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Roorkee News: करोड़ों का रेलवे अंडरपास पथ प्रकाश को तरसा, दिन में हेडलाइट जलाने को मजबूर वाहन चालक

Mon, 11 May 2026 05:45 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की Updated Mon, 11 May 2026 05:45 PM IST
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A railway underpass worth crores lacks streetlights, forcing drivers to use headlights during the day
पांच साल पहले 15 करोड़ की लागत से बना शुरू हुआ था अंडरपास, अब अंधेरे और अव्यवस्थाओं से लोग परेशान
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हादसे के डर से दिन में भी लाइट ऑन कर गुजर रहे दोपहिया और चार पहिया वाहन चालक



रुड़की। शहर के रेलवे स्टेशन के पास करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया रेलवे अंडरपास इन दिनों बदहाल व्यवस्थाओं के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब पांच साल पहले लोगों को जाम और रेलवे फाटक की समस्या से राहत देने के लिए इस अंडरपास का निर्माण कराया गया था, लेकिन यहां पथ प्रकाश की उचित व्यवस्था न होने से वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना रुड़की से होकर 42 जोड़ी से ज्यादा ट्रेनों का संचालन होता है। सुरक्षा को लेकर तेलीवाला फाटक बंद हो जाता था। रोजाना आए दिन हजारों लोगों को दिनभर में हर 30 मिनट बाद काफी देर तक एक छोर से दूसरे छोर पर ठहरना पड़ता था। बढ़ती समस्या को लेकर रेलवे ने अंडरपास बनाया था, लेकिन अंडरपास के भीतर दिन के समय भी घना अंधेरा बना रहता है। स्थिति यह है कि दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार अंधेरे के कारण वाहन चालक सामने से आ रहे वाहन को समय पर नहीं देख पाते, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। बारिश के दिनों में अंडरपास के अंदर जलभराव और फिसलन की समस्या भी बढ़ जाती है। वहीं रात के समय स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। राहगीरों और वाहन चालकों का कहना है कि कई बार यहां छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।

स्थानीय लोगों ने रेलवे विभाग से जल्द अंडरपास में हाईमास्ट और पर्याप्त पथ प्रकाश व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन मिल सके।



अंडरपास की बदहाली पर लोगों ने जताई नाराजगी



अंडरपास में इतना अंधेरा रहता है कि दिन में भी हेडलाइट जलानी पड़ती है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। पैदल चलने वाले भी वहां से गुजरते वक्त फोन टॉर्च का सहारा लेते हैं।
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अमित कुमार, वाहन चालक



करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। रेलवे को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। एक-दो लाइट लगी है, लेकिन वो शोपीस बनाकर कर गई है।



सोनू शर्मा, स्थानीय निवासी



शाम के समय महिलाओं और बुजुर्गों को यहां से निकलने में डर लगता है। रोशनी की बेहद जरूरत है। अंडरपास के किनारों में काफी कूड़ा भी जमा हो चुका है।



कुसुम देवी, स्थानीय निवासी



हल्की सी बारिश में पानी भरने और अंधेरे की वजह से लोगों को काफी परेशानी होती है। कई बार वाहन फिसल चुके हैं। निकासी के उचित इंतजाम नहीं होने से अक्सर रास्ता बाधित होता रहता है।
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इमरान मलिक, व्यापारी
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