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Roorkee News: दुकान आवंटित नहीं होने से दरगाह को लाखों का नुकसान
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करीब 40 दिन से बंद पड़ी है दरगाह पहाड़ी गेट की प्रसाद की दुकान
दरगाह पहाड़ी गेट की प्रसाद की दुकान का आवंटन नहीं होने से दरगाह को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। टेंडर की शर्तें पूरी नहीं होने के चलते पहाड़ी गेट पर प्रसाद की दुकान करीब 40 दिनों से खाली पड़ी है।
उत्तराखंड वक़्फ बोर्ड के अधीन आने वाली पिरान कलियर की तीन प्रमुख दरगाहों का ज़िम्मा जिला प्रशासन का है। जिलाधिकारी हरिद्वार ने दरगाह की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की को सौंप रखी है। टेंडर का समय पूरा होने के बाद यहां पर ठेकेदार ने 31 जुलाई को दुकान खाली कर दरगाह प्रबंधक के सुपुर्द कर दिया था।
करीब 35 दिन का समय बीत जाने के बाद भी दुकान का आवंटन नही किया गया है। इससे दरगाह को प्रतिदिन 36850 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी का नुकसान रोजाना हो रहा है। वहीं वक़्फ बोर्ड के सीईओ सैय्यद सिराज उस्मान ने बताया कि दुकान के आवंटन के लिए कई बार टेंडर निकाले गए हैं। टेंडर में भाग लेने वाले ठेकेदार, शर्तों को पूर्ण नहीं कर पाए हैं। दुकानें चलाने के लिए दरगाह के कर्मचारी सक्षम नहीं हैं। शर्तों को पूर्ण होने पर दुकान का आवंटन कर दिया जाएगा।
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दरगाह पहाड़ी गेट की प्रसाद की दुकान का आवंटन नहीं होने से दरगाह को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। टेंडर की शर्तें पूरी नहीं होने के चलते पहाड़ी गेट पर प्रसाद की दुकान करीब 40 दिनों से खाली पड़ी है।
उत्तराखंड वक़्फ बोर्ड के अधीन आने वाली पिरान कलियर की तीन प्रमुख दरगाहों का ज़िम्मा जिला प्रशासन का है। जिलाधिकारी हरिद्वार ने दरगाह की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की को सौंप रखी है। टेंडर का समय पूरा होने के बाद यहां पर ठेकेदार ने 31 जुलाई को दुकान खाली कर दरगाह प्रबंधक के सुपुर्द कर दिया था।
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करीब 35 दिन का समय बीत जाने के बाद भी दुकान का आवंटन नही किया गया है। इससे दरगाह को प्रतिदिन 36850 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी का नुकसान रोजाना हो रहा है। वहीं वक़्फ बोर्ड के सीईओ सैय्यद सिराज उस्मान ने बताया कि दुकान के आवंटन के लिए कई बार टेंडर निकाले गए हैं। टेंडर में भाग लेने वाले ठेकेदार, शर्तों को पूर्ण नहीं कर पाए हैं। दुकानें चलाने के लिए दरगाह के कर्मचारी सक्षम नहीं हैं। शर्तों को पूर्ण होने पर दुकान का आवंटन कर दिया जाएगा।
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