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बाढ़ से तटबंध ध्वस्त, फंसे 57 किसानों को रेस्क्यू कर निकाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
खानपुर (रुड़की)। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के चलते गंगा और उसकी सहायक नदियां उफान पर आ गई हैं। बालावाली से लेकर उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला तक तीन जगह ध्वस्त पड़े तटबंध से बाढ़ का पानी खानपुर क्षेत्र में फैलना शुरू हो गया है। क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांवों की 12 हजार बीघा कृषि भूमि पर बाढ़ का पानी भर गया है। बाढ़ के कारण उत्तराखंड के कलसिया, उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला, हिम्मतपुर बेला गांव का लक्सर और बिजनौर तहसील मुख्यालय के साथ ही खानपुर ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क कट गया है।
खानपुर क्षेत्र में दो दिनों से गंगा लगातार चेतावनी निशान के आसपास बह रही थी। वहीं, शनिवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान (294 मीटर) से ऊपर पहुंचने पर अलर्ट जारी किया गया था। इस बीच मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रहने से गंगा की सहायक नदी बाणगंगा नदी भी उफान पर आ गई और तटबंध को तोड़ दिया। क्षेत्र के संदीप कंबोज, मदन सिंह राठी, कर्म सिंह ने बताया कि बाढ़ का पानी कृषि भूमि पर फैल गया है। कलसिया, बालावाली, डुमनपुरी, पोडोवाली, डेरियो, बादशाहपुर, मोहनावाला, खानपुर, इदरीशपुर, शेरपुर बेला, चंद्रपुरी खुर्द, चंद्रपुरी कला, नाईवाला, दल्लावाला, माडाबेला और उत्तर प्रदेश के रामसहारवाला व हिम्मतपुर बेला गांव की लगभग 12 हजार बीघा कृषि भूमि पर खड़ी गन्ने और पशुओं के चारे की फसल जलमग्न हो गई है। वहीं, रामसहायवाला के पूर्व प्रधान श्यामलाल, ग्रामीण जयकुमार, कलसिया के निवर्तमान प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने बताया कि उनके गांव का संपर्क तहसील मुख्यालय से कटा हुआ है। वे न तो बाहर जा सकते हैं और न कोई पैदल गांव आ सकता है। वहीं, रविवार को दोपहर 12 बजे गंगा का जलस्तर घटकर चेतावनी निशान (292.95 मीटर) से नीचे आने पर लोगों ने राहत की सांस ली।
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गंगा और बाणगंगा नदी के बीच फंसों 57 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। दोपहर बाद गंगा का जलस्तर भी चेतावनी निशान ने नीचे आ गया था। फिर भी सभी बाढ़ चौकियों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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-शैलेंद्र सिंह नेगी, एसडीएम लक्सर
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सिंचाई विभाग कर रहा तटबंध की मरम्मत का दावा
पूरे साल बजट का बहाना बनाकर कागजों का पेट भरने वाला सिंचाई विभाग शेरपुर बेला गांव के पास ध्वस्त हुए बाणगंगा नदी के तटबंध की मरम्मत का दावा कर रहा है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बरसात के मौसम में मरम्मत के लिए बजट और मरम्मत सामग्री कैसे जुटाई जाएगी। वहीं, सिंचाई विभाग के ईई डीके सिंह का कहना है कि बाणगंगा नदी के ध्वस्त हुए तटबंध की मरम्मत का काम शुरू करा दिया गया है।
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तहसील प्रशासन ने इन्हें बचाया
विनोद कुमार, सतपाल, विक्रम, पोपिन, अंकित, प्रकाश, कन्नू, अनिल, आशु, लोकेंद्र, गिरधारी, शौकीन, सुमन पाल, पवन, ललिता, रविंदर, तिलक, मेनपाल, घसीटा, आदेश, मुकेश, मेघराज, नूरजहां, जरीला, जरीला, शौकीना, शहजारी, अमजद, शकील, गुफरान, सादिक, सचिन, सुहाना, इकरार, उमर, तहसीना, नबीला, रईसा, शमशेर, इमराना, सुभाना, शबीना, सोफिया, अफसाना, जोमा, अयान, शहजारी, पितंबर, जितेंद्र, संतराम, लाखन, ईश्वर चंद, शेर सिंह, सुभाष, शिव कुमार, बलविंदर, रवि आदि।
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खानपुर (रुड़की)। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के चलते गंगा और उसकी सहायक नदियां उफान पर आ गई हैं। बालावाली से लेकर उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला तक तीन जगह ध्वस्त पड़े तटबंध से बाढ़ का पानी खानपुर क्षेत्र में फैलना शुरू हो गया है। क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांवों की 12 हजार बीघा कृषि भूमि पर बाढ़ का पानी भर गया है। बाढ़ के कारण उत्तराखंड के कलसिया, उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला, हिम्मतपुर बेला गांव का लक्सर और बिजनौर तहसील मुख्यालय के साथ ही खानपुर ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क कट गया है।
खानपुर क्षेत्र में दो दिनों से गंगा लगातार चेतावनी निशान के आसपास बह रही थी। वहीं, शनिवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान (294 मीटर) से ऊपर पहुंचने पर अलर्ट जारी किया गया था। इस बीच मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रहने से गंगा की सहायक नदी बाणगंगा नदी भी उफान पर आ गई और तटबंध को तोड़ दिया। क्षेत्र के संदीप कंबोज, मदन सिंह राठी, कर्म सिंह ने बताया कि बाढ़ का पानी कृषि भूमि पर फैल गया है। कलसिया, बालावाली, डुमनपुरी, पोडोवाली, डेरियो, बादशाहपुर, मोहनावाला, खानपुर, इदरीशपुर, शेरपुर बेला, चंद्रपुरी खुर्द, चंद्रपुरी कला, नाईवाला, दल्लावाला, माडाबेला और उत्तर प्रदेश के रामसहारवाला व हिम्मतपुर बेला गांव की लगभग 12 हजार बीघा कृषि भूमि पर खड़ी गन्ने और पशुओं के चारे की फसल जलमग्न हो गई है। वहीं, रामसहायवाला के पूर्व प्रधान श्यामलाल, ग्रामीण जयकुमार, कलसिया के निवर्तमान प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने बताया कि उनके गांव का संपर्क तहसील मुख्यालय से कटा हुआ है। वे न तो बाहर जा सकते हैं और न कोई पैदल गांव आ सकता है। वहीं, रविवार को दोपहर 12 बजे गंगा का जलस्तर घटकर चेतावनी निशान (292.95 मीटर) से नीचे आने पर लोगों ने राहत की सांस ली।
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गंगा और बाणगंगा नदी के बीच फंसों 57 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। दोपहर बाद गंगा का जलस्तर भी चेतावनी निशान ने नीचे आ गया था। फिर भी सभी बाढ़ चौकियों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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-शैलेंद्र सिंह नेगी, एसडीएम लक्सर
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सिंचाई विभाग कर रहा तटबंध की मरम्मत का दावा
पूरे साल बजट का बहाना बनाकर कागजों का पेट भरने वाला सिंचाई विभाग शेरपुर बेला गांव के पास ध्वस्त हुए बाणगंगा नदी के तटबंध की मरम्मत का दावा कर रहा है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बरसात के मौसम में मरम्मत के लिए बजट और मरम्मत सामग्री कैसे जुटाई जाएगी। वहीं, सिंचाई विभाग के ईई डीके सिंह का कहना है कि बाणगंगा नदी के ध्वस्त हुए तटबंध की मरम्मत का काम शुरू करा दिया गया है।
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तहसील प्रशासन ने इन्हें बचाया
विनोद कुमार, सतपाल, विक्रम, पोपिन, अंकित, प्रकाश, कन्नू, अनिल, आशु, लोकेंद्र, गिरधारी, शौकीन, सुमन पाल, पवन, ललिता, रविंदर, तिलक, मेनपाल, घसीटा, आदेश, मुकेश, मेघराज, नूरजहां, जरीला, जरीला, शौकीना, शहजारी, अमजद, शकील, गुफरान, सादिक, सचिन, सुहाना, इकरार, उमर, तहसीना, नबीला, रईसा, शमशेर, इमराना, सुभाना, शबीना, सोफिया, अफसाना, जोमा, अयान, शहजारी, पितंबर, जितेंद्र, संतराम, लाखन, ईश्वर चंद, शेर सिंह, सुभाष, शिव कुमार, बलविंदर, रवि आदि।