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औंधे मुंह गिरा अविश्वास प्रस्ताव
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की
Updated Thu, 11 Aug 2016 12:01 AM IST
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रुड़की। डीसीबी (जिला सहकारी बैंक) के अध्यक्ष सुशील चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव औधे मुंह गिरा है। 14 में से आठ निदेशकों ने डीएम के समक्ष पेश होकर अविश्वास प्रस्ताव को फर्जी करार दिया है। ऐसे मेंअब सुशील चौधरी के ही चेयरमैन बने रहने का रास्ता भी साफ हो गया है।
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पिछले सप्ताह डीसीबी के 14 डायरेक्टरों में से 12 ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर चेयरमैन सुशील चौधरी को हटाने की मंाग की थी। इस संबंध में पांच अगस्त को इन सभी डायरेक्टरों ने डीएम हरबंश सिंह चुघ को अविश्वास का प्रस्ताव पत्र सौंपा था। अविश्वास प्रस्ताव आने पर चेयरमैन सुशील चौधरी के होश फाख्ता हो गए थे, लेकिन इसी बीच चेयरमैन एवं विधायक प्रस्ताव को गिराने के लिए एड़ी चोटी के जोर लगा रही थीं, जबकि विरोधी खेमा भी सुशील चौधरी को हटाने के लिए खूब जोर आजमाइश कर रहा था। बुधवार को 14 में से आठ निदेशक चेयरमैन सुशील चौधरी के साथ डीएम हरबंश सिंह चुघ के सामने पेश हुए।
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इन्होंने डीएम को बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं है। वह सुशील चौधरी के साथ हैं। इस पर डीएम ने फिलहाल अविश्वास प्रस्ताव पर कोई भी निर्णय लेने से इंकार कर दिया है। इससे सुशील चौधरी की कुर्सी बच गई है। डीएम हरबंश सिंह चुघ ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव का प्रार्थना पत्र आया था, लेकिन बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव देने वाले आठ सदस्यों उनके समक्ष काउंटर दाखिल कर बताया कि वह सुशील चौधरी के साथ हैं। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर कोई निर्णय लेने की बजाए यह मामला यहीं पर खत्म हो जाता है।
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भाभी ने दिया देवर को बड़ा झटका
रुड़की। राजनीतिक विरासत को लेकर भगवानपुर में चल रही देवर-भाभी की लड़ाई में सुबोध राकेश को भी अविश्वास प्रस्ताव धड़ाम होने से झटका लगा है। बताया जा रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव के असल सूत्रधार सुबोध राकेश ही थे।
दिवंगत मंत्री सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद उनकी पत्नी ममता राकेश कांग्रेस के टिकट पर भगवानपुर से विधायक बनी थीं, जबकि सुबोध राकेश भी भाई की राजनीतिक विरासत लेकर सियासी मैदान में उतरना चाहते थे। कांग्रेस हाईकमान की ओर से ममता को ही टिकट देने से सुबोध चुनाव नहीं लड़ सके थे। ममता के विधायक बनने के बाद कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीक-ठाक चलता रहा, लेकिन अब उनके बीच राजनीतिक खाइयां बढ़ने लगी हैं।
चेयरमैन सुशील चौधरी के ममता के समर्थन में रहने से विस चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे सुबोध को यह रास नहीं आया। चुनाव की तैयारियों में रोड़ा बन रहे सुशील चौधरी को हटाने के लिए सुबोध अविश्वास प्रस्ताव डीएम को सौंपने में सफल भी हो गए, लेकिन ममता राकेश की ताकत के आगे सुबोध राकेश का प्रस्ताव जमीन सूंघ गया।
कोट-
सुशील चौधरी को मंत्री जी (दिवंगत सुरेंद्र राकेश) ने चेयरमैन की कुर्सी पर बैठाया था। इसलिए यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी। अब सुबोध राकेश ने ऐसा क्यों किया, यह वही बता सकते हैं।-ममता राकेश, विधायक भगवानपुर