टीम को बैठने के लिए कुर्सियां उपलब्ध नहीं हुईं। न ही सामान रखने के लिए टेबल था।
टीम करीब दो घंटे तक कुर्सियों का इंतजार करती रही। ऐसे में न तो सैंपल लेने का काम शुरू हो पाया और न ही टीकाकरण। दो घंटे बाद टीम के सदस्यों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि बैठने के लिए टीकाकरण और सैंपल लेने के लिए टेबल की बेहद जरूरत है। इसे जमीन या किसी अन्य असुरक्षित जगह नहीं रख सकते हैं। टेबल नहीं होने के चलते वैक्सीनेशन भी नहीं पाया। टीम ने मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। बाद में चार सदस्यों को मौके पर छोड़कर स्वास्थ्य विभाग ने पूरी टीम को वापस बुला लिया। इसके बाद आम आदमी पार्टी के मंगलौर विधानसभा प्रत्याशी नवनीत राठी ने चार कुर्सियों और टेबल का इंतजाम करवाया। इसके बाद वैक्सीनेशन का कार्य शुरू हो पाया। मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डॉ. विवेक गर्ग का कहना है कि कुर्सियों की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की जाती है। कुर्सियां न मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को वापस बुलाना पड़ा।
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सरकार के निर्देशानुसार, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर अलर्ट है। लक्ष्य पूरा करने के लिए कोरोना वैक्सीनेशन का महाअभियान शुरू किया गया है। बॉर्डर से लेकर सरकारी महकमों और सार्वजनिक जगहों पर शिविर लगाकर लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। हालांकि, इस अभियान को सफल बनाने में जुटे स्वास्थ्य कर्मचारियों को ही सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है। वैक्सीनेशन करने और सैंपल लेने में लगे स्वास्थ्य कर्मियों को शिविर में खाने-पीने की व्यवस्था तो दूर बैठने के लिए कुर्सियां और टेबल तक नहीं मिल रही हैं। इसका एक उदाहरण बुधवार को नारसन बॉर्डर स्थित संयुक्त जांच चौकी पर देखने को मिला। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना जांच और टीकाकरण के लिए टीम भेजी गई थी। इसमें करीब 15 लोग शामिल थे। बॉर्डर पर पहुंचने पर टीम को बैठने के लिए कुर्सियां उपलब्ध नहीं हुईं। न ही सामान रखने के लिए टेबल था।
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टीम करीब दो घंटे तक कुर्सियों का इंतजार करती रही। ऐसे में न तो सैंपल लेने का काम शुरू हो पाया और न ही टीकाकरण। दो घंटे बाद टीम के सदस्यों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि बैठने के लिए टीकाकरण और सैंपल लेने के लिए टेबल की बेहद जरूरत है। इसे जमीन या किसी अन्य असुरक्षित जगह नहीं रख सकते हैं। टेबल नहीं होने के चलते वैक्सीनेशन भी नहीं पाया। टीम ने मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। बाद में चार सदस्यों को मौके पर छोड़कर स्वास्थ्य विभाग ने पूरी टीम को वापस बुला लिया। इसके बाद आम आदमी पार्टी के मंगलौर विधानसभा प्रत्याशी नवनीत राठी ने चार कुर्सियों और टेबल का इंतजाम करवाया। इसके बाद वैक्सीनेशन का कार्य शुरू हो पाया। मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डॉ. विवेक गर्ग का कहना है कि कुर्सियों की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की जाती है। कुर्सियां न मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को वापस बुलाना पड़ा।
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