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Research: लैंडिंग साइट से पीसीआर दो घंटे में लौट सकते हैं अंतरिक्ष यात्री, पढ़ें खास बातें

Thu, 15 Sep 2022 12:10 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Thu, 15 Sep 2022 12:10 PM IST
सार

प्रतीक त्रिपाठी ने नासा में स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और डोमिनिका के शोधकर्ताओं के साथ काम किया। इस दौरान उन्होंने लैंडिंग साइटों से स्थायी छाया क्षेत्रों (पीएसआर) तक आने-जाने की संभावित योजनाओं के मद्देनजर ढलान, तापमान, रोशनी और पैदल चलने में लगे समय जैसे मानकों का आकलन किया।

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Research: Astronauts can return to PCR from landing site in two hours
अंतरिक्ष - फोटो : Pixabay

विस्तार

आईआईटी रुड़की के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के रिसर्च स्कॉलर प्रतीक त्रिपाठी ने नासा के प्रतिष्ठित आर्टेमिस प्रोग्राम में अहम योगदान दिया है। उनका चयन मार्च में चंद्रमा के लिए आयोजित आर्टेमिस मिशन योगदान के लिए नासा के 10 सप्ताह के सालाना समर इंटर्न प्रोग्राम के लिए हुआ था। इसके तहत उन्होंने शोध में निष्कर्ष दिया है कि अंतरिक्ष यात्री लैंडिंग साइट से दो घंटे में एक स्थायी छाया क्षेत्र (पीएसआर) तक जाकर लौट सकते हैं।

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प्रतीक त्रिपाठी ने नासा में स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और डोमिनिका के शोधकर्ताओं के साथ काम किया। इस दौरान उन्होंने लैंडिंग साइटों से स्थायी छाया क्षेत्रों (पीएसआर) तक आने-जाने की संभावित योजनाओं के मद्देनजर ढलान, तापमान, रोशनी और पैदल चलने में लगे समय जैसे मानकों का आकलन किया। इन पीएसआर में आरंभिक सौर मंडल से अब तक के हाइड्रोजन, हिमजल और अन्य वाष्पशील जीवाश्मों के रिकॉर्ड होते हैं। प्रतीक के परीक्षण में वैज्ञानिकों ने खास दिलचस्पी ली है और यह नासा के आर्टेमिस थ्री मिशन का बुनियादी उद्देश्य बन सकता है।
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उन्होंने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में तीन संभावित लैंडिंग साइटों का आकलन किया है। प्रतीक के शोध कार्यों के निष्कर्षों के अनुसार अंतरिक्ष यात्री 2 घंटे में लैंडिंग साइट से सुगम पीएसआर आना-जाना कर सकते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि पहुंचने में आसान पीएसआर में पूरे वर्ष पृथ्वी पर अब तक के न्यूनतम तापमान से काफी अधिक तापमान रहता है। इस प्रोग्राम का आयोजन लूनर एंड प्लैनेटरी इंस्टीट्यूट (एलपीआई) और नासा के जोनसन स्टेट सेंटर ह्यूस्टन अमेरिका ने किया था।
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उन्होंने बताया कि इस बार नासा का समर इंटर्न प्रोग्राम काफी प्रतियोगी था। 300 से ज्यादा आवेदन आए थे जिसमें उनका चयन हुआ था। वहीं आईआईटी निदेशक प्रोफेसर अजीत कुमार चतुवेर्दी ने नासा के इस प्रतिष्ठित प्रोग्राम में प्रतीक के चयन और नासा के आगामी चंद्र मिशन के डिजाइन में उनके योगदान के लिए प्रतीक त्रिपाठी और उनके सुपरवाइजर प्रोफेसर आरडी गर्ग को बधाई दी है।

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