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इस रक्षाबंधन पर बेहद खास बन रहे संयोग
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इस रक्षाबंधन पर बेहद खास बन रहे संयोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 29 साल बाद बना ऐसा सुखद योग
सुबह 9:28 मिनट तक रहेगी भद्रा, इसके बाद मनाए त्योहार
संवाद न्यूज एजेंसी
रुड़की/हरिद्वार। रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म पर्व सोमवार को मनाए जाएंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार इस बार भाई और बहनों के लिए बेहद खास होने वाला है। क्योंकि इस साल रक्षाबंधन पर दो शुभ सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान के संयोग बन रहे हैं। रक्षाबंधन पर ऐसा शुभ संयोग 29 साल बाद आने वाला है। वहीं इस साल भद्रा और ग्रहण का साया भी रक्षाबंधन पर नहीं पड़ रहा है।
ज्योतिषाचार्य रामगोपाल पाराशर ने बताया कि इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान योग के साथ ही सूर्य शनि के सम सप्तक योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग बन रहा है। इससे पहले यह संयोग 1991 में बना था। इस संयोग को कृषि क्षेत्र के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। रक्षाबंधन से पहले 2 अगस्त को रात्रि 8 बजकर 43 मिनट से 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक भद्रा रहेगी। इसके बाद किसी भी समय बहनें अपने भाई को राखी बांध सकती हैं। वहीं ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि ब्राह्मणों का मुख्य त्योहार उपाकर्म है। इस दिन प्रत्येक ब्राह्मण पूरे वर्ष में किए गए ज्ञात अज्ञात पापों का शमन करते हुए समाज की रक्षा के लिए रक्षा सूत्र का निर्माण करता है। ब्राह्मण समाज ने सबसे कठिन समय अपने लिए ही चुना है। बताया कि इस बार रक्षाबंधन सोमवार के दिन सूर्य के नक्षत्र में आएगी। इस दिन भद्रा सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक होगी। उन्होंने बताया कि इस बार उत्तराखंड में दोपहर 11.59 से 12.47 तक अभिजीत योग रहेगा। इसमें रक्षा सूत्र बांधना बहुत शुभ होगा, जो लोग जल्द राखी बांधना चाहते हैं वे सुबह 9.30 से 10.43 तक भी शुभ की चौघड़िया में रक्षा सूत्र बांध सकते हैं। हालांकि उदयकाल की पूर्णिमा के चलते यह पर्व सुविधा के अनुसार किसी भी समय मनाया जा सकता है।
अटूट रिश्ते का इतिहास
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिशुपाल राजा का वध करते समय भगवान श्रीकृष्ण के बाएं हाथ से खून बहने लगा तो द्रोपदी ने तत्काल अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनके हाथ की अंगुली पर बांध दिया। तभी से भगवान कृष्ण द्रोपदी को अपनी बहन मानने लगे और सालों के बाद जब पांडवों ने द्रोपदी को जुए में हरा दिया और भरी सभा में द्रोपदी का चीरहरण किया गया तो भगवान कृष्ण ने भाई का फर्ज निभाते हुए उसकी लाज बचाई थी। मान्यता है कि तभी से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाने लगा, जो आज भी जारी है। श्रावण मास की पूर्णिमा को भाई बहन के प्यार का त्योहार रक्षाबंधन मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण की बहन ने भद्रा में उन्हें रक्षा सूत्र बांधा था, जिससे रावण का सर्वनाश हो गया था।
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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 29 साल बाद बना ऐसा सुखद योग
सुबह 9:28 मिनट तक रहेगी भद्रा, इसके बाद मनाए त्योहार
संवाद न्यूज एजेंसी
रुड़की/हरिद्वार। रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म पर्व सोमवार को मनाए जाएंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार इस बार भाई और बहनों के लिए बेहद खास होने वाला है। क्योंकि इस साल रक्षाबंधन पर दो शुभ सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान के संयोग बन रहे हैं। रक्षाबंधन पर ऐसा शुभ संयोग 29 साल बाद आने वाला है। वहीं इस साल भद्रा और ग्रहण का साया भी रक्षाबंधन पर नहीं पड़ रहा है।
ज्योतिषाचार्य रामगोपाल पाराशर ने बताया कि इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान योग के साथ ही सूर्य शनि के सम सप्तक योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग बन रहा है। इससे पहले यह संयोग 1991 में बना था। इस संयोग को कृषि क्षेत्र के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। रक्षाबंधन से पहले 2 अगस्त को रात्रि 8 बजकर 43 मिनट से 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक भद्रा रहेगी। इसके बाद किसी भी समय बहनें अपने भाई को राखी बांध सकती हैं। वहीं ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि ब्राह्मणों का मुख्य त्योहार उपाकर्म है। इस दिन प्रत्येक ब्राह्मण पूरे वर्ष में किए गए ज्ञात अज्ञात पापों का शमन करते हुए समाज की रक्षा के लिए रक्षा सूत्र का निर्माण करता है। ब्राह्मण समाज ने सबसे कठिन समय अपने लिए ही चुना है। बताया कि इस बार रक्षाबंधन सोमवार के दिन सूर्य के नक्षत्र में आएगी। इस दिन भद्रा सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक होगी। उन्होंने बताया कि इस बार उत्तराखंड में दोपहर 11.59 से 12.47 तक अभिजीत योग रहेगा। इसमें रक्षा सूत्र बांधना बहुत शुभ होगा, जो लोग जल्द राखी बांधना चाहते हैं वे सुबह 9.30 से 10.43 तक भी शुभ की चौघड़िया में रक्षा सूत्र बांध सकते हैं। हालांकि उदयकाल की पूर्णिमा के चलते यह पर्व सुविधा के अनुसार किसी भी समय मनाया जा सकता है।
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अटूट रिश्ते का इतिहास
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिशुपाल राजा का वध करते समय भगवान श्रीकृष्ण के बाएं हाथ से खून बहने लगा तो द्रोपदी ने तत्काल अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनके हाथ की अंगुली पर बांध दिया। तभी से भगवान कृष्ण द्रोपदी को अपनी बहन मानने लगे और सालों के बाद जब पांडवों ने द्रोपदी को जुए में हरा दिया और भरी सभा में द्रोपदी का चीरहरण किया गया तो भगवान कृष्ण ने भाई का फर्ज निभाते हुए उसकी लाज बचाई थी। मान्यता है कि तभी से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाने लगा, जो आज भी जारी है। श्रावण मास की पूर्णिमा को भाई बहन के प्यार का त्योहार रक्षाबंधन मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण की बहन ने भद्रा में उन्हें रक्षा सूत्र बांधा था, जिससे रावण का सर्वनाश हो गया था।
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