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ठेकेदारों से पैसा वसूलने में नाकाम रहा दरगाह प्रबंधन
अमर उजाला ब्यूरो पिरान कलियर
Updated Sun, 05 Mar 2017 10:18 PM IST
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दरगाह साबिर पाक के वार्षिक ठेकों की नीलामी इस माह होने वाली है लेकिन अभी तक ठेकेदारों पर दरगाह की रकम बकाया है। दरगाह प्रशासन ठेकेदारों से पैसा वसूलने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। अब आने वाले मार्च महीने में दरगाह प्रशासन बकायेदारों पर क्या कार्रवाई करता है ये देखने वाली बात होगी।
गौरतलब है कि दरगाह के सभी ठेकों की मार्च में वक्फ बोर्ड मुख्य पालक अधिकारी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की, तहसीलदार व अन्य विभागों के अधिकारियों की देखरेख में नीलामी की जाती है। विगत वर्ष हुई नीलामी की लिखित शर्त यह थी कि प्रत्येक ठेके की आधी रकम तुरंत बाकी रकम एक माह के अंदर अंतिम बोलीदाता को दरगाह कार्यालय में जमा करानी होती है, नहीं तो दरगाह प्रशासन को जमा धनराशि जब्त करने सहित ठेका निरस्त कर दिया जाएगा और दोबारा से ठेके छोड़ दिए जाएंगे। लेकिन दरगाह प्रबंधतंत्र की हीलाहवाली से ठेकेदारों द्वारा शर्तों एवं नियमों का की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
पूरा साल बीत जाने पर भी दरगाह कार्यालय का करोड़ों रुपया जमा नहीं किया गया। कुछ ठेकेदारों को छोड़कर ठेकेदारों ने इस वर्ष के वार्षिक ठेकों का करोड़ों रुपये बकाया जमा नहीं कराया गया जबकि इसी माह वार्षिक ठेकों की नीलामी होनी है। दरगाह प्रशासन के बकाया वसूलने के लिए कोई कदम नहीं उठाता है जिससे ठेकेदार अपने परिवार के सदस्यों के नाम ठेके ले लेते हैं लेकिन सवाल दरगाह प्रबंधन तंत्र पर भी उठने लाजमी है। शर्तों के अनुसार अगर दरगाह प्रशासन ने कार्रवाई की होती तो दरगाह को समय रहते राजस्व प्राप्त होता। लेकिन दरगाह प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नही दे रहा है। इस संबंध में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अहमद अली का कहना है कि बकायेदार ठेकेदारों को दरगाह के वार्षिक ठेकों की बकाया धनराशि जमा कराने के आदेश प्रबंधक को दिए गए हैं फिर भी यदि बकाया राशि जमा नहीं की गयी तो नोटिस देकर उनकी आरसी काट कर तहसील भेजकर रिकवरी करने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
गौरतलब है कि दरगाह के सभी ठेकों की मार्च में वक्फ बोर्ड मुख्य पालक अधिकारी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की, तहसीलदार व अन्य विभागों के अधिकारियों की देखरेख में नीलामी की जाती है। विगत वर्ष हुई नीलामी की लिखित शर्त यह थी कि प्रत्येक ठेके की आधी रकम तुरंत बाकी रकम एक माह के अंदर अंतिम बोलीदाता को दरगाह कार्यालय में जमा करानी होती है, नहीं तो दरगाह प्रशासन को जमा धनराशि जब्त करने सहित ठेका निरस्त कर दिया जाएगा और दोबारा से ठेके छोड़ दिए जाएंगे। लेकिन दरगाह प्रबंधतंत्र की हीलाहवाली से ठेकेदारों द्वारा शर्तों एवं नियमों का की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
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पूरा साल बीत जाने पर भी दरगाह कार्यालय का करोड़ों रुपया जमा नहीं किया गया। कुछ ठेकेदारों को छोड़कर ठेकेदारों ने इस वर्ष के वार्षिक ठेकों का करोड़ों रुपये बकाया जमा नहीं कराया गया जबकि इसी माह वार्षिक ठेकों की नीलामी होनी है। दरगाह प्रशासन के बकाया वसूलने के लिए कोई कदम नहीं उठाता है जिससे ठेकेदार अपने परिवार के सदस्यों के नाम ठेके ले लेते हैं लेकिन सवाल दरगाह प्रबंधन तंत्र पर भी उठने लाजमी है। शर्तों के अनुसार अगर दरगाह प्रशासन ने कार्रवाई की होती तो दरगाह को समय रहते राजस्व प्राप्त होता। लेकिन दरगाह प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नही दे रहा है। इस संबंध में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अहमद अली का कहना है कि बकायेदार ठेकेदारों को दरगाह के वार्षिक ठेकों की बकाया धनराशि जमा कराने के आदेश प्रबंधक को दिए गए हैं फिर भी यदि बकाया राशि जमा नहीं की गयी तो नोटिस देकर उनकी आरसी काट कर तहसील भेजकर रिकवरी करने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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