{"_id":"63728d4f4cf55c6f915070cd","slug":"chikungunya-and-typhoid-now-caught-with-dengue-roorkee-news-drn428165582","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेंगू के साथ अब चिकनगुनिया और टाइफाइड ने जकड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेंगू के साथ अब चिकनगुनिया और टाइफाइड ने जकड़ा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस समय शहर से लेकर देहात तक डेंगू के साथ ही चिकनगुनिया और टाइफाइड से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। आए दिन अस्पताल में चार से पांच लोग इन बुखारों से पीड़ित मरीज भर्ती भी हो रहे हैं। स्थिति यह है कि रोजाना अस्पताल में ओपीडी में 500 मरीजों में से 200 से अधिक बुखार के मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं अस्पताल में खांसी और जुकाम से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।
दीपावली से पहले जहां मौसम में गुनगुनी ठंडक महसूस हो रही थी, वहीं दीपावली के बाद से गुनगुनी ठंडक धीरे-धीरे ठंड में बदल गई है। दिन के समय तेज धूप के कारण लोग गर्म कपड़े पहनने से अभी परहेज कर रहे हैं। जबकि रात में ठंड होने लगी है। यही कारण है कि लोग ठंड की चपेट में आ रहे हैं। वहीं ये सीजन इस समय डेंगू का चल रहा है। इसलिए शहर से लेकर देहात तक डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही शहर में अब चिकनगुनिया के साथ ही टाइफाइड बुखार से पीड़ित मरीज भी मिलने लगे हैं। सिविल अस्पताल में ही आए दिन करीब 500 की ओपीडी होती है। इसमें करीब 200 मरीज बुखार से पीड़ित पहुंच रहे हैं। जांच के बाद अधिकतर में वायरल फीवर निकलता है तो कुछ में डेंगू, चिकनगुनिया और टाइफाइड के की पुष्टि हो रही है।
इस समय अधिकतर मरीज बुखार से पीड़ित आ रहे हैं। इसमें डेंगू के ही चार से पांच मरीज मिल रहे हैं। जरूरत महसूस होने पर इन्हें भर्ती भी किया जा रहा है। इसके अलावा टाइफाइड और चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि तीनों ही बुखार से बचने के लिए लोगों को सावधानियां बरतनी जरूरी है।
विज्ञापन
-- डॉ. नितिश शर्मा, फिजिशियन, सिविल अस्पताल रुड़की
क्या बरते सावधानियां
- डेंगू के मरीज को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए। कूलर में पानी रोज बदलते रहे या उसमें कीटनाशक दवाएं डाले। मच्छरों से बचने के लिए या तो कीटनाशक दवाएं छिड़कें या मच्छरदानी लगाकर सोए। डेंगू होने पर नारियल पानी, नींबू पानी, सब्जी का रस जरूर पिलाएं। थोड़ी भी दिक्कत बढ़ने पर स्वयं दवा लेने के बजाए तुरंत डॉक्टर के पास जाकर सलाह लें।
टाइफाइड: टाइफाइड होने पर एंटी बायोटिक्स जैसे सिप्रोफ्लैक्सिन और सेफ्ट्रिएक्जोन ले सकते हैं। इससे पीड़ित लोगों को बेहद हलका और संतुलित भोजन लेना चाहिए। टाइफाइड होने पर आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। टाइफाइड में वजन काफी कम हो जाता है। इसलिए कैलोरी से भरपूर आहार के सेवन से वजन फिर से बढ़ा सकते हैं। इसमें रोटी, केला, उबला हुआ आलू अधिक खाएं। तरल पदार्थ अधिक लें।
चिकनगुनिया: चिकनगुनिया होने पर जोड़ों और मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द होता है। त्वचा पर लाल चक्कते हो जाते हैं। सर दर्द और चक्कर के साथ ही हाथ-पैर की उंगलियां ठंडी पड़ जाती है। चिकनगुनिया एक बार होने पर चार से 12 दिन तक रहता है और इस दौरान हड्डियों, मांसपेशियों और त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इसके मरीजों को आराम करना चाहिए और खूब सारा पानी पीना चाहिए। वैसे तो इसकी कोई दवा न होने के कारण कोई इलाज नहीं है। ऐसे में मरीज का मच्छरों से बचाव करना जरूरी है।
विज्ञापन
दीपावली से पहले जहां मौसम में गुनगुनी ठंडक महसूस हो रही थी, वहीं दीपावली के बाद से गुनगुनी ठंडक धीरे-धीरे ठंड में बदल गई है। दिन के समय तेज धूप के कारण लोग गर्म कपड़े पहनने से अभी परहेज कर रहे हैं। जबकि रात में ठंड होने लगी है। यही कारण है कि लोग ठंड की चपेट में आ रहे हैं। वहीं ये सीजन इस समय डेंगू का चल रहा है। इसलिए शहर से लेकर देहात तक डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही शहर में अब चिकनगुनिया के साथ ही टाइफाइड बुखार से पीड़ित मरीज भी मिलने लगे हैं। सिविल अस्पताल में ही आए दिन करीब 500 की ओपीडी होती है। इसमें करीब 200 मरीज बुखार से पीड़ित पहुंच रहे हैं। जांच के बाद अधिकतर में वायरल फीवर निकलता है तो कुछ में डेंगू, चिकनगुनिया और टाइफाइड के की पुष्टि हो रही है।
विज्ञापन
इस समय अधिकतर मरीज बुखार से पीड़ित आ रहे हैं। इसमें डेंगू के ही चार से पांच मरीज मिल रहे हैं। जरूरत महसूस होने पर इन्हें भर्ती भी किया जा रहा है। इसके अलावा टाइफाइड और चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि तीनों ही बुखार से बचने के लिए लोगों को सावधानियां बरतनी जरूरी है।
विज्ञापन
-- डॉ. नितिश शर्मा, फिजिशियन, सिविल अस्पताल रुड़की
क्या बरते सावधानियां
- डेंगू के मरीज को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए। कूलर में पानी रोज बदलते रहे या उसमें कीटनाशक दवाएं डाले। मच्छरों से बचने के लिए या तो कीटनाशक दवाएं छिड़कें या मच्छरदानी लगाकर सोए। डेंगू होने पर नारियल पानी, नींबू पानी, सब्जी का रस जरूर पिलाएं। थोड़ी भी दिक्कत बढ़ने पर स्वयं दवा लेने के बजाए तुरंत डॉक्टर के पास जाकर सलाह लें।
टाइफाइड: टाइफाइड होने पर एंटी बायोटिक्स जैसे सिप्रोफ्लैक्सिन और सेफ्ट्रिएक्जोन ले सकते हैं। इससे पीड़ित लोगों को बेहद हलका और संतुलित भोजन लेना चाहिए। टाइफाइड होने पर आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। टाइफाइड में वजन काफी कम हो जाता है। इसलिए कैलोरी से भरपूर आहार के सेवन से वजन फिर से बढ़ा सकते हैं। इसमें रोटी, केला, उबला हुआ आलू अधिक खाएं। तरल पदार्थ अधिक लें।
चिकनगुनिया: चिकनगुनिया होने पर जोड़ों और मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द होता है। त्वचा पर लाल चक्कते हो जाते हैं। सर दर्द और चक्कर के साथ ही हाथ-पैर की उंगलियां ठंडी पड़ जाती है। चिकनगुनिया एक बार होने पर चार से 12 दिन तक रहता है और इस दौरान हड्डियों, मांसपेशियों और त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इसके मरीजों को आराम करना चाहिए और खूब सारा पानी पीना चाहिए। वैसे तो इसकी कोई दवा न होने के कारण कोई इलाज नहीं है। ऐसे में मरीज का मच्छरों से बचाव करना जरूरी है।