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भगवानपुर ब्लॉक बना उत्तराखंड का डिजिटल विलेज 17-35-07
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केंद्र सरकार के डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट के तहत उत्तराखंड के एकमात्र भगवानपुर ब्लॉक को डिजिटल विलेज का दर्जा मिला है। प्रोजेक्ट के तहत ब्लॉक के हर गांव में एक सीएससी सेंटर खोलकर एजूकेशन लैब स्थापित की जा रही है। लैब में गांव के गरीब और स्कूल छोड़ चुके बच्चों के अलावा गांव के हर इच्छुक व्यक्ति को कंप्यूटर और इंटरनेट का बेसिक ज्ञान दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
केंद्र सरकार के अधीन कॉमन सर्विस सेंटरों पर जन सुविधा के लिए अनेक योजनाएं आती रहती है। इसी के तहत केंद्र सरकार ने हाल ही में सीएससी डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसमें पूरे भारत से 492 ब्लॉकों को चिह्नित किया गया है। इसमें उत्तराखंड के भगवानपुर ब्लॉक को सीएससी डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। बता दे कि भगवानपुर ब्लॉक के 51 ग्राम पंचायतों में 85 गांव शामिल हैं। ब्लॉक में 11 ऐसे गांव हैं जहां आबादी नहीं है। ऐसे में भगवानपुर ब्लॉक के 74 गांव में इस प्रोजेक्ट को शुरू किया जा रहा है। इसके तहत हर गांव में एक सीएससी सेंटर खोलकर वहां एजूकेशन लैब खोली जा रही है। इस लैब पर पांच कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बाद इन लैब में लोगों को कंप्यूटर और इंटरनेट का निशुल्क ज्ञान दिया जाएगा। सीएससी ई-गर्वमेंट सविर्सिज इंडिया लिमिडेट के स्टेट कोर्डिनेटर भूपेंद्र कुमार ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
एनईसी कंपनी ने गोद लिए 50 गांव
केंद्र सरकार ने सीएससी डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट को शुरू करने के साथ ही विभिन्न कंपनियों को प्रोजेक्ट के तहत गांव गोद लेने के लिए आमंत्रित किया था। इसके बाद निपोन इलेक्ट्रानिक कंपनी (एनईसी) ने भगवानपुर ब्लॉक के 50 गांव को गोद लिया है। गोद लेने के बाद हर सेंटर पर आने वाले बजट को कंपनी खुद वहन करेगी। उसके बाद सेंटर पर एजूकेशन लैब पर बच्चे कितनी संख्या में पढ़ने आ रहे हैं या बच्चों को कोई दिक्कत तो नहीं है, इसकी मॉनिटरिंग भी कंपनी के अधिकारी ही करेंगे।
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तिरंगे की लाइन दिखाएगी रास्ता
गांव में लोगों को सीएससी सेंटर तक लाने के लिए तिरंगे की लाइन रास्ता दिखाएगी। दरअसल जो सीएससी संचालक अपने यहां डिजिटल लैब लगाएगा उसे गांव के मुख्य द्वार से अपने सीएससी सेंटर तक दीवारों पर एक ऑरेंज कलर की लाइन खींचनी होगी। यह लाइन दर्शाएगी कि इस गांव में डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट चल रहा है। साथ ही सेंटर पर पढ़ने वाले बच्चों को भी यह लाइन मार्गदर्शक के रूप में काम करेगी।
गांव में कराया गया था सर्वे
किसी भी गांव या ब्लॉक में सीएससी डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले उस गांव का सर्वे किया जाता है। सर्वे में गांव के कम से कम 600 परिवारों को शामिल किया जाता है। इसमें लोगों के नाम, शिक्षित और अशिक्षित लोगों की जानकारी और कितने लोगों को कंप्यूटर ज्ञान आता है, इसकी जानकारी ली जाती है।
डिजिटल इंडिया की तर्ज पर डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट के तहत उत्तराखंड के भगवानपुर को चुना गया है। आने वाले समय में उत्तराखंड के अन्य ब्लॉकों और गांव का भी चयन किया जाएगा। इसपर लगातार काम चल रहा है।
- सचिन वर्मा, डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट, सेंटर्ल एसिसटेंट मैनेजर
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केंद्र सरकार के अधीन कॉमन सर्विस सेंटरों पर जन सुविधा के लिए अनेक योजनाएं आती रहती है। इसी के तहत केंद्र सरकार ने हाल ही में सीएससी डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसमें पूरे भारत से 492 ब्लॉकों को चिह्नित किया गया है। इसमें उत्तराखंड के भगवानपुर ब्लॉक को सीएससी डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। बता दे कि भगवानपुर ब्लॉक के 51 ग्राम पंचायतों में 85 गांव शामिल हैं। ब्लॉक में 11 ऐसे गांव हैं जहां आबादी नहीं है। ऐसे में भगवानपुर ब्लॉक के 74 गांव में इस प्रोजेक्ट को शुरू किया जा रहा है। इसके तहत हर गांव में एक सीएससी सेंटर खोलकर वहां एजूकेशन लैब खोली जा रही है। इस लैब पर पांच कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बाद इन लैब में लोगों को कंप्यूटर और इंटरनेट का निशुल्क ज्ञान दिया जाएगा। सीएससी ई-गर्वमेंट सविर्सिज इंडिया लिमिडेट के स्टेट कोर्डिनेटर भूपेंद्र कुमार ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
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एनईसी कंपनी ने गोद लिए 50 गांव
केंद्र सरकार ने सीएससी डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट को शुरू करने के साथ ही विभिन्न कंपनियों को प्रोजेक्ट के तहत गांव गोद लेने के लिए आमंत्रित किया था। इसके बाद निपोन इलेक्ट्रानिक कंपनी (एनईसी) ने भगवानपुर ब्लॉक के 50 गांव को गोद लिया है। गोद लेने के बाद हर सेंटर पर आने वाले बजट को कंपनी खुद वहन करेगी। उसके बाद सेंटर पर एजूकेशन लैब पर बच्चे कितनी संख्या में पढ़ने आ रहे हैं या बच्चों को कोई दिक्कत तो नहीं है, इसकी मॉनिटरिंग भी कंपनी के अधिकारी ही करेंगे।
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तिरंगे की लाइन दिखाएगी रास्ता
गांव में लोगों को सीएससी सेंटर तक लाने के लिए तिरंगे की लाइन रास्ता दिखाएगी। दरअसल जो सीएससी संचालक अपने यहां डिजिटल लैब लगाएगा उसे गांव के मुख्य द्वार से अपने सीएससी सेंटर तक दीवारों पर एक ऑरेंज कलर की लाइन खींचनी होगी। यह लाइन दर्शाएगी कि इस गांव में डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट चल रहा है। साथ ही सेंटर पर पढ़ने वाले बच्चों को भी यह लाइन मार्गदर्शक के रूप में काम करेगी।
गांव में कराया गया था सर्वे
किसी भी गांव या ब्लॉक में सीएससी डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले उस गांव का सर्वे किया जाता है। सर्वे में गांव के कम से कम 600 परिवारों को शामिल किया जाता है। इसमें लोगों के नाम, शिक्षित और अशिक्षित लोगों की जानकारी और कितने लोगों को कंप्यूटर ज्ञान आता है, इसकी जानकारी ली जाती है।
डिजिटल इंडिया की तर्ज पर डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट के तहत उत्तराखंड के भगवानपुर को चुना गया है। आने वाले समय में उत्तराखंड के अन्य ब्लॉकों और गांव का भी चयन किया जाएगा। इसपर लगातार काम चल रहा है।
- सचिन वर्मा, डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट, सेंटर्ल एसिसटेंट मैनेजर