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केंद्र के डेमेज कंट्रोल पर धामी का छक्का
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किसान आंदोलन से डरी केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को खत्म का आगामी चुुनाव में हो रहे नुकसान के खिलाफ डेमेज कंट्रोल किया तो वहीं अब धामी सरकार ने एक साथ 28 रुपये गन्ना मूल्य बढ़ाकर चुनावी पिच पर सिक्सर जड़ दिया है। हालांकि चुनावी परिणाम में धामी सरकार किसानों का कितना रुख अपनी ओर कर पाती है ये तो आने वाला समय ही बताएगा।
गन्ना मूल्य घोषित नहीं होने को लेकर करीब एक माह से जहां प्रदेश सरकार किसानों के टारगेट पर थी, वहीं पूर्व सीएम हरीश रावत ने गन्ना मूल्य की घोषणा में देरी का जमकर फायदा उठाया। उन्होंने लिब्बरहेडी शुगर मिल, लक्सर शुगर मिल और इकबालपुर शुगर मिल पर मोन धारण कर किसानों को साधने की खूब कोशिश की, लेकिन किसानों के चुनावी मैदान में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लंबा सिक्सर लगाने की तैयारी कर रहे थे। सोमवार को जब सरकार ने गन्ना मूल्य घोषित किया तो सभी को चौंका दिया। एक साथ 28 रुपये बढ़ाकर धामी सरकार ने जहां एक ओर किसानों के घावों पर मरहम लगाया तो वहीं विरोधियों के सुर को भी दबाने की कोशिश की। हालांकि यूपी सरकार पहले ही उत्तराखंड में घोषित 355 रुपये प्रति कुंतल के मुकाबले 350 रुपये घोषित कर चुकी है। ऐसे में अब यहां के किसानों को यूपी से पांच रुपये ज्यादा गन्ना मूल्य मिलेगा। यह बात अलग है कि किसान अभी भी ज्यादा भाव की मांग कर रहे हैं। फिलहाल हरिद्वार जिले की कृषि बहुल आठ विधानसभाओं में भाजपा के विधायकों एवं दावेदारों की बांछे खिली हुई है। अब ये देखना महत्वपूर्व होगा कि केंद्र सरकार के फैसले के बाद धामी सरकार की दरियादिली को किसान किस अंदाज में लेते हैं।
मायावती सरकार के बाद अब धामी
एक साथ गन्ना मूल्य बढ़ाए जाने के मामले में अभी तक बसपा सुप्रिमो मायावती का नाम सबसे आगे हैं। 1999 में बतौर यूपी मुख्यमंत्री मायावती ने एक साथ सबसे ज्यादा 40 रुपये गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद किसी दूसरी सरकार ने बड़ा कदम नहीं उठाया। यहां तक कि भाजपा सरकार ने भी पिछले तीन सालों में गन्ना मूल्य में एक रुपया भी नहीं बढ़ाया है। हालांकि अब चुनावी साल में एक साथ ज्यादा मूल्य घोषित करने वाले मुख्यमंत्री धामी की गिनती हो गई है।
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बढ़े रेट से मझोले किसान को सालाना बचेंगे करीब 33 हजार
प्रदेश सरकार ने 28 रुपये गन्ना मूल्य बढ़ाकर किसानों को राहत दी है। किसान 400 रुपये की मांग कर रहे हैं। बढ़ा हुआ गन्ना मूल्य भले ही किसान कम बता रहे हो, लेकिन खराब आर्थिक हालत में खेती कर रहे किसानों के लिए ये बढ़ी हुई रकम बड़ी राहत देगी। हिसाब लगाया जाए तो एक बीघा में पैदा होने वाले औसतन 60 कुंतल गन्ने पर 1680 रुपये का फायदा होगा। 20 बीघा मझोले किसान की बात करें तो ऐसे किसान को सालाना करीब 33 हजार रुपये का फायदा होगा। वहीं ढुलान किराये में कमी का भी किसानों को लाभ होगा।
विधायक ने सीएम का जताया आभार
यूपी से पांच रुपये अधिक गन्ने का मूल्य घोषित किए जाने पर विधायक संजय गुप्ता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि विगत दिनों सुल्तानपुर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उत्तराखंड के किसानों को गन्ना मूल्य उत्तर प्रदेश से अधिक दिए जाने की मांग की थी। उनकी मांग पर मुख्यमंत्री ने सोमवार को उत्तर प्रदेश से पांच रुपये अधिक गन्ना मूल्य दिए जाने की घोषणा की है। गन्ना मूल्य अधिक दिए जाने पर उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया है।
परिचर्चा -
हरियाणा में गन्ने का भाव 365 और पंजाब में 360 रुपये प्रति कुंतल है। किसानों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसेो में 400 रुपये कुंतल से कम गन्ने का भाव किसी कीमत पर मंजूर नहीं है।
-- राकेेश लोहान, जिला प्रवक्ता भाकियू टिकैत
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गन्ना मूल्य घोषित नहीं होने को लेकर करीब एक माह से जहां प्रदेश सरकार किसानों के टारगेट पर थी, वहीं पूर्व सीएम हरीश रावत ने गन्ना मूल्य की घोषणा में देरी का जमकर फायदा उठाया। उन्होंने लिब्बरहेडी शुगर मिल, लक्सर शुगर मिल और इकबालपुर शुगर मिल पर मोन धारण कर किसानों को साधने की खूब कोशिश की, लेकिन किसानों के चुनावी मैदान में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लंबा सिक्सर लगाने की तैयारी कर रहे थे। सोमवार को जब सरकार ने गन्ना मूल्य घोषित किया तो सभी को चौंका दिया। एक साथ 28 रुपये बढ़ाकर धामी सरकार ने जहां एक ओर किसानों के घावों पर मरहम लगाया तो वहीं विरोधियों के सुर को भी दबाने की कोशिश की। हालांकि यूपी सरकार पहले ही उत्तराखंड में घोषित 355 रुपये प्रति कुंतल के मुकाबले 350 रुपये घोषित कर चुकी है। ऐसे में अब यहां के किसानों को यूपी से पांच रुपये ज्यादा गन्ना मूल्य मिलेगा। यह बात अलग है कि किसान अभी भी ज्यादा भाव की मांग कर रहे हैं। फिलहाल हरिद्वार जिले की कृषि बहुल आठ विधानसभाओं में भाजपा के विधायकों एवं दावेदारों की बांछे खिली हुई है। अब ये देखना महत्वपूर्व होगा कि केंद्र सरकार के फैसले के बाद धामी सरकार की दरियादिली को किसान किस अंदाज में लेते हैं।
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मायावती सरकार के बाद अब धामी
एक साथ गन्ना मूल्य बढ़ाए जाने के मामले में अभी तक बसपा सुप्रिमो मायावती का नाम सबसे आगे हैं। 1999 में बतौर यूपी मुख्यमंत्री मायावती ने एक साथ सबसे ज्यादा 40 रुपये गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद किसी दूसरी सरकार ने बड़ा कदम नहीं उठाया। यहां तक कि भाजपा सरकार ने भी पिछले तीन सालों में गन्ना मूल्य में एक रुपया भी नहीं बढ़ाया है। हालांकि अब चुनावी साल में एक साथ ज्यादा मूल्य घोषित करने वाले मुख्यमंत्री धामी की गिनती हो गई है।
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बढ़े रेट से मझोले किसान को सालाना बचेंगे करीब 33 हजार
प्रदेश सरकार ने 28 रुपये गन्ना मूल्य बढ़ाकर किसानों को राहत दी है। किसान 400 रुपये की मांग कर रहे हैं। बढ़ा हुआ गन्ना मूल्य भले ही किसान कम बता रहे हो, लेकिन खराब आर्थिक हालत में खेती कर रहे किसानों के लिए ये बढ़ी हुई रकम बड़ी राहत देगी। हिसाब लगाया जाए तो एक बीघा में पैदा होने वाले औसतन 60 कुंतल गन्ने पर 1680 रुपये का फायदा होगा। 20 बीघा मझोले किसान की बात करें तो ऐसे किसान को सालाना करीब 33 हजार रुपये का फायदा होगा। वहीं ढुलान किराये में कमी का भी किसानों को लाभ होगा।
विधायक ने सीएम का जताया आभार
यूपी से पांच रुपये अधिक गन्ने का मूल्य घोषित किए जाने पर विधायक संजय गुप्ता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि विगत दिनों सुल्तानपुर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उत्तराखंड के किसानों को गन्ना मूल्य उत्तर प्रदेश से अधिक दिए जाने की मांग की थी। उनकी मांग पर मुख्यमंत्री ने सोमवार को उत्तर प्रदेश से पांच रुपये अधिक गन्ना मूल्य दिए जाने की घोषणा की है। गन्ना मूल्य अधिक दिए जाने पर उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया है।
परिचर्चा -
हरियाणा में गन्ने का भाव 365 और पंजाब में 360 रुपये प्रति कुंतल है। किसानों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसेो में 400 रुपये कुंतल से कम गन्ने का भाव किसी कीमत पर मंजूर नहीं है।
-- राकेेश लोहान, जिला प्रवक्ता भाकियू टिकैत