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गढ़वाल विवि अपना रहा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार: सुनील अग्रवाल
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हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध डिग्री कॉलेजों के संचालकों ने बैठक कर आरोप लगाया कि विवि प्रशासन मनमानी कर रहा है। साथ ही छात्रों और कॉलेजों की समस्याओं के बाबत गैरजिम्मेदाराना रवैया अपना रहा है। समस्याओं को लेकर अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पीछा छुड़ा रहे हैं। निर्णय लिया गया कि विवि समस्याओं का समाधान नहीं करता है तो मजबूरी में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।
बुधवार को एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट उत्तराखंड की ओर से आयोजित बैठक में देहरादून, कोटद्वार और हरिद्वार जिले के 25 कॉलेज संचालकों ने हिस्सा लिया। बैठक को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से किसी काम की जिम्मेदारी नहीं ली जा रही है। इसके चलते छात्रों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारी एक-दूसरे पर निर्णय की जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं। ताजा प्रकरण में यूनिवर्सिटी ने कैंपस के बीएड कॉलेज की काउंसिलिंग करा ली है जबकि संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। इसके चलते वर्तमान शैक्षिक सत्र छह महीने लेट हो चुका है। वहीं, समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति के आवेदन के लिए तारीख बढ़ाकर दस जनवरी कर दी है, लेकिन अभी तक एडमिशन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाने के कारण एससी-एसटी और ओबीसी के छात्र छात्रवृत्ति के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
इसके अलावा विवि ने कॉलेजों को सत्र-2020-21 के ऑनाइन एफिलिएशन के लिए आवेदन करने को कहा है जबकि यह सत्र बीत चुका है। ऐसे में विवि को आगामी सत्र के लिए एफिलिएशन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए, जो नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने से पहले जो कॉलेज विवि से संबद्ध है, उनकी संबद्धता आज तक बरकरार चली आ रही है। ऐसे में हर सत्र में संबद्धता के लिए आवेदन मांगा जाना औचित्यपूर्ण नहीं है। इसके खिलाफ कई कॉलेजों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने विवि से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। बैठक में निर्णय लिया गया कि अन्य सभी समस्याओं का विवि समाधान नहीं निकालता है तो वे हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। सभी संचालकों ने छात्र एवं कॉलेज हित में मिलकर लड़ाई लड़ने की बात कही। बैठक में पारस कौशिक, मनन अग्रवाल, लक्सर नगरपालिका चेयरमैन अंबरीष गर्ग, दीपक जैन, जलज गौड़, संदीप चौधरी, प्रमोद अग्रवाल, अजयपाल सिंह रावत, विजय सैनी, रजनीश कुमार मौजूद रहे।
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बुधवार को एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट उत्तराखंड की ओर से आयोजित बैठक में देहरादून, कोटद्वार और हरिद्वार जिले के 25 कॉलेज संचालकों ने हिस्सा लिया। बैठक को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से किसी काम की जिम्मेदारी नहीं ली जा रही है। इसके चलते छात्रों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारी एक-दूसरे पर निर्णय की जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं। ताजा प्रकरण में यूनिवर्सिटी ने कैंपस के बीएड कॉलेज की काउंसिलिंग करा ली है जबकि संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। इसके चलते वर्तमान शैक्षिक सत्र छह महीने लेट हो चुका है। वहीं, समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति के आवेदन के लिए तारीख बढ़ाकर दस जनवरी कर दी है, लेकिन अभी तक एडमिशन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाने के कारण एससी-एसटी और ओबीसी के छात्र छात्रवृत्ति के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
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इसके अलावा विवि ने कॉलेजों को सत्र-2020-21 के ऑनाइन एफिलिएशन के लिए आवेदन करने को कहा है जबकि यह सत्र बीत चुका है। ऐसे में विवि को आगामी सत्र के लिए एफिलिएशन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए, जो नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने से पहले जो कॉलेज विवि से संबद्ध है, उनकी संबद्धता आज तक बरकरार चली आ रही है। ऐसे में हर सत्र में संबद्धता के लिए आवेदन मांगा जाना औचित्यपूर्ण नहीं है। इसके खिलाफ कई कॉलेजों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने विवि से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। बैठक में निर्णय लिया गया कि अन्य सभी समस्याओं का विवि समाधान नहीं निकालता है तो वे हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। सभी संचालकों ने छात्र एवं कॉलेज हित में मिलकर लड़ाई लड़ने की बात कही। बैठक में पारस कौशिक, मनन अग्रवाल, लक्सर नगरपालिका चेयरमैन अंबरीष गर्ग, दीपक जैन, जलज गौड़, संदीप चौधरी, प्रमोद अग्रवाल, अजयपाल सिंह रावत, विजय सैनी, रजनीश कुमार मौजूद रहे।
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