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अस्पताल में मौत के बाद भी मरीज का चलता रहा उपचार
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एक व्यक्ति ने निजी अस्पताल प्रबंधन पर मरीज की मौत के साढ़े तीन घंटे बाद तक उपचार जारी रखने और खून की जांच के साथ दवाएं मंगाने का आरोप लगाया है। आरोप है कि इस बीच उनसे 25 हजार रुपये भी ले लिए। परिजनों ने गंगनहर कोतवाली पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस ने शिकायत मुख्य चिकित्साधिकारी हरिद्वार को भेज दिया है।
गंगनहर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह ने बताया कि दरगाहपुर लक्सर निवासी कपिल कुमार ने तहरीर देकर बताया कि उनके बहनोई सतीश कुमार को 24 जून को तबीयत खराब होने पर रुड़की के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे मरीज को लेकर देर रात करीब तीन बजे अस्पताल पहुंचे थे। इसके बाद उपचार शुरू किया गया और सुबह करीब छह बजे डॉक्टरों ने मरीज को मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि इसके बाद भी डॉक्टरों ने उपचार जारी रखा। सुबह 8.24 बजे खून की जांच कराई और 8.36 बजे दवाई मंगाई।
उन्होंने मरीज से मिलने को कहा तो डॉक्टरों ने सुबह साढ़े नौ बजे मरीज की मौत होने की बात कहते हुए बॉडी ले जाने को कहा। आरोप है कि चंद घंटे में किए गए उपचार के नाम पर उनसे 25 हजार रुपये ले लिए। उनका कहना है कि अस्पताल ने मृत्यु प्रमाणपत्र भी 5.54 बजे सुबह का दिया है। जब मृत्यु उस समय हो गई थी तो उपचार के नाम पर यह ड्रामा क्यों किया गया। इंस्पेक्टर अमरजीत का कहना है कि मामला स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है। इसके चलते सीएमओ हरिद्वार को यह शिकायत भेजी गई। उनकी ओर से जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इंस्पेक्टर अमरजीत ने बताया कि अस्पताल से जानकारी मांगी गई थी। उनका कहना है कि मृत्यु प्रमाणपत्र देने में लिपिकीय त्रुटि हुई है।
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गंगनहर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह ने बताया कि दरगाहपुर लक्सर निवासी कपिल कुमार ने तहरीर देकर बताया कि उनके बहनोई सतीश कुमार को 24 जून को तबीयत खराब होने पर रुड़की के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे मरीज को लेकर देर रात करीब तीन बजे अस्पताल पहुंचे थे। इसके बाद उपचार शुरू किया गया और सुबह करीब छह बजे डॉक्टरों ने मरीज को मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि इसके बाद भी डॉक्टरों ने उपचार जारी रखा। सुबह 8.24 बजे खून की जांच कराई और 8.36 बजे दवाई मंगाई।
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उन्होंने मरीज से मिलने को कहा तो डॉक्टरों ने सुबह साढ़े नौ बजे मरीज की मौत होने की बात कहते हुए बॉडी ले जाने को कहा। आरोप है कि चंद घंटे में किए गए उपचार के नाम पर उनसे 25 हजार रुपये ले लिए। उनका कहना है कि अस्पताल ने मृत्यु प्रमाणपत्र भी 5.54 बजे सुबह का दिया है। जब मृत्यु उस समय हो गई थी तो उपचार के नाम पर यह ड्रामा क्यों किया गया। इंस्पेक्टर अमरजीत का कहना है कि मामला स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है। इसके चलते सीएमओ हरिद्वार को यह शिकायत भेजी गई। उनकी ओर से जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इंस्पेक्टर अमरजीत ने बताया कि अस्पताल से जानकारी मांगी गई थी। उनका कहना है कि मृत्यु प्रमाणपत्र देने में लिपिकीय त्रुटि हुई है।
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