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जाति प्रमाण पत्र से माता-पिता का नाम गायब
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Wed, 29 Mar 2017 10:39 PM IST
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एक तरफ जहां नए-नए सॉफ्टवेयर सुविधा एवं सरलता के लिए बनाए जाते हैं, वहीं प्रदेश के ई-डिस्ट्रिक्ट विभाग की ओर से इजाद किए गए नए सॉफ्टवेयर से जाति प्रमाण पत्र पर माता-पिता के नाम एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां गायब हो गई हैं। इससे जाति प्रमाण पत्र अप्रमाणिक माने जा रहे हैं। जिसके कारण फरियादियों को आरक्षण का लाभ लेने के लिए दोबारा से मैनुअल प्रमाण पत्र बनवाने पड़ रहे हैं।
राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाण पत्र के दो प्रकार के प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। इनमें एक प्रमाण पत्र राज्य के हिसाब से बनाया जाता है और दूसरा भारत सरकार की ओर से जारी किया जाता है। दोनों ही प्रमाण पत्रों का अलग-अलग प्रयोग होता है। राज्य स्तर से जारी होने वाला प्रमाण पत्र प्रदेश की भर्तियों में ही मान्य है, जब कि भारत सरकार का प्रमाण पत्र पूरे देश के लिए प्रयोग किया जा सकता है, दोनों जाति प्रमाण पर ऑनलाइन ई-डिस्ट्रिक्ट की साइट से जारी होते हैं, लेकिन दो सप्ताह पहले भारत सरकार को कुछ और जातियां ओबीसी में शामिल करने के लिए संशोधित शासनादेश जारी करना पड़ा। जिससे राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट विभाग को भी नया सॉफ्टवेयर डाउनलोड करना पड़ा, लेकिन अब जो सॉफ्टवेयर भारत सरकार की ओर से जारी होने वाले जाति प्रमाण पत्र के लिए डाउनलोड किया गया है। उसमें आवेदक के पिता एवं माता का नाम ही नहीं आ रहा है। इसके अलावा जाति प्रमाण पत्र में प्रमाण पत्र संख्या एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी नहीं आ रही हैं। जिससे ऑनलाइन ई-डिस्ट्रिक्ट साइट से मिलने वाले प्रमाण पत्र को जब खासकर युवा विभिन्न नौकरियों एवं संस्थानों में आरक्षण के लिए दे रहे हैं तो संबंधित इसे अप्रमाणिक मानकर आरक्षण का लाभ देने से इंकार कर दे रहे हैं। इससे परेशान युवाओं को प्रमाण पत्र जारी होने के बावजूद या तो आरक्षण नहीं मिल पा रहा है या फिर मैनुअल प्रमाण पत्र बनवाना पड़ रहा है।
भारत सरकार की ओर से जारी होने वाले ओबीसी के जाति प्रमाण पत्र में कुछ जानकारियां नहीं होने के कारण सॉफ्टवेयर का फॉरमेट तैयार किया जा रहा है। जिसे मुख्य सचिव के हस्ताक्षर के बाद डाउनलोड कर दिया जाएगा। संभावना है कि अगले सप्ताह तक पूरी जानकारियों समेत प्रमाण मिलने लगेगा।
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प्रशांत तिवारी, ई-डिस्ट्रिक्ट प्रदेश प्रभारी, उत्तराखंड
ये हैं कमियां
भारत सरकार की ओर से जारी होने वाले ओबीसी के प्रमाण पत्र में आवेदन प्रमाण पत्र संख्या, आवेदक का नाम, माता-पिता का नाम, गांव का नाम, तहसील का नाम एवं जिला एवं प्रदेश का नाम होना चाहिए। इसके साथ ही भारत सरकार की ओर से प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सन 1993 के शासनादेश का उल्लेख भी होना चाहिए, इससे साबित हो जाता है कि किस एक्ट के तहत प्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है, लेकिन वर्तमान में जारी हो रहे प्रमाण पत्र में न तो शासनादेश का जिक्र किया जा रहा है और न ही आवेदन संख्या तथा माता-पिता का नाम भी नहीं दिया जा रहा है, जबकि ये अनिवार्य हैं, क्योंकि इन सबके नहीं होने से प्रमाण पत्र फर्जी होने की आशंका अधिक बढ़ जाती है। केवल अभ्यर्थी के नाम से ही प्रमाण जारी किए जाने से किसी गांव में एक ही नाम से कई लोग होने से प्रमाण पत्र का प्रयोग कोई भी आसानी से कर सकता है। साथ ही प्रमाण पत्र संख्या दर्ज नहीं होने से असली-नकली प्रमाण पत्र की जांच भी तहसील के अधिकारी सही ढंग से नहीं कर सकते हैं।
राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाण पत्र के दो प्रकार के प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। इनमें एक प्रमाण पत्र राज्य के हिसाब से बनाया जाता है और दूसरा भारत सरकार की ओर से जारी किया जाता है। दोनों ही प्रमाण पत्रों का अलग-अलग प्रयोग होता है। राज्य स्तर से जारी होने वाला प्रमाण पत्र प्रदेश की भर्तियों में ही मान्य है, जब कि भारत सरकार का प्रमाण पत्र पूरे देश के लिए प्रयोग किया जा सकता है, दोनों जाति प्रमाण पर ऑनलाइन ई-डिस्ट्रिक्ट की साइट से जारी होते हैं, लेकिन दो सप्ताह पहले भारत सरकार को कुछ और जातियां ओबीसी में शामिल करने के लिए संशोधित शासनादेश जारी करना पड़ा। जिससे राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट विभाग को भी नया सॉफ्टवेयर डाउनलोड करना पड़ा, लेकिन अब जो सॉफ्टवेयर भारत सरकार की ओर से जारी होने वाले जाति प्रमाण पत्र के लिए डाउनलोड किया गया है। उसमें आवेदक के पिता एवं माता का नाम ही नहीं आ रहा है। इसके अलावा जाति प्रमाण पत्र में प्रमाण पत्र संख्या एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी नहीं आ रही हैं। जिससे ऑनलाइन ई-डिस्ट्रिक्ट साइट से मिलने वाले प्रमाण पत्र को जब खासकर युवा विभिन्न नौकरियों एवं संस्थानों में आरक्षण के लिए दे रहे हैं तो संबंधित इसे अप्रमाणिक मानकर आरक्षण का लाभ देने से इंकार कर दे रहे हैं। इससे परेशान युवाओं को प्रमाण पत्र जारी होने के बावजूद या तो आरक्षण नहीं मिल पा रहा है या फिर मैनुअल प्रमाण पत्र बनवाना पड़ रहा है।
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भारत सरकार की ओर से जारी होने वाले ओबीसी के जाति प्रमाण पत्र में कुछ जानकारियां नहीं होने के कारण सॉफ्टवेयर का फॉरमेट तैयार किया जा रहा है। जिसे मुख्य सचिव के हस्ताक्षर के बाद डाउनलोड कर दिया जाएगा। संभावना है कि अगले सप्ताह तक पूरी जानकारियों समेत प्रमाण मिलने लगेगा।
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प्रशांत तिवारी, ई-डिस्ट्रिक्ट प्रदेश प्रभारी, उत्तराखंड
ये हैं कमियां
भारत सरकार की ओर से जारी होने वाले ओबीसी के प्रमाण पत्र में आवेदन प्रमाण पत्र संख्या, आवेदक का नाम, माता-पिता का नाम, गांव का नाम, तहसील का नाम एवं जिला एवं प्रदेश का नाम होना चाहिए। इसके साथ ही भारत सरकार की ओर से प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सन 1993 के शासनादेश का उल्लेख भी होना चाहिए, इससे साबित हो जाता है कि किस एक्ट के तहत प्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है, लेकिन वर्तमान में जारी हो रहे प्रमाण पत्र में न तो शासनादेश का जिक्र किया जा रहा है और न ही आवेदन संख्या तथा माता-पिता का नाम भी नहीं दिया जा रहा है, जबकि ये अनिवार्य हैं, क्योंकि इन सबके नहीं होने से प्रमाण पत्र फर्जी होने की आशंका अधिक बढ़ जाती है। केवल अभ्यर्थी के नाम से ही प्रमाण जारी किए जाने से किसी गांव में एक ही नाम से कई लोग होने से प्रमाण पत्र का प्रयोग कोई भी आसानी से कर सकता है। साथ ही प्रमाण पत्र संख्या दर्ज नहीं होने से असली-नकली प्रमाण पत्र की जांच भी तहसील के अधिकारी सही ढंग से नहीं कर सकते हैं।