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Roorkee News: अटका जर्जर विद्यालय के निर्माण का काम, जोखिम में बच्चों की जान
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छह माह से आया हुआ है नये भवन के लिए बजट, विद्यालय में पढ़ते हैं 120 बच्चे
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पड़ाव के निर्माण का काम छह माह से अटका पड़ा है। एनओसी न मिलने से बजट आने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। यह विद्यालय राजकीय प्राथमिक विद्यालय के जर्जर भवन में संचालित है। जर्जर भवन के कारण बच्चों की जान भी जोखिम में है।
पुरानी तहसील के पड़ाव में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय है। विद्यालय में करीब 120 बच्चे अध्ययनरत हैं। भवन जर्जर होकर गिर चुका है। इसके चलते यह विद्यालय वहीं स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में संचालित है। यह भवन भी जर्जर हो चुका है। छत से आए दिन प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। इसके चलते विभाग ने स्कूल के नये भवन के लिए मार्च में बजट जारी किया था।
करीब 10 लाख रुपये की किस्त भी जारी कर दी गई थी। भवन के लिए नगर निगम की एनओसी की जरूरत है। एनओसी न मिलने के कारण भवन का निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। विद्यालय की प्रधानाध्यापक शिखा गोयल ने बताया कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय के जिस भवन में उनका विद्यालय संचालित है। वह पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। छत से कई बार प्लास्टर टूटकर गिर चुका है।
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गनीमत रही कि इससे कोई हादसा नहीं हुआ है। इसके अलावा विद्यालय का भवन काफी गहराई है। इसके कारण बरसात के समय विद्यालय के कमरों में पानी भर जाता है। इससे काफी परेशानी होती है। विद्यालय के निर्माण के लिए बजट आया हुआ है। नगर निगम की भूमि पर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन बना हुआ था। भवन के पुन: निर्माण के लिए निगम से एनओसी की जरूरत है। निगम अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने एनओसी के लिए निदेशालय को लिखा है लेकिन अब तक एनओसी नहीं मिल पाई है। इसके कारण उन्हें जर्जर विद्यालय भवन में ही बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है। भवन के जर्जर होने के कारण हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है।
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राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पड़ाव के निर्माण का काम छह माह से अटका पड़ा है। एनओसी न मिलने से बजट आने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। यह विद्यालय राजकीय प्राथमिक विद्यालय के जर्जर भवन में संचालित है। जर्जर भवन के कारण बच्चों की जान भी जोखिम में है।
पुरानी तहसील के पड़ाव में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय है। विद्यालय में करीब 120 बच्चे अध्ययनरत हैं। भवन जर्जर होकर गिर चुका है। इसके चलते यह विद्यालय वहीं स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में संचालित है। यह भवन भी जर्जर हो चुका है। छत से आए दिन प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। इसके चलते विभाग ने स्कूल के नये भवन के लिए मार्च में बजट जारी किया था।
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करीब 10 लाख रुपये की किस्त भी जारी कर दी गई थी। भवन के लिए नगर निगम की एनओसी की जरूरत है। एनओसी न मिलने के कारण भवन का निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। विद्यालय की प्रधानाध्यापक शिखा गोयल ने बताया कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय के जिस भवन में उनका विद्यालय संचालित है। वह पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। छत से कई बार प्लास्टर टूटकर गिर चुका है।
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गनीमत रही कि इससे कोई हादसा नहीं हुआ है। इसके अलावा विद्यालय का भवन काफी गहराई है। इसके कारण बरसात के समय विद्यालय के कमरों में पानी भर जाता है। इससे काफी परेशानी होती है। विद्यालय के निर्माण के लिए बजट आया हुआ है। नगर निगम की भूमि पर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन बना हुआ था। भवन के पुन: निर्माण के लिए निगम से एनओसी की जरूरत है। निगम अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने एनओसी के लिए निदेशालय को लिखा है लेकिन अब तक एनओसी नहीं मिल पाई है। इसके कारण उन्हें जर्जर विद्यालय भवन में ही बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है। भवन के जर्जर होने के कारण हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है।